दर्शन शब्द ग्रीक भाषा के शब्द philosophia से बना है जिसका अर्थ होता है ज्ञान का प्रेम (Love of knowledge)

When is to celebrate?
विश्व दर्शन दिवस एक अंतर्राष्ट्रीय दिवस है जिसे यूनेस्को द्वारा नवंबर के प्रत्येक 3rd गुरुवार को मनाया जाता है, यह पहली बार 21 नवंबर 2002 को मनाया गया था।

Reason to Celebrate!

प्रत्येक वर्ष विश्व दर्शन दिवस मनाकर, नवंबर के तीसरे गुरुवार को, यूनेस्को मानव संस्कृति के विकास के लिए, प्रत्येक संस्कृति के लिए और प्रत्येक व्यक्ति के लिए दर्शन के स्थायी मूल्य को रेखांकित करता है। यूनेस्को हमेशा philosophy से निकटता से जुड़ा रहा है |

India : A country of Spiritualism

भारत देश मे पिछले कई वर्षों से महान संत महात्माओं ने जन्म लिया है इसलिए ही भारत को गुरु देश भी कहा जाता है और इस भयानक कलयुग के समय में भी एक महान संत ने भारत देश की इस पवित्र धरती पर अवतार लिया है जिन्होंने करोडो लोगों को सत्संगों के माध्य्म से अच्छी नेक शिक्षा दी है, व गुरुमंत्र देकर सुखी जीवन जीने का तरीका बताया है , उनकी पावन शिक्षा पर चलते हुए करोडो लोग आज खुशहाल जीवन व्यतीत कर रहे है और देश मे ही नही बल्कि विदशों जैसे- जापान , इटली , अमेरिका , कनाड़ा में भी मानवता भलाई के कार्य कर मानवता की सच्ची मिशाल कायम कर रहे है , अब आप सोच रहे होंगे कि ऐसे कोनसे संत है तो वह संत है Saint Dr. Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan , जिन्होंने पूरी दुनिया मे राम नाम का डंका बजा रखा है ।

Know about the true modern spiritual philosophy

  1. Supreme Power God is Omnipresent

आज अधिकतर लोग भगवान को मंदिर, मस्जिद, गुरूद्वारा व चर्च में ढूंढते हैं। कोई ईश्वर को पाने के लिए भगवा कपड़े पहनता है लेकिन Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan कहते हैं कि भगवान कण-कण व जर्रे-जर्रे में समाया हुआ है इस दुनिया में जितने भी पशु-पक्षी, पेड़-पौधे,हवा,पानी सब में उस ईश्वर का वास है और यहां तक की हर इंसान के अंदर भगवान का रूप है उसे पाने के लिए हमें कहीं बाहर जाने की जरूरत नहीं, कोई पहरावा नहीं बदलना बस रोजाना सुबह-शाम सच्चे मन से उसकी भक्ति करे तो आप उसे अपने अंदर देख पायेंगे और उसकी दया,मेहर हासिल कर पाएंगे जो दोनों जहान में आपके साथ रहेंगे हमारे धर्म ग्रंथों में भी लिखा है कि ईश्वर को खोजना है तो सबसे पहले अपने अंदर झांको और उसकी बनाई सृष्टि से निस्वार्थ प्रेम करो।

  1. We all are One and Humanity is our caste

हमारे देश में भिन्न-भिन्न भाषा-बोलियां, वेशभूषा, रहन-सहन अलग-अलग हैं और कुछ लोग जात-पात को लेकर आपस में लड रहे हैं और ऊंच-नीच का भेदभाव करते है। ईश्वर ने मनुष्य को जन्म देकर खुद मुख्यतार बनाया और इसे इच्छानुसार कर्म करने व राम-नाम जपने का अधिकार दिया लेकिन मनुष्य इंसानियत के सभी गुणों को भूलकर बुरे कर्मों के कारण हैवानियत की ओर जा रहा है। Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan फरमाते है कि हम सबकी एक ही जात वो है इंसानियत। हम सब भाई-भाई है। पूज्य गुरूजी ने समाज में दिन-प्रतिदिन बढ़ रही बुराईयों को खत्म करने और इंसानियत को पुनर्जीवित करने के भी लिए लोगों को मानवता का पाठ पढ़ाया और समझाया कि प्रेम-प्यार से रहे। अगर कोई भूखा-प्यासा है तो उसे भोजन दें,बीमार का इलाज कराये आदि यही इंसानियत का असली फर्ज है और गुरु जी की प्रेरणा से आज करोड़ो लोगों ने बुरे कर्मों को छोड़कर सच्ची इंसानियत को अपनाया है।

  1. Don’t kill the Innocent for momentary Taste

धर्मो में भी लिखा गया है कि मांसाहार राक्षसों का खाना है क्योंकि हमारे देवी-देवता भी शाकाहारी भोजन करते थे और आज हमारे वैज्ञानिक भी मानते हैं कि हमारे शरीर का ढांचा शाकाहारी भोजन के लिए बना है इसलिए हमारी आंते मांस को पचा नहीं पाती जिससे वह सड़ता रहता है और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां पैदा होती है लेकिन लोग अपने जीभा के स्वाद के लिए निर्दोष जीवों को मारकर खा रहे हैं | संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने लोगों को समझाया कि लोगों को यह भ्रम है कि मांसाहार खाने से ज्यादा ताकत आती है जबकि शाकाहारी भोजन जैसे सोयाबीन, दालें,पनीर,मेवे में मांस कई गुना ज्यादा प्रोटीन व विटामिन होते हैं और गुरूजी के पावन वचनों को सुनकर करोड़ों लोगों ने मांसाहार त्यागकर शाकाहारी भोजन को अपनाया और आज एक स्वस्थ जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

  1. Shun Hypocrisy

आज हमारे देश में कई तरह के पाखंडवाद हो रहे हैं जैसे बिल्ली का रास्ता काटना, हफ्ते के दिनों का शुभ-अशुभ होना,भूत प्रेत आना आदि। इन अंधविश्वासो के चलते निर्दोष, बेजुबान जीवों की बलि चढ़ा दी जाती है। Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan फ़रमाते है कि कुछ भी अशुभ नहीं होता और ना ही कोई भूत प्रेत होता है और इन सबका कारण है अज्ञानता। यह सब हमारी मानसिक कमजोरी के कारण होता है, इंसान कई बार इतनी टेंशन ले लेता है कि उसे सही गलत का होश नहीं रहता, गुरू जी ने जड़ पूजा, भूत प्रेत का भेद बताकर ऐसे पाखंडवाद से बाहर निकाला।

  1. Selfless love

यह पूरी सृष्टि भगवान ने बनाई और यदि हमें ईश्वर को पाना है तो उसकी बनाए प्रत्येक जीव की सेवा करनी होगी। इसलिए पूज्य गुरू संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने लोगों को प्रेरित किया कि हमें जो भी जीव दर्द में हो उसका दुख दूर करना चाहिए।
हम मनुष्य तो अपने दर्द को बयां कर सकते हैं लेकिन बेजुबान पशु-पक्षी अपनी पीड़ा नहीं बता सकते इसलिए रोजाना इनके लिए भोजन व पानी जरूर रखें और कोई पशु घायल हो तो उसका इलाज करवाएं। Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan की प्रेरणा से उनके करोड़ों अनुयाई गरीब जरूरतमंद लोगों को राशन, रक्तदान, बेसहारा को मकान और पशुओं के लिए चारा व पानी आदि कार्य करके भगवान के बनाए हर जीव की सेवा कर रहे हैं।

  1. Love all creatures Selflessly
    इस जन्म में यह दो काम करो, एक नाम जपो और प्रेम करो, किसी जीव का दिल ना दुखाना कभी, मौत याद रखो मालिक से डरो l पूज्य गुरु संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इंसान को सभी से नि:स्वार्थ भाव से प्रेम करना चाहिए और मालिक के नाम का जाप करना चाहिए। नाम जपो और प्रेम करो, प्रेम में राम समाया है। जो इंसान मालिक की बंदगी करता है और उसका पल-पल शुक्रिया अदा करता है और मालिक की बनाई गई सृष्टि से नि:स्वार्थ भाव से प्रेम करता है तो अल्लाह उसे खुशियों से नवाज देता है, किसी प्रकार से कोई भी कमी नहीं छोड़ता। अगर हम बेइंतहा खुशियां हासिल करना चाहते हैं तो रोजाना भगवान की बंदगी करें, व उसकी बनाई हुई सृष्टि से नि:स्वार्थ भाव से प्रेम करें और कभी भी अनजाने में भी किसी का दिल ना दुखाएं।
  2. Meditation to defeat negativity and disease like cancer

वर्तमान में इस भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग इतना व्यस्त हो गए हैं कि खुद के लिए समय ही नहीं है इसलिए जब कोई दुख, बीमारी आती है तो गम, चिंता सताने लगती है और मनुष्य खुद को असहाय महसूस करने लगता है और कई बार चिंता इतनी बढ़ जाती है कि इंसान आत्महत्या जैसा महापाप करने का सोचने लगता है लेकिन Saint Dr. Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan बताते हैं कि मेडिटेशन यानी ध्यान एक ऐसी रामबाण औषधि है जो हमारे शारीरिक व मानसिक दोनों बीमारी का इलाज कर सकती है।जब आप मेडिटेशन करते हैं तो आपके अंदर सोई हुई आंतरिक शक्ति जाग्रत हो जाती है और हमारा आत्मबल बढ़ता है जिससे हम अपने नेगेटिव विचारों पर कंट्रोल करके हर समस्या को आसानी से हल कर सकते हैं और अपने विलपॉवर को बुलंदियों तक ले जा सकते है, मेडिटेशन के अभ्यासकर से विलपॉवर बढ़ाकर करोड़ों लोग 3rd स्टेज के कैंसर को हराकर एक नई जिंदगी हासिल कर चुके हैं।

