30वां याद-ए-मुर्शिद नि:शुल्क नेत्र शिविर

डेरा सच्चा सौदा की दूसरी पातशाही परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज की याद में 30वां “याद-ए-मुर्शिद” परमपिता शाह सतनाम जी महाराज फ्री आई कैंप प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी 12 से 15 दिसंबर तक आयोजित किया जा रहा है जो पूर्ण रूप से नि: शूल्क है। अगर आपके आस-पास कोई जरूरतमंद व्यक्ति है, तो उसे इस शिविर में जरुर लेकर आए व इस कैंप से लाभ उठाएं जी।

नि:शुल्क नेत्र जांच व ऑपरेशन-

संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी की पावन प्रेरणा से राष्ट्रीय अंधता नियंत्रण कार्यक्रम के तहत
आर्थिक स्थिति कमजोर होने व आँखों की बीमारियों से छुटकारा दिलवाने के लिए शाह सतनाम जी धाम में 12 दिसंबर से ही फ्री जांच, चश्में व दवाइयां देने के साथ-साथ चयनित मरीजों के लैंस वाले ऑपरेशन भी शाह सतनाम जी स्पेशलिस्ट हस्पताल के अत्याधुनिक ऑपरेशन थियेटर में नि:शुल्क किए जाएंगे।

कैंप की पर्चियां-

शाह सतनाम जी धाम में स्थित डिस्पेंसरी में 10 दिसंबर से ही कैंप की पर्चियां बननी शुरू हो गई और वही विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा मरीजों की जांच शाह सतनाम जी धाम में स्थित शेड के नीचे 12 दिसंबर से शुरू की हो गई है।

कैंप का समय-

कैंप का समय सुबह 9 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक होगा जी।

सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन-

कोरोना की बीमारी से बचने के लिए सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए ही इस कैंप में आना है जी। आपस में छह फीट की दूरी, थ्री लेयर मास्क पहनना और हाथों को बार-बार साबुन या सेनेटाइजर से साफ करना, छींकते या खांसते वक्त मुंह व नाक को अच्छी तरह ढक कर रखे जी।

इस कैंप में कौन-कौन न आएं जी-

65 वर्ष से अधिक उम्र वाले,
गर्भवती महिलाएं, बच्चे व जिस को कोरोना के लक्षण जैसे कि खांसी, जुकाम, गले में दर्द या बुखार हो तो वो इस कैंप में ना आएं जी।

मरीज अपने साथ क्या-क्या लेकर आए-

मरीज अपने साथ दो आईडी प्रूफ जैसे आधार कार्ड, राशन कार्ड या वोटर कार्ड लेकर आए व साथ में एक वारिस भी लेकर आएं। मरीजों व वारिस के खाने-पीने व रहने का प्रबंध आश्रम की तरफ से नि:शुल्क किया जाएगा।

  • डाॅक्टर द्वारा बताए गए परहेज व हिदायतों का अच्छी तरह से पालन करते हुए सभी ने इस कैंप का लाभ उठाना है जी। आगे से आगे बताएं-

यदि आप के आस-पास भी कोई जरूरतमंद व्यक्ति हैं, जिसे आँखों की कोई भी समस्या है। तो वो भी इस आई फ्री कैंप से लाभ उठा सकता है। इसलिए आगे से आगे बताएं ताकि कोई भी व्यक्ति आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण इस कैंप से वंचित ना रह जाए।

फ्री नेत्र जांच शिविर संबंधी किसी भी प्रकार की अन्य जानकारी के लिए 70820-77641, 70820-77697 पर संपर्क कर सकते हैं जी।

हर वर्ष डेरा सच्चा सौदा में इस शिविर के दौरान बहुत से मरीजों की जांच व ऑपरेशन फ्री में करवाएं जाते हैं। इसलिए आप भी इस कैंप से लाभ उठाएं जी।

Saint Dr. Gurmeet Ram Rahim Singh Ji: Versatile personality and true reformer of society

इतिहास गवाह है, जब-जब धरती पर बुराइयां बढ़ी हैं, जीवो उद्धार के लिए समय-समय पर संत महात्मा पृथ्वी पर अवतरित होते रहे हैं। ऐसी ही एक भव्य अलौकिक घटना अगस्त 1967 में हुई जब 15 अगस्त को इतिहास के पन्नों को बदलने और मानवता को फिर से परिभाषित करने के लिए खुद खुदा संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने इस पृथ्वी लोक में अवतार लिया जिन्होंने अपने नक्श कदम से पूरे समाज का नक्शा ही बदल डाला।

महान आध्यात्मिक भविष्यवाणी-

पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के जन्म की भविष्यवाणी डेरा सच्चा सौदा के संस्थापक पूज्य साईं शाह मस्ताना जी महाराज ने 1960 में ही कर दी थी और वचन फरमाए कि तीसरी बाॅडी में हम फिर से आएंगे। संत त्रिवेणी दास ने पूज्य गुरु जी के आदरणीय माता-पिता जी को पहले ही भविष्यवाणी कर दी थी कि आपके घर कोई साधारण संतान जन्म नहीं लेगी, आपके घर खुद ईश्वर अवतार लेंगे और वह आपके पास 23 वर्ष तक ही रहेंगे।

जन्म व माता-पिता-

संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां का जन्म 15 अगस्त 1947 को श्री गुरुसर मोडिया, जिला श्रीगंगानगर के पवित्र गांव राजस्थान में पूज्य बापू मग्घर सिंह जी और माता नसीब कौर जी के घर 18 वर्ष के बाद हुआ। आदरणीय बापूजी गांव के मुखिया थे। आप जी ने मात्र 7 वर्ष की आयु में ही डेरा सच्चा सौदा सिरसा में पूज्य परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज से नाम की अनमोल दात प्राप्त की।

असाधाराण व्यक्तित्व (Extraordinary Personality)

बचपन से ही पूज्य गुरु जी महान हस्ती के मालिक थे। पूज्य गुरु जी जरूरतमंदों के लिए मसीहा थे। यह किसी आश्चर्य से कम नहीं कि महज 8 वर्ष की आयु में ही पूज्य गुरु जी ने ट्रैक्टर चलाया और 32 राष्ट्रीय खेल खेले।

