साई मस्ताना जी महाराज की शिक्षाएं
रूहानी फकीरों का अवतरण समस्त ब्रह्माण्ड के लिए आर्शीवाद होता है। इस नश्वर संसार से रूहों को आजाद करवाने और जीवन का असली उद्देश्य समझाने के लिए संत महात्मा हर युग में धरती पर मनुष्य के रूप में जन्म लेते हैं। जो अपने कर्मों और ज्ञान के द्वारा बुराइयों और अंधकार के जाल को काट कर अलौकिक प्रकाश फैलाते हैं।

सच्चे अध्यात्मिक गुरू की संगत से ही आध्यात्म के रास्ते पर चलकर आत्मिक खुशियों को हासिल किया जा सकता है और सच को समझा जा है।
पूजनीय संत बेपरवाह मस्ताना जी महाराज का अवतरण पूरी मानवता जाति के लिए वरदान साबित हुआ, जिन्होंने इस संसार रूपी जलते-सड़ते भट्ट में प्रेम और मानवता का बीज उगाया। उन्होंने अपनी शिक्षाओं के द्वारा सच का रास्ता दिखाया और लोगों का उद्धार किया। उन्होंने ‘डेरा सच्चा सौदा’ की स्थापना की, जो आज भी उनकी शिक्षाओं पर चलते हुए प्यार, सेवा और विश्वास जैसी कड़ियो के द्वारा सच के राह पर मार्गदर्शक बना हुआ है |
वैसे तो संतों का प्रत्येक कर्म ही संसार के लिए हितकर होता है, परन्तु उनकी कुछ शिक्षाएं, जिन्होंने समाज से कुरीतिओं और अंध-विश्वास को दूर कर जीने का सही तरीका सिखाया, इस प्रकार हैं-
सच्चा नाम – मुक्ति का आधार :
साई मस्ताना जी महाराज ने इस संसार को सच्चे नाम से परिचित करवाया, जिसे गुरुमंत्र, नामशब्द, कलमा या गॉडस वर्डस भी कहते हैं। उन्होंने समझाया कि सच्चे नाम-शब्द के निरंतर अभ्यास से ईश्वर की प्राप्ति की जा सकती है और इस संसार में रहते हुए भी स्वर्ग को पाया जा सकता है। धर्म के नाम पर समाज में फैले अंध-विश्वासों और कुरीतियों का खंडन कर मालिक तक पहुँचने की अलौकिक ताकत से अवगत करवाया, जो मनुष्य के अंदर पहले से ही विद्यमान है, उन्होंने लोगों की बुराइयाँ छुड़वा कर उन्हें सच से जोड़, उनके जीवन की दशा ही बदल दी। धर्मों का सही अर्थ और उपदेश समझा कर साईं जी ने जीवों को ईश्वर प्राप्ति का तरीका बताया, जिससे इस नश्वर संसार रूपी भवजल को पार किया जा सके।
निस्वार्थ प्रेम ही सर्वोपरि :
साई मस्ताना जी ने सिखाया कि प्रेम ही भक्ति का आधार है। उन्होंने समझाया जिस घट में प्रेम नहीं, वहाँ ईश्वर की प्राप्ति की आस व्यर्थ है। नफरत, ईर्ष्या और अहंकार की आग में जल रहे इस संसार में साई जी ने प्यार और भाईचारे का बीज बोया। उन्होंने समझाया कि सब एक मालिक के बच्चे हैं और हम सब में कोई भेद-भाव, उच्च नीच या जात पात का फर्क नहीं है। आपस में बेगर्ज़-निस्वार्थ प्रेम के द्वारा ही भगवान को पाया जा सकता है। किसी जीव के दिल को दुखाना ईश्वर प्राप्ति के मार्ग में सबसे बड़ी रुकावट है। रिश्तों में वफादारी बरतते हुए सबसे निस्वार्थ प्रेम करना ही मालिक को खुश कर सकता है।इन्सानियत ही सबसे बडा धर्म:
‘हम सब एक हैं, हमारा मालिक एक है।’
साई जी ने सिखाया कि हमारे जीवन का उद्देश्य धर्मो के नाम पर लडना नहीं, बल्कि मालिक की बनाई सृष्टि की निस्वार्थ सेवा और परहित परमार्थ करना है। ईश्वर ने सिर्फ इन्सान को बनाया है। और इन्सानियत ही हमारा धर्म है। तन, मन, धन से असहाय और गरीब की मदद करना ही इन्सान का पहला फर्ज़ है। उनकी शिक्षाओं पर चलते हुए संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के मार्गदर्शन में ‘डेरा सच्चा सौदा’ अब 156 मानवता भलाई के कार्य कर रहा है। साईं जी ने समझाया कि मालिक की औलाद का भला ही मालिक की सेवा है और ईश्वर प्राप्ति का ज़रिया भी।