  1. Liberated soul from the vicious transmigration cycl

गुरु जी ने भगवान के नाम की अनमोल दात देकर 84 लाख जूनियों के जन्म-मरण के चक्कर से मोक्ष मुक्ति दिलवाई। गुरु जी फ़रमाते हैं, रोज़ाना सुबह-शाम सच्चे दिल से भगवान की भक्ति करें, चाहे सुख हो या दुख, कभी भी ईश्वर को ना भूलें।

Conclusion

हमें भी हमेशा सच्चाई के रास्ते पे चलना चाहिए, कभी किसी का बुरा नहीं करना चाहिए बल्कि हमेशा दूसरों का भला मांगना चाहिए क्योंकि जब हम किसी का भला माँगते है या भला करते हैं तो भगवान आपका भला पहले करता है और अगर हम किसी की निःस्वार्थ सेवा करते हैं तो वो हमेशा हमें दुआएं देगा और हम बुज़ुर्गों से सुनते आए हैं कि जहाँ दवा काम नहीं करती, वहाँ दुआ काम कर जाती है इसलिए हमेशा सबका भला करें और उनसे दुआएं प्राप्त करें।

बीमारियों से बचने के लिए कैसे बढ़ाएं Immunity

Immunity- शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को ही Immunity कहा जाता है।

किसी भी रोग या बीमारी से लड़ने के लिए हमारी Immunity Boost होना बेहद जरूरी है, लेकिन आज की इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में हम अपने शरीर पर और खान-पान पर बिल्कुल ध्यान नहीं दे पाते, बस काम-धंधा, बिजनेस , व्यापार ही हमारा मुख्य लक्ष्य होता है, लेकिन स्वस्थ रहने के लिए हमें अपने खान-पान पर ध्यान देना अति आवश्यक है ताकि हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत रहे।

हम सब जानते हैं कि कोरोना वायरस पूरी दुनिया में फैल चुका है, ऐसे में इस समय में हमारी Immunity Boost होना बेहद जरूरी है ताकि हम कोरोना वायरस से ही नहीं बल्कि अन्य छोटी-बड़ी बीमारियों से भी बच सकें। जब शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ती है तो इसका असर सर्दी, जुकाम, खांसी, बुखार व अन्य बीमारियों के रूप में नज़र आता है।

Saint Dr. Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan ने कुछ ऐसे टिप्स बताए हैं जो जादुई रूप से Immunity System को बढ़ाते हैं।

  1. श्यामा तुलसी Use natural herb to increase immunity – श्यामा तुलसी के पत्ते हमारे शरीर के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करते हैं, श्याम तुलसी शारीरिक प्रतिरक्षा के लिए वरदान है, इसके नियमित सेवन से आप कई बीमारियों से लड़ सकते हैं। श्याम तुलसी एक महान प्रतिरक्षा बूस्टर है और इसके एंटीबायोटिक, कीटाणुनाशक, कवकनाशी गुण हमारे शरीर को बैक्टीरिया, वायरस और फंगल संक्रमण से बचाते हैं।श्याम तुलसी को दिन में तीन – चार बार चाय या दूध के साथ लें तो यह आपकी इम्यूनिटी को बढ़ाएगी।
  2. Ayurvedic Potion- यह एक पेय पदार्थ है, जो आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाता है।
  • यह काढ़ा सर्दी जुकाम में तुरंत आराम दिलाता है।
  • किसी भी संक्रमण से लड़ने के लिए Immunity होना बहुत ज़रूरी है। यह काढ़ा तुलसी, हल्दी, अदरक, लौंग, गिलोय आदि सामग्रियों को मिलाकर बनाया जाता है।
  • तुलसी और हल्दी में एंटीऑक्सीडेंट के साथ-साथ एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं जो आपकी Immunity को बढ़ाने में मदद करेंगे।
    जानिए कि घर पर विशेष काढ़ा कैसे बनाया जाता है। सामग्री: तुलसी के पत्ते – 4
    नीम के पत्ते – 4
    लौंग – 2
    इलायची – 2
    गिलोय के पत्ते / टहनी – 10 ग्राम
    जीरा – 5 ग्राम
    मुलेठी – एक चुटकी
    हल्दी – एक चुटकी
    अजवाइन – एक चुटकी
    सौंठ – एक चुटकी तरीका:
    उपरोक्त सभी को 300 ग्राम पानी में मिलाएं और इसे तब तक उबालें जब तक पानी 150 ग्राम न रह जाए। 150 ग्राम काढ़ा 3 लोगों के लिए प्रायप्त है। अब, इस काढ़े को दिन में एक बार धीरे-धीरे पिएं। इस काढ़े में 20 ग्राम गुड़ या शहद भी मिलाया जा सकता है।
  1. पनीर- पनीर का सेवन करने से प्रतिरक्षा प्रणाली में वृद्धि होती हैं क्योंकि यह कैल्शियम, विभिन्न खनिजों व प्रोटीन का एक समृद्ध स्रोत है। पनीर का नियमित सेवन चमत्कारिक रूप से Immunity को बढ़ाता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने से शरीर कई छोटी-बड़ी बीमारियों से आसानी से लड़ सकता है।
  • यह रोग ग्रस्त कोशिकाओं की वृद्धि को रोकता है ताकि वह बढ़ ना पाएं।
  • इसमें ट्रिप्टोफैन अमीनो एसिड होता है, जो तनाव एवं डिप्रेशन नहीं होने देता, नींद भी अच्छी आती है, ऐसे में इसका सेवन रात के समय करना ठीक होता है।
  1. पिस्ता – छोटा सा पिस्ता पोषक तत्वों से भरपूर होता है। 28 ग्राम पिस्ते में बहुत ही अच्छी मात्रा में फाइबर, प्रोटीन, पोटेशियम, विटामिन बी6 और मैग्नीज होता है। पिस्ते में सब से ज्यादा एंटीऑक्सीडेंट्स है, इसलिए यह शरीर की Immunity बहुत अच्छे से बढ़ाता है।
    इस्तेमाल- इसे खीर, हलवे में डालकर या रोस्टेड रूप में खाया जा सकता है।
  2. ध्यान के साथ प्राणयाम(Meditation With Pranayam)- रोजाना कम से कम 15 मिनट ध्यान के साथ प्राणायाम करें, ध्यान के साथ प्राणायाम भी जरूर करें इसे शरीर की Immunity बढ़ती है।
  • यह फेफड़ों व श्वसन प्रणाली को मजबूत व साफ बनाता है।
  • यह तनाव व चिंता को कम करता है।
  • इससे फिटनेस भी बढ़ती है व कई श्वास की बीमारियां चली जाती हैं।

6.Jogging – स्वस्थ जीवन जीने के लिए जॉगिंग बहुत महत्वपूर्ण है।

30 मिनट की जॉगिंग आपके अच्छे स्वास्थ्य के लिए बहुत कुछ कर सकती है।

How Jogging Boost Immune System

-यह हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाने में मदद करता है और विभिन्न प्रकार की बीमारियों से लड़ने में मदद करता है।

-यह शरीर की मांसपेशियों और हड्डियों को मजबूत बनाता है।

-यह शरीर के रक्त परिसंचरण में सुधार करता है और हृदय को मजबूत करता है।

-यह पाचन समस्याओं को दूर करता है और पाचन तंत्र को सक्रिय करता है।

  • हर दिन जॉगिंग करने से शरीर में ऊर्जा आती है, जिससे आप दिन भर तरोताजा रहते हैं।
  1. Vitamin C – विटामिन सी से भरपूर फल जैसे -किन्नू, मौसमी, संतरा, आंवला आदि Immunity को बढ़ाते हैं, इसलिए इन फलों का सेवन करें।
  2. Pulses- संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसां फ़रमाते हैं कि दालें भी प्रोटीनयुक्त होती हैं, चने की दाल, मसूर की दाल व मूंगफली में 24 -30 % तथा सोयाबीन व काले चने में 42 -45 % तक प्रोटीन होता है और यह Immunity को बढ़ाते हैं इसलिए दालों को भी अपने आहार में जरूर अपनाएं।
  3. पर्याप्त प्रोटीन प्राप्त करें-
    प्रोटीन शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, विशेष रूप से उपचार और चोट रिकवरी में, इसलिए प्रोटीन युक्त भोजन खाएं।

Home Made Protein जैसे- चने, सोयाबीन, पनीर, दही, दूध, छाछ, दालें, पिस्ता इन खाद्य पदार्थोँ का सेवन जरूर करे।

Conclusion
हमें अपना व अपने परिवार की सेहत का ध्यान रखना चाहिए जिंदगी बहुत कीमती है और सिर्फ एक बार मिलती है इसकी अच्छे से देखभाल करें, पूज्य गुरु संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसा द्वारा दिये हुए टिप्स को फॉलो कर अपने इम्युनिटी सिस्टम को मजबूत बनाए |

एक ऐसी संस्था जो दे रही हैं भाईचारे और सभी जीवों से प्रेम करने का सन्देश

An organization

हमारा देश विविधताओं का देश है जिसमें विभिन्न धर्मों के लोग जैसे हिन्दू , मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई रहते है जिसमें हर किसी का अलग-अलग रीति-रिवाज, पहरावा होता है लेकिन इस सबके बावजूद इनमें एक समानता है और वह है आपसी प्रेम का भाईचारा। इसी भाईचारे की वजह से आज भी इंसानियत जीवित है।