बहुमुखी प्रतिभा के मालिक (Master of versatile personality)

बहुमुखी प्रतिभा के मालिक संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां लाखों युवाओं के प्रेरणा स्रोत व युवाओं के लिए युवा आईकॉन है। पूज्य गुरु जी 32 राष्ट्रीय खेलों के खिलाड़ी रहे हैं। पूज्य गुरु जी कृषि विशेषज्ञ, इंटीरियर डिजाइनर, ऑटोमोबाइल, डिजाइनर, गायक, निर्देशक, संगीतकार, अभिनेता, गीत लेखन, खेल प्रशिक्षक, बहु भाषाई वक्ता, एक प्रेरक, एक समाज सुधारक और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पूज्य गुरु जी एक अध्यात्मिक गुरु होने के साथ ही वैज्ञानिक भी है। जैसे कि

  • सच अजूबा वॉशिंग मशीन जोकि विश्व की सबसे बड़ी मशीन है, जिसको मात्र 24 घंटों में बनाया गया है, जोकि इंटों व सीमेंट से निर्मित है। इस मशीन का डिजाइन भी पूज्य गुरु जी द्वारा ही तैयार किया गया है।
  • क्रिकेट स्टेडियम जिसको मात्र 42 दिनों में तैयार किया गया है।
  • नन्हा फरिश्ता मोबाइल हॉस्पिटल।

बचपन की कुछ अनमोल यादें-

बाल्यावस्था में पूज्य गुरु जी के साथ गुरु माता भी बिल्कुल बच्चे ही बन जाते। अठखेलियां करते हुए बाल रूप में पूजनीय हजूर पिता जी के पीछे -पीछे पूरे घर में माता जी दौड़ते रहते। गुरु माँ और बेटा दोनों बाल-दोस्तों की तरह बहुत से खेल-खेलते और एक दूसरे के पीछे दौड़ते, जिसे देखकर आस-पड़ोस के लोग आश्चर्य से बापूजी से पूछते, क्या आप के घर 4-5 बच्चे हैं।

उत्तराधिकारी – 23 सितंबर 1990

23 सितंबर 1990 के पावन दिवस पर पूज्य परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया और रूहानियत का बादशाह बना कर पूरे ब्रह्मांड में आध्यात्मिक रहस्य को उजागर किया और वचन फरमाए हम ऐसा बब्बर शेर लाए हैं जिसके सहारे खंड-ब्रह्मांड खड़े हैं। जो भी इनसे टकराएगा वह चकनाचूर हो जाएगा।

6.5 करोड़ से अधिक लोगों को दिखाई सच की राह-

(More than 65 million people were showed the path of truth)

पूज्य गुरु जी ने 6.5 करोड़ से अधिक लोगो को नाम की अनमोल दात देकर उन्हें मोक्ष के अधिकारी बनाया, उन्हें बुराइयों की दलदल से निकाल कर इंसानियत का पाठ पढ़ाया और उनकी नर्क भरी जिंदगी को स्वर्ग बनाया।

सृष्टि की सेवा ही जीवन का उद्देश्य-

संत महात्मा के जीवन का मकसद समाज सेवा ही होता है। पूज्य गुरु जी के जीवन का मकसद सृष्टि की सेवा करना ही है। दिन-प्रतिदिन लोगों में मर रही इंसानियत को जिंदा करने के लिए पूज्य गुरु जी ने 135 मानवता भलाई कार्य चलाए। जिन्हें करने के लिए देशों विदेशों में अनुयायी 24*7 तैयार रहते हैं।
जैसे कि भूखे को खाना, प्यासे को पानी पिलाना, जरूरतमंद की हर संभव मदद करना ये कार्य बहुत ऊँचे स्तर पर किए जाते हैं। देखते ही देखते Guinness World Record बनते चले गए। गुरु जी का कहना है कि हम World Record बनाने के लिए सेवा नहीं करते बल्कि इंसानियत को मुख्य रखकर सेवा करते हैं।

जैसे-
▪️ नियमित खूनदान करना।
▪️ मरणोपरांत शरीरदान व नेत्रदान।
▪️ वृक्षारोपण
▪️फूड बैंक,क्लाथ बैंक,बुक बैंक।
▪️ बेजुबान नन्हे जीवों की संभाल चोंगा व चारा डालकर करना।
▪️ मंदबुद्धि लोगों का इलाज करवाकर घर पहुंचाना।
▪️ आशियाना मुहिम के तहत बेघर हुए लोगों को मुफ्त में घर बनवाकर देना।
▪️ पर्यावरण को शुद्ध बनाएं रखने के पाॅलिथीन की जगह कपड़े के बैग का इस्तेमाल करना।
▪️ अपंग व अंगहीन लोगों को मुफ्त में व्हीलचेयर व बनावटी अंग उपलब्ध करवाना।
▪️ आशिर्वाद मुहिम के तहत लड़कियों की शादी करवाने में माता पिता की हर संभव मदद करना।
▪️ वेश्यावृत्ति को छुड़वाकर लड़कियों को इलाज करवाकर उनकी शादी पढ़े लिखे नौजवानों से करना।
▪️ दूसरों के सुख की कामना करने वाले हीजड़ा, खुसरा व कई नामों से जाने जाने वालो को थर्ड जैंडर का दर्जा दिलवाकर उन्हें सुख दुआ समाज का नाम दिलवाकर उन्हें मुख्यधारा में जोड़ना।
▪️असभ्य कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ के आदिवासियों को सभ्य बनाकर, रोजगार के साधन उपलब्ध करवाकर बुराइयों से दूर करवाकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना।
▪️फिल्मों के माध्यम से लोगो को नशों से दूर रहने के लिए प्रेरित करना