नशे छुड़वा शाकाहारी बनाया:
बेपरवाह मस्ताना जी महाराज ने लोगों को नशों से बचाया। उन्होंने ड्रग्स, तंबाकू और नशीले पदार्थों के सेवन से होने वाले मानसिक और शारीरिक नुकसान से लोगों को अवगत कराया और इन्हें छोड़ने का संदेश दिया | मांसाहार को त्याग शुद्ध शाकाहारी बनने के लिए लोगों को समझाया। उन्होंने लोगों को सुखी, स्वस्थ और खुशहाल जीवन जीने के लिए सही रास्ता दिखाया, जिसका अनुसरण कर करोड़ों लोग अपनी जिंदगी से इन बुरी चीजों को दूर कर दूसरों के लिए भी मिसाल बन रहे हैं। साई जी ने समझाया नशे बर्बादी का घर हैं, जो इन्सान को कहीं का नहीं छोड़ते।बेजुबानों पर दया करना :
शाह मस्ताना जी महाराज हर किसी से प्रेम करने की शिक्षा देते, फिर चाहे वो कोई इन्सान हो, या आश्रम में अकसर निकल आने वाले कोबरा-बिच्छु। उनके अनुसार प्रत्येक जीव मालिक का अंश हैं, जिनको हमें मारना नहीं चाहिए। उन्होंने दया और प्रेम का पाठ सिखाया। बेजुबान पशु-पक्षियों और जानवरों की मदद करना, उन्हें चारा, चोगा देना और पानी पिलाना मनुष्य धर्म है। बेकसूर जानवरों को मार कर खाने से घोर पाप लगता है। साई जी ने सिखाया ईश्वर की बनाई सृष्टि के हर अंश की संभाल करना, उन पर दया करना।
दीनता और दृढ-यकिन सच्चे भक्त के गहने :
सांई मस्ताना जी महाराज ने समझाया कि ईश्वर को पाने के लिए उसकी (भगवान) भक्ति – इबादत के रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए उस पर दृढ-यकिन होना बहुत जरूरी है। एक भक्त को यकिन होना चाहिए कि भगवान जो करता है, अच्छा करता है और जो करेगा वो भी भले के लिए ही करेगा। मालिक के प्यारे को दीनता- नम्रता को अपना आभूषण बना लेना चाहिए। जिनका आचरण नेक और भावना शुद्ध होती है, मालिक की प्राप्ति उन्हें ही होती है। भक्तों को मालिक के प्यार को पाने के लिए झुके हुए पेड़ों की तरह ही होना चाहिए, जो फल लगते जाने पर झुकते जाते हैं। ऐसे ही भक्तों को प्रेम मार्ग पर चलते हुए दीनता को अपने अंदर समाते जाना चाहिए। वह जीव मालिक पर पूरा विश्वास करे कि ‘मालिक जो करेगा अच्छे के लिए ही करेगा’ और शुक्रगुजार बना रहे। साई जी की इन शिक्षाओं पर चलते हुए ही इन्सान स्वर्ग जैसा जीवन इस धरा पर भोग सकता है और बेशक ईश्वर के अलौकिक नज़ारे भी लूट सकता है।
व्यवहार से सच्चा होना :
ठग्गी, बेइमानी, झूठ और फरेब के इस दौर में साई जी ने लोगों को सिखाया सच के साथ जीना। ईमानदारी को अपनाकर आंतरिक शांति को पाया जा सकता है। मस्ताना जी ने लोगों को साफ़ नीयत रखने और व्यवहार के सच्चे होने का उपदेश दिया। मेहनत की कमाई करके खाने और उसमें से कुछ हिस्सा परहित परमार्थ में लगाने से मनुष्य सुख का जीवन जी सकता है। साई जी का समझाना है कि इससे शायद एकदम तरक्की न भी मिले, पर इन्सान एक दिन तरक्की अवश्य प्राप्त करता है और भयमुक्त होकर अपना जीवन खुशहाली से जी सकता है। यही सब धर्मों का भी कहना है।
साईं मस्ताना जी महाराज की शिक्षाएं जीवों को रूहानियत के मार्ग पर आगे बढ़ाने के साथ-साथ सामाजिक जीवन जीने का सही तरीका दे रहीं हैं और उन जीवों का उद्धार कर रही हैं |