Meaning of Sacha Sauda

सच्चा सौदा में दो शब्द हैं सच्चा का अर्थ- केवल प्रभु ,परमात्मा, अल्लाह वाहेगुरु, गॉड ही है ,जो कभी झूठ नहीं हो सकता , प्रलय महाप्रलय में सब कुछ समाप्त हो सकता है लेकिन परमात्मा और उसका नाम हमेशा कायम रहेगा, इसी प्रकार यहां सौदा या व्यापार का अर्थ -सतगुरु की बंदगी से हैं जिस प्रकार व्यापार में कुछ लेने के लिए कुछ देना पड़ता है उसी प्रकार सच्चा सौदा से अभिप्राय परमात्मा को प्राप्त करने के लिए उसकी भक्ति इबादत में अपने श्वासो को लगाना तथा सब जीवों की निःस्वार्थ सेवा करना है रूह को उसके मूल परमात्मा में मिलाना ही सच्चा सौदा का परम लक्ष्य है ।

सर्वधर्म संगम(Confluence Of All Religions)

सच्चा सौदा कोई नया धर्म, मजहब, फिरका ,संप्रदाय या कोई नई लहर नहीं है सच्चा सौदा वह आध्यात्मिक केंद्र है जिसमें सतगुरु मुर्शिद के हुक्म में रहते हुए परमात्मा की बंदगी की जाए ,रूहानियत के सच्चे रहबर बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज ने धर्म में आई जटिलताओं, कुरीतियों बाह्य कर्मकांडों से बचाने एवं आत्मा के कल्याण के लिए सन 1948 में रूहानी कॉलेज Dera Sacha Sauda की स्थापना कर मानवता पर महान उपकार किया ।

Dera Sacha Sauda देश का ऐसा रूहानी कॉलेज है , जहां अच्छाई करने की सीख मिलती है l

कैसे और कब हुई डेरा सच्चा सौदा की स्थापना ?

डेरा सच्चा सौदा की स्थापना- डेरा सच्चा सौदा की स्थापना 29 अप्रैल 1948 को परम पूजनीय संत बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज ने अपने मुर्शिद- कामिल के वचनानुसार सिरसा शहर से करीब 3 किमी की दूरी पर बेगू-रोड शाह सतनाम जी मार्ग पर 29 अप्रैल 1948 को की थी, सच्चा सौदा नाम से छोटी सी कुटिया बनाई, डेरा सच्चा सौदा रूपी नन्हा सा पौधा लगाया ,आप जी ने 12 साल तक नोट, सोना, चांदी, कपड़े कंबल बांट बांट कर हजारों लोगों को राम नाम से जोड़ा।

आप जी पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज को 28 फरवरी 1960 को गुरुगद्दी सौंप कर उन्हें गुरुगद्दी के उत्तराधकारी बना दिया और आप जी 18 अप्रैल 1960 को ज्योति जोत समा गए व पूजनीय परम पिता जी की अपार रहमत से Dera Sacha Sauda प्रफुल्लित होकर रूहानी बाग बन पूरी दुनिया में महकने लगा है |

पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने 11 लाख से भी ज्यादा जीवों को नाम की अनमोल दात देकर लाखो घरों को नरक से स्वर्ग बनाया, 23 सितंबर 1990 को Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan को सारी साध संगत के बीच में गुरुगद्दी पर बिठाकर वचन फरमाए, “हम थे हम है और हम ही रहेंगे” और आप जी 13 दिसम्बर 1990 को शरीर बदल कर पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह इंसां जी में जा समाए |

पूज्य गुरु जी के लिए बेपरवाह शाह मस्ताना जी के वचन

23 सितंबर 1990 को मौजूदा गुरु पूजनीय हजूर पिता संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसा को डेरा सच्चा सौदा में बतौर तीसरे पातशाह विराजमान कर पूज्य बेपरवाह जी के वचनों को चरितार्थ किया, वचनों की सच्चाई को दुनिया में स्पष्ट किया। बेपरवाह जी ने जैसा फरमाया था, तीसरे गुरु के रूप में तूफान मेंल ताकत आएगी और डेरा सच्चा सौदा के सब कार्य, राम -नाम के कार्य मानवता भलाई के कार्य, साध- सगंत की संभाल का काम है डेरा सच्चा सौदा की देख-रेख का कार्य , सभी कार्य तूफान मेल गति से होने लगे। अर्थात बेपरवाह जी के वचनानुसार Dera Sacha Sauda दिन दोगुनी और रात चौगुनी गति से बढ़ते हुए रूहानियत व इंसानियत का समंदर बन गया।

डेरा सच्चा सौदा में चल रहे 134 मानवता भलाई के कार्य

पूज्य गुरु संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसा जी ने Dera Sacha Sauda में रूहानियत के साथ-साथ मानवता व समाज भलाई के 134 कार्य निर्धारित कर उन्हें गति प्रदान की।

मानवता और समाज सेवा को समर्पित Dera Sacha Sauda द्वारा वेश्यावृत्ति जैसी सामाजिक बुराई के दल-दल में फंसी युवतियों, बदनसीब विधवाओं को जीवनसाथी का सहारा देकर उनके जीवन में खुशहाली लाने के लिए की किए गए |

डेरा सच्चा सौदा में एक ऐसी मुहिम चलाई गई हैं जिसमे वेश्यवृति में फंसी लड़कियों को बाहर निकाल कर उनकी अच्छे घरों में शादियां करवाई जाती है, उन लड़कियों को पूज्य गुरु जी ने माँ बाप की जगह अपना नाम दिया है और उन लड़कियों को शुभदेवी का नाम दिया हुआ है |

Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan जी के एक आह्वान से डेरा सच्चा सौदा के 1500 से भी ज्यादा नोजवान सामने आए जो ऐसी लड़कियों से शादियां करने के लिए तैयार है, गुरु जी ने इन नोजवानों को भक्तयोधा का नाम दिया है |

Center of Spirituality

Dera Sacha Sauda पूरी दुनिया का अद्यात्मिकता केन्द्र बना हुआ है, यहा देश के ही नही बल्कि विदेशों से भी लोग आते है और विदेशों में भी Dera Sacha Sauda के आश्रम बने हुए है ,यहा अद्यात्मिकता का सच्चा ज्ञान कराया जाता है व गुरुमंत्र देकर ईश्वर प्राप्ति का मार्ग बताया जाता है ओर 6.5 करोड़ लोग गुरुमंत्र लेकर आज खुशहाल जीवन जी रहे है ।
सर्व धर्म संगम जात-पात, धर्म मजहब का भेद मिटाया
Dera Sacha Sauda में सभी धर्मों का आदर सत्कार किया जाता है , यहाँ धर्म जात का भेद मिटाया जाता है , Dera Sacha Sauda में सभी धर्मों के लोग आते है और यहाँ सदभावना व इंसानियत का पाठ पढ़ाया जाता है ।

God Is One , We all are one -A strong message since 1948

मालिक एक नाम अनेक
Dera Sacha Sauda सभी धर्म गुरुओं का सम्मान करता है और
Dera Sacha Sauda के प्रमुख Saint Dr. Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan हमेशा यही समझाते है कि हमारा मालिक एक है उसके नाम अनेक है जिस तरह पानी को नीर, नीरू ,वासर, वाटर ,जल आदि नामों से पुकारते है उसी प्रकार भगवान को भी अलग – अलग धर्मो के लोग अलग – अलग नामों से पुकारते है लेकिन जिस तरह पानी के अनेकों नाम होने से पानी का रंग या स्वाद नही बदलता ,उसी प्रकार भगवान के अलग अलग नाम होने से भगवान नही बदलता ।

भारतीय समाज में डेरा सच्चा सौदा की इस पहल से जहां समाज में जागरूकता और बदलाव देखने को मिलता है शायद यह देश का प्रथम रुहानी कॉलेज है पूज्य गुरु जी की प्रेरणा पर चलते हुए डेरा अनुयायिओं ने निशक्त जनों, अपगों व विधवाओं के दर्द को समझते हुए उन्हें नई रोशनी दी है, डेरा सच्चा सौदा एक मिसाल बन चुका है |

लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देकर उनका भविष्य बनाएं और देश का गौरव बढ़ाए

एक लड़की के अनेक रूप हैं: मां, पत्नि, बहन आदि। इंसान को जन्म देने वाली भी एक लड़की ही है इसलिए जब ईश्वर धरती पर मनुष्य रूप में आए तो माँ के गर्भ से ही जन्म लिया।

हमारा देश पुरूष प्रधान समाज की सोच वाला है जहां लड़कियों को गृहस्थी संभालने व बच्चों को पालने के लिए घरों में बांध दिया जाता है लेकिन हम यह भूल जाते हैं कि उनके भी कुछ सपने हैं जिन्हें वे पूरा करना चाहती हैं परन्तु ये तभी संभव है जब आप उनका साथ दें व उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें और आत्मविश्वास को बढ़ाएं।

बेटियों को दें आगे बढ़ने का मौका

वर्तमान समय में लड़कियों का शिक्षित होना बहुत जरूरी है क्योंकि शिक्षा के द्वारा ही वे आत्मनिर्भर बन पाएंगी। लेकिन कहीं ना कहीं आज भी हमारा देश लड़कियों की शिक्षा में पिछड़ा हुआ है। इसके लिए हमें कुछ ठोस कदम उठाने चाहिए और लड़कियों की शिक्षा में सुधार करना चाहिए। इसके लिए सरकार द्वारा विभिन्न योजनाएं जैसे ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान चलाया गया है लेकिन आज भी ऐसे लोग हैं जो बेटियों को आगे बढ़ने नहीं देते क्योंकि वे भूल गए हैं कि कल्पना चावला जिसने अंतरिक्ष में अपना परचम लहराया वो भी एक लड़की थी।