लोग कहते हैं कि गुरु जी ने फिल्में क्यों बनाई-

आप सभी भली-भांति जानते हैं कि युवा हमारे देश का भविष्य है। इसलिए युवा को नशों से दूर रखकर एक इच्छा इंसान बनाने के लिए गुरु जी ने फिल्में बनाई। क्योंकि जो लोग सत्संग के माध्यम से नहीं समझ सके, उन्हें समझाने के लिए पूज्य गुरु जी ने फिल्में बनाई। जिस से प्रेरित होकर लाखों लोगों ने शराब, मास व अन्य नशें करने व बेचने छोड़ दिए।
▪️फिल्मों के माध्यम से लोगो को अंध-विश्वासों से दूर करना।
▪️ फिल्मों के माध्यम से नारी शक्तिकरण को बढ़ावा देना।
▪️ रैलियां व सेमिनार लगाकर लोगों को जागरूक करना।

डेरा सच्चा सौदा के नाम अब तक 100 से ज्यादा गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स, एशिया बुक और इंडिया बुक रिकॉड-

डेरा सच्चा सौदा पूरे विश्व की एकमात्र ऐसी संस्था है, जो मानवता भलाई की 135 कार्य नि:स्वार्थ भाव से करती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें, मानवता भलाई कार्यों के लिए डेरा सच्चा सौदा अब तक विभिन्न विश्व कीर्तिमान स्थापित कर चुका है। ब्लड डोनेशन में अब तक डेरा सच्चा सौदा के ‌नाम 4 विश्व रिकॉड दर्ज हो चुके हैं व अब तक इस संस्था द्वारा 487162 यूनिट खून दान हो चूका है। भारत ही नहीं बल्कि पुरे विश्व में डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी खून दान करने में अपना स्थान सबसे आगे रखते हैं और जिन्हें पूज्य गुरु जी ने चलता फिरता ट्रू ब्लड पंप का नाम दिया गया है।

अपनी खुशी को मनाने का अनोखा तरीका-

आज हर व्यक्ति अपना जन्मदिन बड़ी ही खुशी व उत्साह से मनाता हैै। पार्टियां करने की तैयारियां पहले से ही शुरू कर देते हैं, मिठाईयां खाते हैं और कोल्डड्रिंक पीकर अपनी खुशी का जाहिर करते हैं। परन्तु कुछ लोग ऐसे भी हैं जो अपना जन्मदिन, सालगिरह, अपने गुरु जी का जन्मदिन व अन्य त्यौहार एक वृक्ष लगाकर मनाते हैं।

जी हां, डेरा सच्चा सौदा के लाखों अनुयायी प्रत्येक त्यौहार एक-एक वृक्ष लगाकर पर्यावरण को दूषित होने से बचाकर धरती मां को उपहार दे रहे हैं। ऐसे नेक कार्य करने की शिक्षा उन्हें संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी ने दी है। क्योंकि हमारे द्वारा लगाया गया एक वृक्ष हमारी आने वाली पीढ़ियों को बीमारियों से बचा सकता है।

आज 15 अगस्त को विश्व स्तर पर पौधारोपण करके मनाया जाएगा पूज्य गुरु जी का जन्मदिन-

वो हर घड़ी, वो हर पल खुशनुमा व यादगार बन जाता है, जिसमें महान संत महात्मा प्रकट होते है। ऐसी शुभ घड़ी अगस्त माह, जिसमें खुद खुदा कुल मालिक ने अवतार धारण किया। करोड़ों अनुयायी इस शुभ घड़ी का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे और पूरा अगस्त माह 135 मानवता भलाई कार्य करके मनाया जा रहा है।15 अगस्त का वो शुभ पल जिस दिन सच्चे रहबर दाता ने अवतार धारण किया उसको शब्दों में बयां करना मुमकिन नहीं है। 15 अगस्त के दिन को पूरे विश्व में बड़े उत्साह से पौधारोपण व मानवता भलाई कार्य करके मनाया जा रहा है। यदि आप भी अपने आने वाले पीढ़ियों के भविष्य को उज्जवल बनाना चाहते हैं, तो पौधारोपण करके प्रत्येक त्यौहार मनाए और धरती मां को उपहार दे।

निष्कर्ष

संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के 54वें अवतार माह 15 अगस्त की व स्वतंत्रता दिवस की समस्त सृष्टि को हार्दिक शुभकामनाएं।

Fathers Day; Wish your father on his day through quotes, wishes & rhymes

पिता न केवल हमारे पिता की ही भूमिका निभाता है बल्कि एक अच्छे दोस्त व गाइड की तरह है जैसे मां बच्चे को ममता की छांव देती है तो पिता बच्चे को जिंदगी जीना सिखाता है।

कब मनाया जाता है फादर्स डे-

हर वर्ष जून के तीसरे रविवार को फादर्स डे मनाया जाता है। 2021 में इसे 20 जून को मनाया जा रहा है।

क्या है फादर्स डे का इतिहास-

फादर्स डे मनाने की प्रेरणा 1909 में मदर्स डे को मनाने से मिले थी। स्पोकेन शहर के वाॅशिंगटन ने सोनारा डाॅड ने अपने पिता की स्मृति में इस दिन को मनाने की शुरुआत की थी

फादर्स डे मनाने का उद्देश्य-

दुनिया भर में फादर्स डे मनाने का उद्देश्य एक पिता का हमारे जीवन में महत्व और ये दिन पिता को धन्यवाद व सम्मानित करने के उद्देश्य से मनाया जाता है।

मेरा गौरव, मेरा स्वाभिमान, मेरी पहचान आप से है पापा
क्या कहूं आप मेरे लिए क्या हो
रहने को है पैरों के नीचे ये ज़मीन
पर मेरे लिए तो मेरा आसमान आप हो पापा Happy Father’s day

हमारी पहचान पापा से ही है मेरे पापा मेरे लिए मेरा गौरव है पापा के आगे दुनिया की हर जन्नत फीकी है।

बिन पिता जिंदगी वीरान होती है , तनहा सफर में हर राह सुनसान होती है , जिंदगी में पिता का साथ होना जरूरी है , पिता के छायों तले हर राह आसान होती है। Happy Father’s day

अगर बच्चों के सिर पर पिता का साया हो तो कठिन से कठिन राहें भी आसान हो जाती हैं।

हर लम्हा ख़ुशी का अहसास होता है जब पिता पास होता है।
पापा है तो दुनिया है खुशिया है, बिन पापा के सब वीरान होता है Happy Father’s day

जिसके पास जो चीज नहीं होती उसकी कमी का एहसास केवल उन्हे ही होता है क्योंकि बच्चों की खुशियों के लिए पापा सारी दुनिया से लड़ जाते हैं उन बच्चों से पूछो पापा की कमी क्या होती है जिन बच्चों से किस्मत में उनके पापा छीन लिए है।

नसीब वाले है जिनके सर पर पिता का हाथ होता है,
हर मुश्किल की घड़ी में पिता साथ होता है।
Happy Father’s day

इस दुनिया मे भाग्यशाली हैं वो लोग जिनके पास पापा है, क्योंकि हर मुश्किल की घड़ी में पापा बच्चों के साथ एक साए की तरह खड़े होते हैं।

उन्हें जाहिर कर सके शब्दों में ऐसे शब्द ही नहीं,
उनकी बेचैनी, उनकी परवाह, उनकी मेहनत, को नाप सके ऐसा कोई यंत्र ही नहीं, उनके प्यार को तोल सके ऐसा कोई तराजू भी नहीं
और…
पिता जैसा ढूंढ सको शख्स दुनिया में, ऐसा कोई शख्स ही नहीं।
ज़िंदगी की जद्दोजहद का किस्सा लिखना था,
मैंने अब्बा लिख सब ज़ाहिर कर दिया।

मुमकिन होता अगर किसी को उम्र लगाना तो,
मैं हर साँस अपने पिता के नाम लिखती।

रहता है सदा हाथ सर पे
धूप से बचाता छाता जैसे
कठोर भी है कोमल भी वो
नारियल के ऐसे रहता

कमी नहीं होने देते कुछ भी
चाहे जैसे हो करते सब कुछ
आभास नहीं होने देते हैं
अंदर ही सहते सब कुछ

पिता ही है हमारी पहचान
जो बनाते जीवन को आधार
हर पल हमारा साथ वो देते
करते हमारे जीवन को साकार

धूप में ऐसी ठंडी छाया जैसे
देते हमारे जीवन को आकार
हर पल हमारा साथ वो देते
रहता है हम से ही सरोकार

सोहबत है हमका हर समय
बच्चों पर रहता उनका करम
प्यार स्नेह भरपूर भरा दिल
यही मानते वो उनका धर्म

मेरे होठों की हँसी आप की बदौलत है,
मेरी आँखों में खुशी आप की बदौलत है;
किसी खुदा से कम नहीं हो आप,
क्योंकि मेरी ज़िन्दगी की सारी खुशीयां आप की बदौलत है!

हैप्पी फादर्स डे!

मुझमें बस्ती हैं पापा की जान, मैं ही हूँ अपने पापा की शान, कभी नही रोकते आगे बढ़ने से,
कभी नही टोकते किसी चीज़ से,
मना कर सकते है पापा बेटे को,
पर बेटी को कभी ना नहीं बोलते,
ऐसा नहीं करते वो, आखिर बेटियां होती है ना पापा की जान..

रंग- बरंगी दुनिया में केवल पापा ही एक ऐसा इंसान हैं जो चाहता है कि मेरे बच्चे मुझसे भी ज्यादा तरक्की करके जीवन में सफलता प्राप्त करके कामयाब हों।
Happy Father’s day papa ji

फादर्स डे पर अगर पापा को कोई तोहफा देना चाहते हो,तो आपको एक अच्छा इंसान बनकर दिखाना होगा, तभी तो पापा की शान और स्वाभिमान बन पाऊगे।
हैप्पी फादर्स डे पापा जी

अगर मैं रास्ता भटक जाऊं तो
फिर मुझे राह दिखलाते हो
हर कदम पर आपकी जरूरत हमें हमेशा होगी क्योंकि हर कदम पर सही रास्ता दिखलाते हो अपने सपनों को छोड़कर आप हमारे सपने पूरा करते हो पापा।
Happy Father’s day papa ji

पर्यावरण को स्वच्छ बनाकर और खुशहाल जीवन जीए

पर्यावरण का अर्थ- दो शब्दों के मेल से बना है, पर्यावरण। जिसमें “परि” का अर्थ जो हमारे चारों ओर है भाव के इर्द-गिर्द है। “आवरण” का अर्थ जो हमें चारों ओर से घेरे हुए है। पर्यावरण का तात्पर्य सभी बाहरी शक्तियां, तत्व एवं प्रभाव है। जो समूचे भौतिक एवं जैविक विश्व को प्रभावित करते है, जिसमें जीवधारी रहते हुए अपनी स्वाभाविक प्रकृतियों का विकास करते हैं और जो व्यक्ति को आजीवन प्रभावित करते है। पर्यावरण का अर्थ है वातावरण जिसमें नदियां,
झरने, पर्वत, वायु, जल, चटाने, वन, पेड़ पौधे अर्थात संपूर्ण प्रकृति आती हैं। प्रकृति का क्षेत्र बहुत ज्यादा विस्तृत है।

पर्यावरण को तीन भागों में बांटा गया है-

  • प्राकृतिक पर्यावरण- इसमें जैविक तत्व जैसे जीव जंतु, पेड़-पौधे व अजैविक तत्व में जैसे ऊर्जा, अग्नि, गैसे, जल, तापमान, वायु शामिल हैं।
  • मानव निर्मित पर्यावरण-

इसमें वो सभी चीजें शामिल है जो मानव द्वारा बनाई गई है जैसे-कारखाने, नई-नई तकनीकें, बड़े-बड़े शहर।

  • सामाजिक पर्यावरण-

इसमें समाजिक एवं सांस्कृतिक मान्यताओं को शामिल किया गया है।

पर्यावरण दिवस मनाने की शुरुआत-

संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा 1972 ई. में विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया था। परन्तु विश्व स्तर पर इसकी शुरुआत 5 जून 1974 को स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में हुई थी। उस दिन ही पर्यावरण सम्मेलन का आयोजन किया गया था, जिसमें 119 देशों ने भाग लिया।

पर्यावरण हमारे लिए क्यों आवश्यक है?