बेटियों को दें अच्छी शिक्षा

आज का दौर कुछ ऐसा है कि बिना शिक्षा के बिना कोई सम्मान हासिल नहीं कर सकता। ज्ञान एक ऐसी चीज़ है कि जिसे कोई आप से नहीं छीन सकता। शिक्षा हर किसी के लिए जरूरी है। माँ बाप का ये फ़र्ज़ बनता है कि वे अपने बेटे, बेटी में भेद किए बिना उनको शिक्षित करें।
बेटियों को घर की चारदीवारी में कैद न करके उनको भी उनका भाग्य आजमाने का मौका दें। उनको भी उच्च शिक्षित करके अपने पैरों पे खड़ा होने के काबिल बनाएं।

वैसे तो हमारा देश हर क्षेत्र में आये दिन नए आयाम स्थापित कर रहा है। हर क्षेत्र में महिलाएं पुरुषों को बराबर की टक्कर दे रही हैं। क्योंकि दोनों में बराबर क्षमताएँ होती हैं।

अगर दोनों को बराबर अवसर मिले तो हमारा देश विकास के उच्चतम स्तर पर पहुंच जाए। लेकिन ऐसा होता नहीं है क्योंकि देखने में आता है कि लोग बेटों को तो शिक्षित करना चाहते हैं और करवाते भी हैं, लेकिन बेटियों को नहीं, जो कि बिल्कुल भी सही नहीं है। शहरों में तो ये कम देखने को मिलता है, बहुत से गांव भी अपनी बेटियों की शिक्षा को लेकर काफी जागृत हैं लेकिन कुछ गांवों की स्थिति तो इतनी भयावह है कि वे अपनी बच्चियों को बोझ समझते हैं। उन्हें शिक्षा से वंचित रखकर उनके भविष्य से खिलवाड़ किया जाता है।

ऐसा करके वो लोग अपने पैरों पे आप कुल्हाड़ा मारते हैं क्योंकि वे ये नहीं समझते कि अगर वे अपनी बेटी को संस्कारवान बनाते हुए शिक्षित भी करते हैं तो हो सकता है वही बेटी उनके बेटे से भी ज्यादा समाज में उनकी प्रतिष्ठा बढ़ाए।

बेटियां भी बढ़ा सकती हैं माँ बाप का सम्मान

Saint Dr. Gurmeet Ram Rahim Ji ने लोगों को समझाया कि एक बेटी को उच्च शिक्षा व अच्छे संस्कार दिए जाएं तो वो भी अपने माता-पिता और देश का नाम रोशन कर सकती है इसलिए उनका गर्भ में कत्ल ना करें, बल्कि उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए बेटी को पढ़ाएं।

बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए Dera Sacha Sauda द्वारा कई मुहिम चलाई गई है

जैसे:-
द बड अॉफ नॉलेज- इस मुहिम के तहत लोगों को जागरूक किया जाता है कि बेटा-बेटी को एक सम्मान शिक्षा दें।

जो गरीब परिवार बेटियों को नहीं पढ़ा सकते उन्हें अच्छे स्कूल व कॉलेज में मुफ्त शिक्षा देना।

पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि अगर बेटियों को अच्छी शिक्षा दी जाए तो वह भी बेटों की तरह अपने माता-पिता का देश का नाम रोशन कर सकती हैं। गुरु जी की पावन प्रेरणा पर चलते हुए डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों ने बेटा बेटी में कोई भी भेदभाव ना करने का प्रण लिया है और गुरु जी की पावन प्रेरणा पर चलते हुए बेटियों को बेटों के समान शिक्षा दिलवा रहे हैं और हर क्षेत्र में लड़कियां आज लड़कों की तुलना में आगे हैं।

बेटियों को बनाएं आत्मनिर्भर

पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि लड़कियों को सेल्फ डिफेंस सीखाना चाहिए ताकि कभी वह बाहर अकेली जाती है तो किसी भी चीज से डरे ना बल्कि पूरे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें और आत्मनिर्भर बनें।

इसके लिए गुरु जी ने कई मुहिम चलाई हैं और बेटियों के लिए शिक्षण संस्थान भी खोले गए हैं।

डेरा सच्चा सौदा समाज में लड़कियों की शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए विभिन्न स्थानों पर शिक्षण संस्थानों की स्थापना की जो शहरी क्षेत्र के साथ साथ ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों का स्तर सुधारने के लिए प्रयासरत है। इन संस्थाओं में गरीब परिवार की लड़कियों को मुफ्त शिक्षा दी जाती है।

डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने लड़कियों के अच्छे Education के लिए डेरा सच्चा सौदा में शिक्षण संस्थान खोले हैं। ये शिक्षण संस्थान हरियाणा के सिरसा, राजस्थान के श्री गुरुसरमोडिया, कोटड़ा, तारानगर, मध्य प्रदेश के बुधनी में खुले हुए हैं, जिसमें बेटियों को अच्छी शिक्षा दी जाती है।

उन स्कूलों, कॉलेजों को Shah Satnam Ji School/Colleges के नाम से जाना जाता है, उन स्कूलों, कॉलेजों में पढ़ रहे बच्चें हर साल अवल आ रहे हैं।

पूज्य गुरु संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां द्वारा खोले गए विभिन्न शिक्षण संस्थान–

शाह सतनाम जी गर्ल्स स्कूल एंड कॉलेज– सिरसा(हरियाणा)
शाह सतनाम जी गर्लस स्कूल एंड कॉलेज– श्री गुरुसर मोडिया(गंगानगर)
शाह सतनाम जी गर्ल्स स्कूल – तारानगर (चूरू)
शाह सतनाम जी गर्ल्स स्कूल -बुधनी ,सिहोर (मध्य प्रदेश)
Saint MSG ग्लोरियस इंटरनेशनल स्कूल – सिरसा(हरियाणा)
शाह सतनाम जी नोबल स्कूल – कोटड़ा,उदयपुर(राजस्थान)

निष्कर्ष : बालिका शिक्षा किसी भी राष्ट्र की नींव को मजबूती प्रदान करती है। कोई भी उच्च शिक्षा और नौकरी पेशा लड़की शादी के बाद अपने परिवार व बच्चों को भी इसी दिशा की ओर अग्रसर करेगी जो राष्ट्र के विकास के लिए घातक है।

आइए जानते हैं एल्मुनियम व नॉन स्टिक के बर्तन सेहत के लिए कितने हैं खतरनाक ?

Use of Aluminium utensils

आजकल हर किसी के किचन में नॉन स्टिक पैन या कढ़ाई, एलुमिनियम के कुकर जरूर नजर आएंगे, aluminium के बर्तनों का उपयोग हर घर में होने का मुख्य कारण यही है कि इन बर्तनों में खाना जल्दी पक जाता है और गैस की बचत होती है। इसके अलावा Aluminum और धातुओं से सस्ता व टिकाऊ होता है और Non-stick के बर्तनों में खाना पकाने का मुख्य कारण यही है कि इन बर्तनों में खाना चिपकता नहीं है और ना ही खाना पकाने में ज्यादा तेल व घी की आवश्यकता होती है और पूरी दुनिया की बात करें तो 60 फीसदी बर्तन Aluminium के बने होते हैं।

How did Aluminium come in Use?

देश में Aluminum के बर्तनों की शुरुआत 100 से 150 साल पहले अंग्रेजों ने की थी, आंच के संपर्क में आने पर Aluminum के अणु जल्दी सक्रिय होते हैं और यह जल्दी गर्म हो जाता है। Aluminum के बर्तन में खाना पकाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है, भारतीय क्रांतिकारियों को कमजोर बनाने के लिए जब वो जेल में थे तब उनको Aluminum के बर्तनों में खाना दिया जाता था ताकि वह बीमारियों से ग्रसित होकर कमजोर हो जाएं।

Harmfull effect of plastic container

हम प्लास्टिक से बनी चीजों से घिरे हुए हैं। हम अपने रेफ्रिजरेटर में प्लास्टिक की पानी की बोतलों का उपयोग करते हैं, उन्हें अपने साथ बाहर ले जाते हैं और यहां तक ​​कि हमारे खाद्य पदार्थों को प्लास्टिक के लंचबॉक्स में पैक किया जाता है। लेकिन अध्ययनों में पाया गया है कि गर्म होने पर विभिन्न रसायनों और टॉक्सिन्स के आसपास प्लास्टिक लीच होता है।
जब हम प्लास्टिक कंटेनर में भोजन गर्म करते हैं या उसमें परोसा जाता है, तो यह प्रक्रिया आपके भोजन में विभिन्न रसायनों को मिलाती है। इस तरह के भोजन को खाने से हार्मोनल असंतुलन उत्पन्न होता है जो पीसीओडी, स्तन कैंसर, कोलोन कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर आदि जैसे स्वास्थ्य के मुद्दों को जन्म दे सकता है। प्लास्टिक की पानी की बोतलों को लंबे समय तक धूप में रखने से हानिकारक रसायनों का रिसाव होता है।

Harms of using microwave

आज कल बहुत सी नई नई सुविधाएं किचन को सुसज्जित कर रही है लेकिन हर नई फैसिलिटी सही हो ये जरूरी नही ।इसी लिस्ट में एक नाम है माइक्रोवेव।