पर्यावरण को हमारे जीवन की नींव माना गया है। पर्यावरण की वजह से ही पृथ्वी पर जीवन संभव है। जैसे हम पानी के बिना जीवित नहीं रह सकते, उसी तरह हमारे जिंदा रहने के लिए पर्यावरण अति आवश्यक है।मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और शुरू से ही परिवार व समाज में रहता आया है और पर्यावरण मे जी रहा है। इसलिए मनुष्य के लिए शुद्ध पर्यावरण होना अत्यंत आवश्यक है।

पर्यावरण दिवस मनाने का उद्देश्य-

प्रत्येक वर्ष 5 जून को पूरी दुनिया में विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। इसके मनाने का उद्देश्य लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करवाना है कि कैसे हम अपने आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ पर्यावरण दे सकते हैं। इस दिन कई प्रोग्राम आयोजित करके लोगों को जागरूक किया जाता है।

पर्यावरण प्रदूषित होने के मुख्य कारण-

▪️जल प्रदूषण
▪️वायु प्रदूषण
▪️ ध्वनि प्रदूषण व
▪️भूमि प्रदूषण इत्यादि।

पर्यावरण के बढ़ने के कारण-

▪️बेजुबान जानवरों की मौत का मुख्य कारण-

आज प्रत्येक व्यक्ति पॉलीथिन का इस्तेमाल कर रहा है, जो बहुत से बेजुबान जानवरों की मौत का कारण बनता है। क्योंकि भूखे होने के कारण जानवर इन्हें गलती से खा जाते हैं।

▪️वाहनों से, फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं।
▪️ पानी का अंधाधुंध इस्तेमाल।
▪️ जनसंख्या में वृद्धि।
▪️ प्लास्टिक का इस्तेमाल ज्यादा करना।
▪️खाली जगह पर कूड़े को फेंकने से।
▪️ कूड़े को साडना व नालियों की साफ सफाई न होना।
▪️ कीटनाशक दवाओं का इस्तेमाल ज्यादा करने से।
▪️ वृक्षों की हो रही अंधाधुंध कटाई से।

पर्यावरण संरक्षण क्यों आवश्यक है-

औद्योगिक क्रांति, जनसंख्या वृद्धि के दुष्प्रभाव के कारण पर्यावरण बहुत ज्यादा प्रदूषित हो रहा है। अब मानव का जागरूक होना आवश्यक है। हमारे आने वाले भविष्य में मानव सभ्यता का अंत दिखाई दे रहा है। लेकिन आज का मनुष्य पर्यावरण प्रदूषण को गंभीरता से नहीं ले रहा है।
दिनों-दिन बढ़ते प्रदूषण की ओर ध्यान देने के लिए ब्राजील में 1992 में पृथ्वी सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें 174 देशों ने भाग लिया और 2002 में जोहान्सबर्ग द्वारा सम्मेलन आयोजित किया गया। वृक्षों की कमी को पूरा करने के लिए मिशन एक करोड़ पौधे अभियान शुरू किया गया। AC से निकलने वाली गैस से तापमान बढ़ने के कारण ग्लोबिंग वार्मिंग का खतरा बढ़ रहा है।
अगर समय रहते पर्यावरण सरक्षण ना किया गया तो धरती पर जीवन ही समाप्त हो जाएगा।

पर्यावरण को कैसे बचाएं-

आज मनुष्य ने अपनी जरूरतों को पूरा करते-करते प्रकृति पर्यावरण को इतना बर्बाद कर दिया, जो आज सभी बीमारियों का कारण बन रहा है। इसका पता ही नहीं चला ? इसकी भरपाई मनुष्य को ही करनी पड़ेगी, इसलिए तो कई शहर सूख रहे हैं,‌ तो कहीं पर बाढ़ की समस्याएं सामने आ रही है।

जैसे कि आपने सुना ही होगा कि बूंद-बूंद से तालाब भरता है, उसी तरह अपने घर में कैसे अपनी आदतों को छोड़कर छोटे-छोटे बदलाव करके पर्यावरण को शुद्ध बनाएं रखने में अपना सहयोग देकर भविष्य को उज्जवल बना सकते हैं जैसे कि

▪️सब्जी खरीदते समय प्लास्टिक की थैली की जगह कपड़े के बैग का इस्तेमाल करें।
▪️ जो प्राॅडक्ट्स प्लास्टिक की बोतलों व कंटेनरों में बिकने के लिए मिलते हैं, वह न खरीदें बल्कि ग्लास या मेटल कंटेनर वाले प्राॅडक्ट्स ही खरीदें।
▪️रसोई के सामान खरीदते समय बार -बार पेपर नैपकिन न खरीदें बल्कि कपड़े के बैग का इस्तेमाल करें।
▪️ पानी का सदुपयोग करें।
▪️पक्षिय वन्यजीव की रक्षा करे।
▪️बिजली, पानी की खपत कम करे।
▪️आयुर्वेदिक अपनाएं और कीटनाशकों का प्रयोग भी कम करें।
▪️अधिक से अधिक पेड़ पौधे लगाए।
क्या आपने कभी सोचा है कि जो हम सांस लेने के लिए ऑक्सीजन लेते हैं, वो कहां से आती है?
ये ऑक्सीजन हम पेड़ पौधे से लेते हैं इसलिए अधिक से अधिक पेड़-पौधों लगाएं।

सभी वस्तुओं को सोच समझकर इस्तेमाल करें। जैसे कि
पानी, उर्जा, कोयला, कारखाने से निकलने वाला धुआं और गंदा पानी। गाड़ी की बजाय पैदल चले या साइकिल का प्रयोग करें।

निष्कर्ष

मनुष्य प्रकृति के साथ दिनों दिन खिलवाड़ कर रहा है और पर्यावरण प्रदूषण को गंभीरता से बढ़ा रहा है। हमारी आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए और प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने के लिए अब हमें जागरूक होना होगा। अपना प्रत्येक त्यौहार पौधारोपण करके मनाएं और अपने बच्चों को शिक्षा दें।

विश्व दूध दिवस 2021

हमारा प्यारा भारत एक कृषि प्रधान देश है, इसीलिए हमारे लिए विश्व दुग्ध दिवस बहुत महत्व रखता है। क्योंकि दुग्ध एक पैस्टिक आहार है, और हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा भी है।इसीलिए खाने की प्लेट में 1 ग्लास दूध का होना, खाने की पौष्टिकता को पूर्ण बना देता है।