जो स्वास्थ्य के लिए बहुत ही हानिकारक है । जब इसमे खाना पकाया जाता है तो इसका उच्च ताप खाने के सभी आवश्यक तत्व को पूरी तरह से नष्ट कर देता है ।और शरीर को ये सुब तत्व नही मिलने के कारण शरीर रोंगों का घर बन जाता है।

Use of Aluminium utensils is harmful for our health

Aluminum के बर्तन भले ही सस्ते व टिकाऊ क्यों ना हो और Non – stick में खाना भले ही ना चिपकता हो फिर भी यह मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए बहुत ही हानिकारक है क्योंकि इन बर्तनों में खाना खाने से मनुष्य के शरीर में रोजाना चार से 5 मिलीग्राम Aluminum चला जाता है और मानव शरीर इतने Aluminum को सहन करने में असमर्थ हैं जिससे कई बीमारियां पैदा हो जाती हैं।

Fatal diseases due to aluminium usage

Non – stick बर्तनों पर खाना चिपकता नहीं है पर वह खाने पर चिपक जाता है और Saint Dr. Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan बताते हैं कि एक रिसर्च से पता चला है कि Non-Stick के कण खाने में चले जाते हैं और वह कैंसर का एक कारण बनता है।

Aluminum और Non-stick के बर्तनों में खाना खाने से इनका जहर धीरे-धीरे हमारे शरीर में प्रवेश करता है जिससे अस्थमा, वात रोग, टी.बी., शुगर, याददाश्त का कम होना, अवसाद और चिंता, मुंह में अल्सर, दमा रोग, अल्जाइमर, नेत्र रोग, दस्त आदि बीमारियां उत्पन्न होती हैं।

Awareness campaign by Dera Sacha Sauda

Dera Sacha Sauda के प्रमुख संत डॉक्टर Gurmeet Ram Rahim सिंह जी इन्सां ने जब लोगों को Aluminium व Non – stick के बर्तनों के दुष्प्रभाव का बताया तो 6.5 करोड़ लोगों ने Aluminium व Non stick के बर्तनों का उपयोग ना करने का प्रण लिया।
Dera Sacha Sauda के अनुयाई जागरूकता अभियान के माध्यम से लोगों को Aluminum व Non – stick के बर्तनों का दुष्प्रभाव बताते हैं और उपयोग ना करने की प्रेरणा देते हैं।

Tips by Saint Dr. Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan to maintain the wealth of health

पूज्य गुरु संत डॉक्टर Gurmeet Ram Rahim सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि मिट्टी के तवे आज भी मिलते हैं और अगर आप मिट्टी का तवा इस्तेमाल नहीं कर सकते तो लोहे का तवा जरूर इस्तेमाल करें। उसमें लौह तत्व होता है जो ब्लड के लिए अति जरूरी है और जिससे बॉडी पावर बहुत बढ़ती है। उसमें खाना बनाओ तो कमाल का बनेगा और बच्चों को तंदुरुस्त बनाएगा और गुरु जी कहते हैं कि मिट्टी व लोहे के बर्तनों में बना भोजन स्वादिष्ट होता है और शरीर को बीमारियों से बचाता है।

Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan फ़रमाते है कि एल्युमीनियम व नॉन स्टिक बर्तनों का त्याग करें, स्टील, लोहे, तांबे व पित्तल के बर्तनों का इस्तेमाल करें इसे आप अपने परिवार को बीमारियों से बचा सकते हो |

Dera Sacha Sauda के करोड़ों अनुयायिओं ने एल्युमीनियम व नॉन स्टिक के जगह लोहे तांबे व स्टील के बर्तनों को इस्तेमाल करने का प्रण लिया हुआ है |

Adopt pottery, Abonden the use of Aluminium utensils

Aluminum व Non stick के बर्तनों का त्याग करें। स्टील, लोहे व मिट्टी के बर्तनों का उपयोग करें व इस प्रकार खुद को व परिवार को बीमारियों से बचाएं।

बाल दिवस 2020

पंडित जवाहर लाल नेहरू का जन्म 14 नवंबर 1889 को इलाहाबाद में हुआ था। पंडित जवाहर लाल नेहरू को बच्चों से बहुत प्यार था, बच्चे प्यार से उन्हें चाचा नेहरू कह कर पुकारते थे। हर साल 14 नवंबर को उनके जन्मदिवस को बाल दिवस के रुप में मनाया जाता है, इस दिन को बच्चों के अधिकार और शिक्षा को लेकर विशेष रुप से जागरूक किया जाता है ताकि बच्चे अपने अधिकारों को समझें। पंडित जवाहर लाल नेहरू का मानना था कि बच्चे ही आने वाले देश का भविष्य होते हैं इसलिए उन्हें अच्छे से शिक्षा दी जानी चाहिए और उन्हें उनके अधिकारों के बारे में पता होना चाहिए। बच्चों की बहुत ही अच्छे व प्यार से देखभाल की जाए और अच्छे संस्कार दिए जाएं ताकि वह अपने पैरों पर खड़े हो सकें।

14 नवंबर को स्कूल में अलग-अलग कार्यक्रम व प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं ताकि बच्चे इनमें भाग लें व अपने आत्मविश्वास को बढ़ाएं और इस दिन स्कूल में बच्चों को मिठाइयां व गिफ्ट भी बांटे जाते हैं।

Problems that prevent the development of child

आज कल बच्चों को बहुत सी ऐसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है जो उनके सर्वांगीण विकास में बाधा उत्पन्न करती है ।जैसे कि –

Child labour

आजकल बड़े बड़े शहरों में 14 वर्ष की उम्र से कम आयु के बच्चों से घरों का व उद्योगों में काम करवाया जाता है, जो कि एक कानूनी अपराध है।
Child Labour प्रोहेबिशन एंड रेग्युलेशन एक्ट 1986 में है। जिसके अंतर्गत 14 वर्ष या उससे कम आयु के बच्चे से काम करवाना एक कानूनी अपराध है। बच्चे शरीर वह मन से बहुत कोमल होते हैं और आसानी से इन चीजों के शिकार हो जाते हैं, इसके लिए ही कानून ने कई प्रावधान बनाए हैं। कानून में 18 तरह के काम और 65 तरह के प्रोसेस बताए गए हैं जिसके अंतर्गत 14 वर्ष की उम्र या उससे कम आयु के बच्चे से काम करवाने पर पाबंदी है।

human trafficking

आज के समय में बच्चों की तस्करी के बहुत से मामले देखने को मिलते हैं। छोटे व मासूम बच्चों की तस्करी कर दी जाती है और उन्हें ऐसी जगह पर भेज दिया जाता है जहां उनका रहन-सहन वह खानपान बहुत अलग होता है। संयुक्त राष्ट्र संघ में बच्चों की तस्करी को लेकर बहुत बार चिंता जता चुका है। ऐसे में मां-बाप का फर्ज बनता है कि वह अपने बच्चों को इन सब चीजों से अवगत करवाएं व कैसे इनसे बचा जाए इसके बारे में जागरूक करें। बच्चे को बिल्कुल भी नादान बना कर ना रखें बल्कि समय के अनुरूप ढालें, हर एक अच्छी बुरी चीज के बारे में बताएं ताकि बच्चे इन सब से बच कर रह सकें। कोई भी उनकी मासूमियत का फायदा ना उठा सके।

Child marriage

बाल विवाह एक रूढ़िवादी प्रथा है। किसी भी बच्चे की निश्चित आयु से पहले विवाह कर देना कानून के अनुसार बाल विवाह कहलाता है। बाल विवाह बच्चों के मानवाधिकार को समाप्त कर देता है, कभी भी बच्चों की निश्चित आयु से कम आयु में विवाह नहीं करना चाहिए। सरकार ने लड़कों के लिए 21 वर्ष व लड़कियों के लिए 18 वर्ष की आयु निर्धारित की है। इससे कम आयु में विवाह कर देना बाल विवाह कहलाता है जो कि एक कानूनी अपराध है। बाल विवाह से बच्चे का बचपन में आजादी छीन ली जाती है और उन्हें एक ऐसे बंधन में बांध दिया जाता है जिसके बारे में उन्हें कुछ भी पता नहीं होता और उन पर जिम्मेदारियां सौंप दी जाती है जो कि बिल्कुल गलत है। यह ज्यादातर लड़कियों के साथ होता है 18 वर्ष की उम्र से कम आयु में ही उनकी शादी कर दी जाती है और घर की सारी जिम्मेदारियां उन पर लाद दी जाती है और यह कहा जाता है कि लड़कियां घर की चारदीवारी में ही अच्छी लगती है लेकिन लोग यह नहीं समझते कि ऐसे कम उम्र में शादी कर देने से उन पर शारीरिक व मानसिक रूप से दुष्प्रभाव पड़ सकता है इसलिए कभी भी बाल विवाह नहीं करना चाहिए।

Efforts by a well known organization

India में एक ऐसी संस्था भी है जो लगातार बच्चो के सर्वांगीण में अपना अहम योगदान दे रही है। जी हां। उस संस्था का नाम है Dera Sacha Sauda

इस संस्था निरंतर बच्चों का स्तर सुधारने के लिए प्रयत्न शील है । इस संस्था के प्रमुख Saint Gurmeet Ram Rahim Singh ji Insan ने बच्चों के विकास के लिए जो initiatives चलाये है वह है
स्माइल ऑन इनोसेंट फेसेस

  1. बुक बैंक
  2. टॉय बैंक
  3. कैरियर परामर्श
  4. चाइल्ड प्रोटेक्शन
  5. स्टॉप चाइल्ड मैरिज
  6. स्टॉप चाइल्ड लेबर