दूध दिवस कब मनाया जाता है-

खाद्य और कृषि संगठन (संयुक्त राष्ट्र) के द्वारा दूध के महत्व को एक वैश्विक खाद्य के रूप में चिन्हित करने के मकसद से
1 जून को पूरे विश्व में दुग्ध दिवस (World Milk Day) मनाया जाता है। सन्न 2001 से इस दिन को मनाने की शुरुआत हुई थी। जो संयुक्त राष्ट्र के विभाग खाद्य और कृषि संगठन द्वारा की गई थी।

विश्व दूध दिवस मनाने का उद्देश्य-

इस दिन को मनाने का उद्देश्य होता है
◆ दुनियाभर में दूध को वैश्विक भोजन के रूप में मान्यता देना और दूध की पौष्टिकता के बारे में लोगों को जागरूक करना, ताकि वे इसे अपने दैनिक खान पान का हिस्सा बना लें, एक महत्वपूर्ण पेय की तरह।
◆ दूध में मौजूद विभिन्न पोषक तत्वों जैसे की कैल्शियम,
Vit.B2, पोटेशियम और प्रोटीन, इत्यादि के बारे में लोगों को जानकारी देना और इनकी महत्वता के बारे में था। शरीर पर इनकी कमी से होने वाले प्रभावों के बारे में बताकर उन्हें जागरूक करना।
◆ इसके अतिरिक्त डेयरी क्षेत्र को प्रोत्साहित करना भी इस दिन (World milk day) को मनाने का उद्देश्य होता है।।

इस दिन की थीम-

हर वर्ष विश्व दूध दिवस (World milk day )के अवसर पर संयुक्त राष्ट्र के द्वारा एक थीम दी जाती है। वर्ष 2020 की theme the 20th Anniversary of World Milk Day थी,
और 2021 की theme है
“पर्यावरण-पोषण व सामाजिक तथा आर्थिक सशक्तिकरण के साथ डेयरी क्षेत्र की स्थिरता पर भी ध्यान देना है।
इसके अतिरिक्त आपको बता दें कि “विश्व दुग्ध दिवस” कार्यक्रम पुरे विश्व में एक विशिष्ट थीम का पालन नहीं करता है। अपितु विभिन्न देश, सरकारें और NGO अपनी-अपनी थीम तय करते हैं।

दूध पीने के अद्भुत लाभ-

हम सभी जानते हैं कि दूध का सेवन हर आयु वर्ग के लिए जरुरी होता है। फिर चाहे वो बच्चा हो, बूढा हो या फिर जवान, यह सबके लिए जरुरी होता है।

  • भारत के लोग दूध और दूध से बने पदार्थों का विभिन्न रूपों में सेवन करते हैं, जैसे- घी, छाछ, दही, मिठाई इत्यादि।
    लस्सी को तो कोई भूल ही नही सकता, पौष्टिकता से भरपूर होने के साथ-साथ ये सबकी पसंदीदा पेय भी है।

ठंडी ठंडी लस्सी आह !!!! ………………. बेहद स्वाद।।

हमारे शरीर के लिए दूध की महत्वता-

दूध में हर वो पौष्टिक तत्व होते है, जो शरीर के लिए आवश्यक होते है। ये विटामिन, कैल्शियम, प्रोटीन, नियासिन, फॉस्फोरस और पोटैशियम का भरपूर खजाना होता है।

  • हमारे दांत और हड्ड‍ियां कैल्शियम की बनी होती है, इसीलिए इनके लिए कैल्शियम जरुरी होता है। 100 gm दूध में 125 mg कैल्शियम पाया जाता है। इसलिए प्रतिदिन गर्म दूध का सेवन करने से हमारे दांत‌ व हड्डियां मजबूत बनती हैं।
    इसके अतिरिक्त दूध से बने पदार्थ जैसे चीज, लस्सी, पनीर इत्यादि भी कैल्शियम के अच्छे स्त्रोत हैं।
  • दूध में 3.4 gm/100 gm प्रोटीन होता है, जोकि
    हमारी बॉडी की मांसपेशियों के विकास के लिए भी बहुत जरूरी होता है, और हमें ऊर्जावान भी बनाता है।
  • किसी को कब्ज की समस्या हो तो, गर्म दूध पीना बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि ये पाचन के लिए अच्छा होता है।
  • रात को दूध पीने का एक बड़ा फायदा यह है की सोने से पहले हल्का गर्म दूध पीने से नींद बढ़िया आती है और दिन भर की थकान भी दूर हो जाती है।
    इसके अलावा यदि हम गर्म दूध में चुटकी भर हल्दी डाल कर पीते हैं, तो यह सोने पे सुहागा होगा है।

Note : दूध में इसकी नेचुरल शुगर होती है, lactose इसीलिए दूध बिना चीनी डाले भी मीठा लगता है। इसीलिए हमें दूध फीका ही पीना चाहिए। क्योंकि चीनी डालने से यह अपनी प्राकृतिक मिठास खो देता है, और हमें वो फायदा नही मिल पाता जो मिलना चाहिए, बतौर स्वाद, बतौर पौष्टिकता।

निष्कर्ष-

इसीलिए हमें रोज दूध पीना चाहिए और इससे होने वाले फायदे भी लेने चाहिए।

How to celebrate a perfect Lohri ?