डेरा सच्चा सौदा में Book Bank खोले गए हैं, जो बच्चे आर्थिक रूप से कमजोर हैं, उन्हें Books, Pen, Pencils, स्कूल में जरूरत आने वाला सारा सामान मुफ्त में दिया जाता है।

Dera Sacha Sauda के अनुयाई ज़रूरतमंद बच्चों के स्कूल की फीस व Uniforms का भी खर्च खुद से भरते हैं और गरीब बच्चों को मुफ्त में टयूशन भी पढ़ाया जाता है ताकि कोई बच्चा अच्छी शिक्षा से वंचित न रहे।

Moral teachings

डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि जब औरत गर्भधारण अवस्था में होती है तो उसे भगवान की किताबें पढ़नी चाहिए जैसे रामायण, महाभारत, कुरान, वेद आदि पढ़ने चाहिए क्योंकि गर्भावस्था के दौरान स्त्री जो कुछ भी पढ़ती या देखती ,है उसका प्रभाव उसके होने वाले बच्चे पर पड़ता है। अभिमन्यु ने मां के गर्भ में ही चक्रव्यूह वेदना सीख लिया था।

गर्भधारण के दौरान शिशु का आईक्यू लेवल विकसित किया जा सकता है। गर्भधारण के दौरान स्त्री को अच्छी किताबें पढ़नी चाहिए व खानपान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। अच्छा खानपान ना केवल मां के स्वास्थ्य पर असर डालता है बल्कि शिशु के विकास पर भी सकारात्मक असर पड़ता है।

Father is like a friend to his children

पूज्य गुरु संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि माता पिता को अपने बच्चों के साथ Friendly रहना चाहिए ताकि बच्चा अपनी हर बात अपने माता-पिता के साथ शेयर करे। अगर कोई बच्चे के साथ कुछ गलत करता है या फिर कुछ गलत करवाता है तो बच्चे सबसे पहले आकर अपने माता-पिता को बताएं और माता-पिता का भी फर्ज बनता है कि वह अपने बच्चे को डांटने की बजाए प्यार से समझाएं।

In today’s time, it is necessary to develop positive thoughts in children

बच्चों को कभी भी झूठ बोलने की आदत ना लगने दें। इसकी शुरुआत माता-पिता खुद से करें। कभी भी अपने बच्चों के सामने झूठ मत बोलें वरना बच्चा आपको देखकर खुद भी झूठ बोलने लगेगा। हमेशा सच के रास्ते पर चलना सिखाएं, बच्चे को हमेशा अपने से बड़ों की Respect करना सिखाएं। इसकी शुरुआत आप खुद से करें। आप अपने से बड़ों का आदर सम्मान करें ताकि बच्चा आपको देखकर आपका भी आदर सम्मान करे।

Develop humanity in children

Saint Dr. Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan सत्संग में कई बार फ़रमाते हैं कि बच्चा अभी पैदा भी नहीं हुआ होता और कई Parents कहते हैं, बच्चा जब बड़ा होगा तो उसे डॉक्टर, वकील, पाइलेट, बड़ा अफसर बनाएंगे।

हम ऐसे में बाप से यही कहेंगे कि पहले आप बच्चे को अच्छा इंसान बनाएं, उसे नेकी के रास्ते पर चलने की शिक्षा दें, दीन दुखियों की मदद करना सिखाएं, बच्चे के अंदर सेवा की भावना भरें, ताकि वो बड़ा होकर अच्छा इन्सान बने।

Conclusion
पूज्य गुरु संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फ़रमाते हैं कि जिस उम्र में बच्चों के हाथों में खिलौने व किताबें होनी चाहिए, उस उम्र में बच्चों के कन्धों पर जिम्मेदारियां न डालें और बच्चों के उज्वल भविष्य के लिए उन्हें अच्छी शिक्षा दें, ताकि आगे चल कर बच्चे अपने माँ बाप और देश का नाम रोशन करें।

आखिर क्या है दयावान दिवस, क्या आप भी हैं दयावान ?

पूरे विश्व में हर वर्ष 13 नवम्बर को World kindness Day मनाया जाता है, इस दिन प्रत्येक व्यक्ति समाज में किसी न किसी के प्रति दया रहम की भावना दिखाता है और अपनी ओर आकर्षित करने का प्रयास करता है और इस दिन लोग मानवता की सेवा करने का प्रण लेते हैं।

विश्व दयालुता दिवस की स्थापना वर्ष 1997 में टोक्यो सम्मेलन में दुनिया भर के दयालु संगठनों द्वारा की गई थी व विश्व दयालुता दिवस की शुरुआत वर्ष 1998 में World Kindness Movement संगठन द्वारा की गई थी।

Kindness क्या है?

अगर हम बिना किसी स्वार्थ के किसी की मदद करते हैं तो उसे दयालुता कहा जाता है, किसी को दुख दर्द में तड़पता देखते हैं तो उसकी मदद के लिए आगे आना Kindness है, ये तड़प सिर्फ इंसानों के लिए ही नहीं बल्कि पशु-पक्षियों को भी दर्द में देख कर उनकी मदद के लिए आगे आना दयालुता है।

Millions of volunteers pledged to do acts of kindness fod the welfare of Society

इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो हर रोज को Kindness Day की तरह मनाते हैं। वह इस दिन तो मानवता भलाई के कार्य बढ़-चढ़ कर करते ही हैं साथ ही वह लोग पूरे वर्ष हर दिन ही मानवता भलाई के 134 कार्य करते हैं। उन्हें कोई तड़पता मिल जाए तो वह तुरंत उसकी सहायता करते हैं।

जैसे कोई दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति मिल जाए तो उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाते हैं। मनुष्य की तो मदद करते ही हैं साथ ही सभी जीव जंतुओं के प्रति भी दयालुता रखते हैं, उनको दर्द में देखते ही इलाज में लग जाते हैं।

तो अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर वह लोग कौन हैं?

जी हां! वह सब भी हम सभी के बीच ही रहते हैं और वह लोग हैं Dera Sacha Sauda के अनुयाई,जो किसी को भी तड़पता हुआ देख कर उसकी मदद में लग जाते हैं।

इस दुनिया में 6.5 करोड़ से भी ऊपर Dera Sacha Sauda के अनुयाई हैं जो नि:स्वार्थ भाव से बिना जात-पात, बिना धर्म मजहब देखे हर किसी की मदद करते हैं।

Saint Dr. Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan taught the true lesson of kindness, compassion and humanity towards all living beings

Dera Sacha Sauda के अनुयायियों द्वारा 134 मानवता भलाई के कार्य किए जाते हैं:

  1. राशनदान करना :- डेरा सच्चा सौदा द्वारा Food Bank खुला हुआ है, साध संगत हफ्ते में एक दिन उपवास रख कर उस दिन के खाने का जो खर्च होता है वो Food Bank में जमां करवाती है, जितना भी पैसा इकट्ठा होता है उसे हर महीने गरीब व जरूरतमंद परिवारों को राशन वितरित किया जाता है |
  2. खून दान करना:- कहीं भी Blood की जरूरत पड़ने पर Dera Sacha Sauda के अनुयाई के अनुयाई Blood Donate करने के लिए हमेशा तैयार रहते है |
  3. मरणोपरांत आंखें व शरीर दान करना:- Dera Sacha Sauda के करोड़ो अनुयाई Saint Ram Rahim Singh Ji Insan की प्रेरणा से मरणोपरांत आंखे व शरीर दान करने का लिखित में कर चुके है प्रण |
  4. पौधारोपण करना:- कोई भी खुशी का मौका हो उसे पौधारोपण कर के मनाते है जैसे बच्चे का जन्मदिन, शादी की सालगिरह आदि |
  5. बेघर को घर बना कर देना:- जिनके पास रहने लिए घर नहीं है उन्हें Dera Sacha Sauda द्वारा घर बना कर दिए जाते |
  6. पशु पक्षियों को दाना पानी डालना:- Dera Sacha Sauda के अनुयाई पक्षियों के घर की छतों व बालकनी में दाना व पानी रखते है और पशुओं को हरा चारा डालते है ताकि कोई भी पशु पक्षी भूख व प्यास से न मरें |

ऐसे 134 कार्य हैं और यह सब कार्य पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणा पर चलते हुए किए जाते हैं।

डेरा सच्चा सौदा के लाखों अनुयायियों द्वारा मरणोपरांत आंखें व शरीर दान का लिखित में प्रण लिया जा चुका है।

Humility is the real jewel of human

आज के समय में जहां भाई ही भाई के काम नहीं आता, वहां डेरा सच्चा सौदा के अनुयाई सामने आए हैं। उन्होंने हजारों बेघरों को घर बना कर दिए हैं, कोरोना जैसी महामारी में घर-घर जाकर राशन दान, मास्क व सैनिटाइजर वितरित किया, किसी को भी Blood की जरूरत थी, वहां पहुंचकर Blood Donate किया।

अगर कहीं आग लग जाती है या बाढ़ आ जाती है तो यह अनुयाई अपनी जान की परवाह किए बिना आगे आते हैं और लोगों की मदद करते हैं और यह सब प्रेरणा उन्हें पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां से मिली है जो कि पूरी दुनिया में Kindness की मिसाल कायम कर रहे हैं। पूज्य गुरु जी ने लोगों को जीने की सच्ची राह दिखाई है।

True spirit of kindness and Humanity

धन्य हैं ऐसे गुरु जिन्होंने लोगों के प्रति दयालुता सिखाई और बहुत ही नसीब वाले हैं डेरा सच्चा सौदा के अनुयाई जो अपने गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणा पर चलते हुए 134 मानवता भलाई के कार्य कर रहे हैं। आज के समय में कोई किसी की खुशी को देखकर खुश नहीं होता, वहीं डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी अपने गुरु जी की सिखाई गई प्रेरणा पर चलते हुए सभी से नि:स्वार्थ भाव से प्रेम करते हैं।

Conclusion

हमें World kindness Day पर यह प्रण जरूर लेना चाहिए कि हम आज के दिन ही नहीं बल्कि हर दिन जरूरतमंद की मदद करेंगे और हर दिन को दयालुता दिवस के रूप में मनाएंगे।

आइए जानते है इस दीवाली कैसे करें दूसरों के जीवन में उजाला ?

दीपावली भारतीयों का सबसे बड़ा व प्रमुख त्यौहार माना जाता है जिसे हर जगह बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। दीपावली का अर्थ होता है दीपों की अवलि अर्थात पंक्ति और सभी लोग अपने घरों में मिट्टी के दीपों की पंक्ति लगाकर उस अंधेरी रात को रोशनी से भर देते हैं।

दीपावली के त्यौहार को बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है क्योंकि इस दिन प्रभु श्रीराम रावण जैसे पापी, अधर्मी राक्षश का विनाश करके 14 वर्षों बाद अयोध्या में लौटे थे और इसी खुशी का इजहार करने के लिए अयोध्या वासियों ने घी के दीये जलाकर भगवान रामचन्द्र जी का भव्य स्वागत किया और नाचकर व गाकर इस उत्सव को धूमधाम से मनाया।

Help the poor and the needy

दीपावली का सही अर्थ है कि उस दिन हम अपने अंदर की बुराईयों को खत्म करके दूसरो की जिंदगी में खुशियां बांटने व रोशनी से भरना लेकिन आज के समय में लोगों के लिए ये त्यौहार सिर्फ एक मनोरंजन का साधन बन के रह गया है बड़े बड़े महानगरों में इस दिन जुआ खेलना, शराब पीना जैसे गलत काम किए जाते हैं और पटाखे जलाकर फिजूल खर्च करते हैं।

पटाखे जलाने से वायु प्रदूषण,ध्वनि प्रदूषण जैसी समस्याएं उत्पन्न होती जो मानव के लिए बहुत नुकसानदायक है और कई बार पटाखों से निकली चिंगारी से लोग के जलने या किसी मकान में आग लगने की खबरें भी सुनने को मिलती हैं।

Indian cultures about festivals

दीपावली के अवसर पर हमारे दादा-दादी मिट्टी के दिए जलाते थे लेकिन आज लोग रंग बिरंगी चाइनीज इलेक्ट्रॉनिक लाइट्स का ज्यादा इस्तेमाल करने लगे हैं जिससे पैसे की बर्बादी तो होती ही है साथ में बिजली भी बर्बाद होती है और हमारे बुजुर्ग मिट्टी के दिए इसलिए जलाते थे क्यों कि उससे वायु में प्रदूषण नहीं फैलता और आसपास जो कीटाणु होते हैं वो भी मर जाते हैं।
जहां हम त्यौहार मनाने की खुशी में नये कपड़े पहनना, मिठाई बांटना, पटाखे चलाने में इतना व्यस्त हो जाते हैं कि यह भूल जाते हैं कि लाखों लोगों के घर में चूल्हा तक नहीं जलता जो अपने बच्चों को मिठाई तो दूर एक वक्त का खाना भी नहीं दे पाते।

How to light up in the lives of others?

Dera Sacha Sauda एक ऐसी संस्था जिसने 134 मानवता भलाई के कार्यो में पूरे विश्व में अपना नाम रोशन किया है और उन्हें ये प्रेरणा Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan से मिली जिन्होंने हमेशा लोगों को यही सिखाया कि आपके आसपास कोई भी लाचार, जरूरतमंद या दुखी इंसान हो तो उसकी हर संभव सहायता करना और उसके दुख को दूर करना।

आपने पटाखे चलाकर, नाचकर दीवाली मनाते हुए तो बहुत देखा है लेकिन Dera Sacha Sauda के अनुयाई एक अनोखे तरीके से 134 मानवता भलाई के कार्य करते हुए इस त्यौहार को मनाते है

जैसे:-

  1. गरीब बच्चों को कपड़े, मिठाई बांटना।
  2. कोई बीमार लाचार है तो उसका इलाज करवाना।
  3. जैसे कि सर्दी का मौसम है तो जो लोग फुटपाथ पर या कच्ची झोपड़ी में ठंड से ठिठुर रहे हैं उन्हें गर्म कम्बल, स्वेटर आदि बांटना।
  4. जिनके घरों में खाने को अन्न नहीं है उन्हें राशन सामग्री देना।

इस तरह अपने गुरू जी द्वारा दी हुई शिक्षा पर अमल करते हुए दीपावली के इस त्यौहार पर फिजूल खर्च ना करके बेसहारा बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लाना व उनके दुख को दूर करना यही उनकी असली दीवाली है।

Decorate your house with clay lamps

डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख संत गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसा की पावन प्रेरणा पर चलते हुए डेरा सच्चा सौदा के करोड़ों अनुयाई अपने घरों में चाइनीस लड़ियों की लाइट ना जलाकर अपने ही आसपास के गरीब लोगों से दिए खरीद कर वह जलाते हैं तांकि हमारे द्वारा खरीदे गए दिए से उनका घर भी रोशन हो सकें हमारे इस छोटे से योगदान से उनके चेहरे पर बहुत बड़ी मुस्कुराहट आ जाए, कभी भी उनसे मोल भाव न करें |

तो आइए क्यों ना हम भी इस दिवाली कुछ अलग और खास तरीके से मनाएं जितना ज्यादा हो सकें जरूरतमंद लोगों की मदद करें उन्हें में कपड़े, खाना , वे मिठाईयां बांटे और लोगों को भी प्रेरित करें कि चाइनीस लड़ियां इस्तेमाल करने की बजाय गरीब लोगों से दिए खरीद कर वह जलाएं और अपने व उनके घरों को रोशन करें |

What to do something new on this Diwali ?

Saint Dr. Gurmeet Ram Rahim Singh Ji insan जी फ़रमाते है इस दीवाली अपनी बुराईयां को जला डालें,अच्छे गुण अपनाए और अवगुण छोड़ते जाइये, भक्ति और अपने अंदर प्यार मोहब्बत का दिया जलाए |

Conclusion
हमें Festival को सही ढंग से मनाना चाहिए कभी भी फजूल खर्च नहीं करना चाहिए, बल्कि जो पैसा हम बेवजह खर्च करते है उसी पैसे को दींन दुखियों, गरीब व जरूरतमन्दों की मदद में लगाए दूसरों की मदद कर के दिल को वो सकूँन मिलता है जिसकी आपने कभी कल्पना भी नहीं की होगी |

शिक्षा है अनमोल रत्न, पढ़ने का कोई करें यत्नशिक्षा है अनमोल रत्न, पढ़ने का कोई करें यत्न

11 सितंबर 2008 को मानव संसाधन विकास मंत्रालय एमएचआरडी ने हर साल 11 नवंबर को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया था उनके लिए भारत में सबसे बड़ा योगदान शिक्षा का उपहार है लेकिन एक कवि, एक स्वतंत्रता सेनानी, एक विद्वान, एक पत्रकार और कई नेताओं के साथ उन्होंने भारत के निर्माण में अपना अहम योगदान दिया |

देशभर में 11 नवंबर को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में इसलिए मनाया जाता है क्योंकि देश के पहले शिक्षा मंत्री रहे मौलाना अब्दुल कलाम आजाद का आज जन्म दिवस भी है मौलाना अब्दुल कलाम आजाद की याद में National Education Day को मनाने की शुरुआत की गई थी मौलाना अब्दुल कलाम आजाद भारत में शिक्षा व्यवस्था लागू की थी अब्दुल कलाम स्वतंत्रता सेनानी तो थे ही साथ ही साथ वे एक शिक्षाविद भी रहे।

शिक्षा को english में education कहते है, शिक्षा हर किसी के लिए बहुत उपयोगी है, शिक्षा शब्द की उत्पत्ति लैटिन के educare शब्द से हुई

शिक्षा हमें अधिक सभ्य और बेहतर बनाती है। यह हमें समाज में बेहतर स्थिति बनाने में मदद करती है और शिक्षा हमारे सपने जैसे एक अच्छा डॉक्टर, इंजीनियर, अधिकारी, पायलट, शिक्षक, आदि बनने में सक्षम बनाती है।

शिक्षा स्त्री और पुरुषों दोनों के लिए समान रूप से आवश्यक है, क्योंकि स्वस्थ और शिक्षित समाज का निर्माण दोनो द्वारा मिलकर ही किया जाता हैं।

यह Future के लिए आवश्यक यंत्र होने के साथ ही देश के विकास और प्रगति में भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है |

जैसे:-
↔️ व्यक्तिगत उन्नति को बढ़ावा

↔️सामाजिक स्तर में बढ़ावा

↔️ सामाजिक स्वास्थ्य में सुधार

↔️ आर्थिक प्रगति, राष्ट्र की सफलता, जीवन में लक्ष्यों को निर्धारित करना, हमें सामाजिक मुद्दों के बारे में जागरूक करना

↔️ पर्यावरण समस्याओं को सुलझाने के लिए हल प्रदान करना और अन्य सामाजिक मुद्दे आदि।