भारत की हर बात निराली है।
जैसे भारत की संस्कृति निराली है उसी तरह त्यौहारों के देश भारत के पर्व भी अनोखे और निराले हैं। पूरे देश में 13 जनवरी को लोहड़ी का त्यौहार मनाया जाता है। यह पंजाबियों का खास त्यौहार है। लोहड़ी का त्यौहार फसल की कटाई, बुआई और नए साल की आर्थिक शुरुआत के रूप में मनाया जाता है।

Meaning of Lohri-

लोहड़ी शब्द दो शब्दों के मेल से बना है, तिल+ रोड़ी। लोहड़ी को पहले तिलोड़ी कहा जाता था। धीरे-धीरे समय के साथ मिलकर इसका नाम लोहड़ी प्रसिद्ध हो गया।

नाम अनेक त्योहार एक-

भारत के अलग-अलग राज्यों में मकरसंक्रांति के एक दिन पहले लोहड़ी का त्यौहार मनाया जाता हैं। जिसको कई नामों से पुकारा जाता था जैसे कि पंजाब में कई जगह पर इसे लोई या लोही भी कहा जाता है।

History of Lohri-

दुल्ला भट्टी की कहानी का लोहड़ी के साथ खास संबंध है। कहा जाता है कि मुगल काल के समय जब पंजाब में संदल बार में अमीर सौदागरों को सुंदरी और मुंदरी नाम की दो अनाथ लड़कियों को बेचा जा रहा था। तो उस समय दुल्ला भट्टी जो कि एक नामी डाकू था ने लड़कियों की रक्षा की और जंगल में आग जला कर उनकी शादी हिन्दू लड़को से करवाई तभी दुल्ला भट्टी को पंजाब के नायक की उपाधि दी गई और तभी से लोहड़ी का त्योहार मनाया जाता है।

कुछ लोगों के लिए लोहड़ी का विशेष महत्व-

जिन लोगों के घर लड़के की शादी हुई हो जा घर बेटे ने जन्म लिया हो वे लोग अपने रिश्तेदारों को बुलाकर धूम-धाम से लोहड़ी मनाते हैं। लोहड़ी वाले दिन विवाहिता बेटियों के घर माता-पिता वस्त्र व भूषण भेजकर लोहड़ी मनाते हैं।

गांवों में बच्चों द्वारा समूह बनाकर लोहड़ी मांगना-

लोहड़ी से कुछ दिन पहले बच्चे घर-घर जाकर लोहड़ी मांगते हैं और आग जलाने के लिए उपले और लकड़ियां एकत्र करते हैं।साथ में वे

दे माई लोहड़ी तेरी जीवे जोड़ी
लोकप्रिय गीत बोलते हैं।

How to celebrate Lohri-

पंजाबियों के लिए लोहड़ी का खास महत्व है। खूले आसमान के नीचे एक जगह लकड़ियों का ढेर लगाकर शाम को आग लगाई जाती है। उसमें रेवड़ियां, मूंगफलियां और मेवे डाले जाते हैं। अग्नि के चारों ओर नाचते गाते हुए चक्कर लगाते हैं।

समय के साथ-साथ आ रहे बदलाव-

युग और परिस्थितियां बदलने के साथ-साथ बच्चे लोहड़ी मागना बंद कर रहे हैं और आग जलाने की जगह लोग डी.जे. पर फिल्मी गाने गाते हैं और जैसे कि लोग लोकगीतों को भूल ही चुके हैं। बस लोहड़ी पर नाचना-गाना और खाना-पीना है शेष बचा है।

इस बार मनाए लोहड़ी अनोखे ढंग से

हम हर बार लोहड़ी परिवार के साथ तो मनाते हैं। लेकिन इस बार लोहड़ी कुछ अनोखे ढंग से मनाई जाए। तो क्यों न हम इस बार लोहड़ी मनाने ऐसे लोगों के पास जाएं जो ठंड में गर्म कपड़े ना होने की वजह से ठिठुर रहे है, ग़रीबी के कारण खाना ना मिलने की वजह से खाली पेट सोने को मजबूर हैं। ऐसे लोगों के लिए गर्म कपड़े, जूते, कंबल, जर्सियां व खाने के लिए मूंगफली, रेवड़ियां, गचक और मेवे देकर बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लाएं।

आइए हम सब इस त्यौहार को कुछ खास बनाए… अपने अंदर की बुराइयां त्याग कर इन्सानियत की सेवा करके Lohri मनाएं…

पूज्य संत डॉ Gurmeet Ram Rahim जी ने हमे लोहड़ी मनाने का सही तरीका बताया जैसे कि-

अपनी बुरी आदतों की आहुति दे-

हमारे जितने भी त्यौहार हैं, वह अच्छाई के प्रतीक है। राम के नाम का जाप करते हुए अच्छे कर्म कीजिए। आज के दिन बुराई को जलाया गया तो आप भी लोहड़ी में अपनी बुरी आदतें जैसे- काम, क्रोध, लोभ, मोह, अंहकार, मन और माया की आहुति दीजिए और अच्छाई को अपनाएं।

त्यौहार चाहे कैसे मनाएं लेकिन उसके पीछे जो शिक्षा है उसे अवश्य अपनाएं-

लोहड़ी के दिन घर में खुशियां मनाइए, बच्चे को टाइम दीजिए, घर में जो परेशानियां हैं उनको दूर करने के लिए भगवान से दुआ कीजिए और जिस त्यौहार को जिस तरीके से मनाया जाता है मनाइए जरूरी यह है कि उसके अंदर जो सीख है।

मानवता भलाई के कार्य कर लोहड़ी मनाने का अनोखा तरीका-

आज लोग लोहड़ी बहुत सारे पैसे खर्च करके मनाने वाले है। तो दूसरी ओर दूसरों के दुख को अपना समझकर उसे दूर करके लोहड़ी के त्यौहार को 134 मानवता भलाई के कार्य करके मनाया जा रहा है। ये सब नेक कार्य पूज्य संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी की प्रेरणा से स्वयंसेवक कर रहे हैं। स्वयंसेवक प्रत्येक त्यौहार 134 मानवता भलाई के कार्य करके प्रत्येक त्यौहार मना रहे हैं जैसे कि

जरुरतमंद लोगों को कपड़े दान करना-

डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी लोहड़ी के त्यौहार को गरीबों में गर्म कपड़े बांट कर मना रहे हैं और बेसहारों का सहारा बन रहे हैं। इसके लिए कई क्लॉथ बैंक खोले गए हैं।

Food Bank-

हमारे देश में ना जाने कितने ऐसे लोग हैं, जो गरीबी की वजह से खाली पेट सोने को मजबूर हैं। Dera Sacha Sauda के स्वयंसेवक पुज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणा से सप्ताह में 1 दिन का व्रत रखते हैं और उस खाने को फूड बैंक में जमा किया जाता है। ऐसे लोगों की सहायता के लिए कई फूड बैंक खोले गए हैं व त्योंहार के अवसर पर जरुरतमंद लोगों राशन वितरित किया जाता है।