हमारे देश में आज भी बहुत से ग्रामीण इलाके जहां शिक्षा के सरकार द्वारा विभिन्न योजनाएं चलाई गई लेकिन कुछ लोग गरीबी के चलते अपने बच्चों को छोटी सी उम्र में मजदूरी करने के लिए भेज देते हैं जिससे वे बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाते हैं ।

डेरा सच्चा सौदा ने शुरू की नई पहल:-
डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसा ने अच्छे Education के लिए डेरा सच्चा सौदा में शिक्षण संस्थान खोले हैं ये शिक्षण संस्थान हरियाणा के सिरसा, राजस्थानथान के श्री गुरुसरमोडिया, कोटड़ा, तारानगर, मध्य प्रदेश के बुधनी में खुले हुए है जिसमें बच्चों को अच्छी शिक्षा दी जाती है ।

Shah Satnam School के बच्चे गुरु जी द्वारा बताये हुए Tips को Follow करके मेरिट में आ रहे है ।

Tips given by revered Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan:-

↔️ जब भी आप Study करने बैठो तो स्टडी करने से 5 मिनट पहले Meditation करें, फिर थोड़ा पानी पीकर स्टडी करना स्टार्ट करो ।
↔️ ऐसे Study करने से एकाग्रता बनी रहेगी और पूरा ध्यान पढ़ाई में लगेगा ।
↔️ Study करने से पहले Meditation करने से हमारा Confidence बढ़ता है और पढ़ा हुआ याद रहने लगता है ।

Dera Sacha Sauda के शिक्षण संस्थानों में शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थी मेरिट में स्थान हासिल कर रहे हैं और वह इसका पूरा श्रेय Saint Dr. Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan को देते हैं।

Dera Sacha Sauda द्वारा खोले गए बुक्स बैंक:-

जो बच्चे आर्थिक तंगी से कमजोर है उनके लिए Dera Sacha Sauda में books Bank बनें हुए हैं, Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji इंसां जी की प्रेरणा से डेरा सच्चा सौदा के अनुयाई जरूरतमंद बच्चों के को किताबें, पेन, पेन्सिल और शिक्षा की जरूरत का समान बुक्स बैंक में जमा करवाते हैं और उन्हें जरूरतमंद बच्चों में मुफ्त में बांट दिया जाता है |

Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh ji Insan conveyed social messages through movies:-

पूज्य गुरु संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसां ने आदिवासियों को अच्छा पढा लिखा कर उनको मुख्य धारा में शामिल किया उनके लिए राजस्थान के उदयपुर के कोटड़ा में स्कूल खुलवाया ।

फिल्मों के माधयम से शिक्षा के लिए बहुत ही अच्छा सन्देश दिया हुआ है, MSG-2 The Messanger Movie में गुरु जी ने अच्छी शिक्षा दे कर बच्चों, औरतों व पुरषों को आजीविका के साधन सिखाकर उन्हें मुख्य धारा में शामिल किया ।

Conclusion
बच्चों को अच्छी शिक्षा दें ताकि वह पढ़ लिखकर कुछ बन सके अपने मां बाप के साथ साथ अपने देश का भी नाम रोशन करें जैसे आज मौलाना अब्दुल कलाम आजाद को देश के शिक्षा मंत्री के साथ-साथ प्रसिद्ध शिक्षाविद के नाम से भी जाना जाता है और यह है शिक्षा की वजह से ही संभव हो पाया है, आज के समय में तो शिक्षा का महत्व बहुत ज्यादा है और Competition भी दिन भर दिन बढ़ता जा रहा है ऐसे में बच्चों को शिक्षा के प्रति Motivate करना चाहिए और उन्हें अच्छी शिक्षा देनी चाहिए ताकि वह भी पढ़ लिख कर एक अच्छे इंसान बन सके।

बजुर्ग होते है घर की शान, इनका हमेशा करें सम्मान

बदलते जमाने के साथ आने वाली पीढ़ी के सोच विचार भी बदल गए है और इस बदलाव में वे अपने बड़ों को प्यार व सम्मान करना भी भूलते जा रहे हैं।

आज की नौजवान पीढ़ी अपने आप को Modern बताते हुए बड़ों का तिरस्कार करते हैं कि उन्हें आज के जमाने की Knowledge नहीं है, इसलिए कोई दादा-दादी या माता-पिता उन्हें गलत काम से रोकते हैं तो नौजवान पीढ़ी उनकी सलाह को अनदेखा कर देते हैं।

बजुर्गों का हमारे जीवन में होना बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि अच्छा बोलना, दूसरो की मदद करना, माता-पिता तथा बड़ों का आदर सम्मान करना ही मनुष्य के संस्कार है।

कैसे करे अपने बजुर्गों की देखभाल ?

किसी भी व्यक्ति को बुजुर्ग अवस्था में सबसे ज्यादा अपनों के प्यार, आदर व साथ की जरूरत होती है इसलिए Saint Dr. Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan ने बताया कि ऐसे समय में हम कैसे उनकी संभाल कर सकते हैं

➡️ बुजुर्ग अवस्था में इम्नुयूटी सिस्टम कमजोर हो जाता है इसके लिए उन्हें रोजाना व्यायाम व मेडिटेशन करवाएं जिससे उनका Immunity System मजबूत होगा, मन को शांति मिलेगी और शरीर स्वस्थ रहेगा। आप भी उनके साथ व्यायाम करें जिससे उनका अकेलापन दूर होगा।

➡️ हमारे माता-पिता हमारे बचपन, शिक्षा से लेकर हमें आत्मनिर्भर बनाने में अपना पूरा जीवन समर्पित कर देते हैं तो हमारा भी फर्ज है कि बुढ़ापे में उनकी संभाल करें

➡️ बुजुर्गो को बाहर घूमाने ले जाये उनके साथ वक्त बिताये जिससे उन्हें अकेलापन महसूस ना हो।

बजुर्गों के खान पान का रखे ध्यान:-


हमें बुजुर्गों के खानपान का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए जब हम छोटे होते हैं तब हमारे माता-पिता हमारी छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखते हैं

उन्हें यहां तक पता होता है कि हमें खाने में क्या पसंद है और क्या नहीं ?

इसलिए अब हमारा फर्ज बनता है कि हम भी अपने बड़े बुजुर्गों का विशेष रूप से ध्यान रखें खासकर उनके खाने का उम्र के साथ-साथ खानपान में भी बदलाव करना चाहिए, बड़े बुजुर्गों को ज्यादा तला हुआ वह मसालेदार भोजन नहीं देना चाहिए बिल्कुल सादा भोजन देना चाहिए ताकि उनका स्वास्थ्य स्वस्थ रहे बुजुर्ग अवस्था में बढ़ती उम्र के साथ साथ अक्सर खाना कम कर देते हैं जिससे शरीर को पूरा प्रोटीन नहीं मिल पाता और शरीर में कमजोरी आने लगती है इस कमजोरी से निपटने के लिए रोजाना बड़े बुजुर्गों को एक गिलास प्रोटीन शेक जरूर दें यह है शरीर को मजबूत बनाए रखने में मदद करेगा और साथ-साथ ड्राई फ्रूट्स भी दें जिससे शरीर को मजबूती मिलेगी

Dera Sacha Sauda के प्रमुख पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसा फरमाते हैं कि आज की युवा पीढ़ी बुजुर्गों को ज्यादा वैल्यू नहीं देती लेकिन वह यह नहीं जानते है कि बुजुर्गों के पास बहुत तजुर्बा होता है उन्होंने भी अपना जीवन यापन किया होता है और हर एक चीज का अनुभव होता है लेकिन आज की युवा पीढ़ी को यह चीज समझनी चाहिए और अपने बुजुर्गों का सम्मान करना चाहिए अगर कोई भी समस्या है या फिर किसी बात को लेकर वह कोई निष्कर्ष नहीं निकाल पा रहे हैं तो उन्हें इसके बारे में अपने बुजुर्गों से बात करनी चाहिए बुजुर्गों को इतना अनुभव होता है कि वह इसका बहुत अच्छे से मार्गदर्शन कर सकते हैं हमारा फर्ज बनता है कि हम कोई भी कार्य करने से पहले एक बार बुजुर्गों की राय जरूर लें, ऐसा करने से आपको भी बहुत चीजों का अनुभव होगा और हमारे बड़े बुजुर्गों को भी खुशी महसूस होगी कि हम उनसे राय ले रहे हैं बड़े बुजुर्गों की दी हुई राय कभी भी गलत नहीं होती

बजुर्गों के व्यवहार को समझें:

जैसे-जैसे इंसान की उम्र बढ़ती है और वृद्धावस्था में पहुंचती है तो बुजुर्ग बच्चों के समान हो जाते हैं ऐसे में हमारा फर्ज बनता है कि हम अपना ज्यादा से ज्यादा समय अपने बड़े बुजुर्गों के साथ बिताए उम्र के साथ-साथ व्यवहार में परिवर्तन होने लगता है, चिड़चिड़ापन आने लगता है अगर हमारे बड़े बुजुर्ग हमें कुछ कह देते हैं या गुस्सा करते हैं तो ऐसे में हमें उनसे बहस बाजी नहीं करनी चाहिए बल्कि उन्हें समझना चाहिए |

निष्कर्ष: बड़े बजुर्ग हमारे घर की शान हमेशा इनका आदर सम्मान करें, जब हम छोटे थे तो हमारे माँ बाप ने अपना अब कुछ त्याग कर हमारी सम्भाल की है अब हमारा भी फर्ज बनता है कि हम भी उनकी अच्छे से सम्भाल करें

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