Blood donation-

समय पर रक्त ना मिलने की वजह से कई घरों के चिराग तो ऐसे ही बुझ जाते हैं। ‘ट्रू ब्लड पंप’ के नाम से जाने जाने वाले डेरा सच्चा सौदा के स्वयंसेवक ऐसे जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए 24*7 तैयार रहते हैं। आज लाखों स्वंयसेवक देशों व विदेशों में जरूरतमंद लोगों के लिए खूनदान करके लोहड़ी का त्यौहार मना रहे हैं।

आशियाना मुहिम के तहत घर बनाकर देना-

बेसहारा लोगों को गर्मी व सर्दी से बचाने के लिए उनके घर न होने के अधूरे सपनों को पूरा करने के लिए त्योहार के अवसर पर मुफ्त में घर बनाकर देते हैं।

Conclusion

आइए हम सब लोहड़ी के त्यौहार की खुशियों को दोगुना करने के लिए भूखे को खाना, प्यासे को पानी और किसी बीमार का इलाज करवाएं। किसी बेसहारा व जरुरतमंद का सहारा बनकर लोहड़ी की खुशियों को दोहरा करे।

खुशियों का महीना आया, जनवरी माह

जनवरी आई बहार लेके आई ,अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से नववर्ष की शुरुआत जनवरी माह से होती हैं और इस महीने को लेकर लोग उत्सुक रहते हैं क्योंकि नए साल की शुरुआत होती है लोग इस माह का बेसब्री से इंतजार करते हैं क्योंकि नया साल नई खुशिया लेकर आता हैं कहते हैं कि जब शुरुआत अच्छे से हो तो पूरा साल अच्छा बीतता है और इस उद्देश्य से लोग जनवरी माह के First Day घूमने जाते है , घर पर पकवान बनाते है पार्टिया करते है , पटाखे चलाते है व इस महीने के पहले दिन को एक त्यौहार की तरह पूरे हर्षोल्लास से धूमधाम से मनाते है ।

करोडो लोग ऐसे है जो सिर्फ जनवरी के पहले दिन को ही नही बल्कि जनवरी के हर दिन को धूमधाम से मनाते है , वे लोग फिजूलखर्ची करने के बजाए पूरे माह दिन दुःखियों की मदद करते है ।

अब आप सोच रहे होंगे की वो ऐसा क्यों करते है तो इसका कारण है इस धरती पर प्यार महोब्बत की गंगा बहाने वाले परम पूज्य शाह सतनाम जी महाराज का पवित्र अवतार माह होना ।

आदिकाल के ऋषि-मुनियों से लेकर आज तक संत सतगुरु ,पीर , फकीरों के जीवन का मुख्य उद्देश्य मनुष्य को उसके आत्मिक स्वरूप का ज्ञान कराकर उसे प्रभु परमात्मा से मिलाना है, इसके लिए संत सतगुरु समय-समय पर धरती पर अवतार धारण करते रहते हैं जो जाति धर्म या संप्रदाय की सीमा से मुक्त रहकर समस्त संसार के प्राणियों को इंसानियत का पाठ पढ़ाते हैं संतों का संपूर्ण जीवन ही ऐसा होता है जिसका अनुसरण करके एक स्वच्छ समाज का निर्माण किया जाता है क्योंकि संतो के व्यवहारिक जीवन का उद्देश्य ही समाज को बुराइयों झूठे आडंबरो, कुरीतियों से बचाते हुए जीवन के मूल उद्देश्य की जानकारी तथा शिक्षा देना होता है l रूहों का उद्धार करने आए ऐसे ही महान सतगुरु परम पूज्य शाह सतनाम सिंह जी महाराज ।

आइए आप जी के पाक- पवित्र जीवन के बारे में जाने:-

परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज का जन्म 25 जनवरी 1919, दिन शनिवार को अपने ननिहाल गांव – जीवन सिंह वाला, तहसील- तलवंडी साबो, जिला – बठिंडा (पंजाब )में हुआ , शाह सतनाम सिंह जी महाराज के आदरणीय पिताजी का नाम सरदार वरयाम सिंह सिद्धू तथा माता जी का नाम आस कौर जी था जो कि गांव श्री जलालआणा साहिब, तहसील डबबाली जिला- सिरसा हरियाणा में रहते थे ।

आप जी के आदरणीय पिताजी गांव के जमीदार थे व दादा सरदार हीरा सिंह जी सिद्धू गांव के जेलदार थे , इस साधन संपन्न परिवार में दुनियावी सुख सुविधा की कोई कमी नही थी लेकिन पूजनीय माता – पिता जी के शादी के 18 वर्ष बाद तक कोई संतान नहीं थी पूजनीय माता पिता जी को हर पल संतान प्राप्ति की चिंता सताती रहती थी ।

पूजनीय माता पिता जी हमेशा साधु- फकीरों की अत्यधिक सेवा किया करते थे तथा मालिक की भक्ति में तल्लीन रहते थे उन्हीं दिनों गांव में एक मस्त फकीर का आगमन हुआ जो लोगों को ईश्वर भक्ति के लिए प्रेरित करता था पूजनीय माता पिता जी ने उस फकीर को घर में आमंत्रित किया व खूब आवभगत की ,आदरणीय माता जी उस फकीर को आदर सत्कार से बैठाकर खूब सेवा करते थे ,एक दिन फकीर ने प्रसन्न होकर कहा माता जी आपकी ईश्वर के प्रति भक्ति व प्रेम भावना बहुत ही सराहनीय है आपकी संतान प्राप्ति की कामना ईश्वर अवश्य ही पूरी करेंगे आपके घर में कोई महापुरुष जन्म लेगा व परमात्मा की असीम कृपा से ही पूजनीय माता पिता जी को लगभग 18 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद शाह सतनाम सिंह जी महाराज के रूप में संतान की खुशी प्राप्त हुई ।

आप जी के धरा पर आगमन का शुभ समाचार जैसे ही गांव में पहुंचा तो प्रसन्नता की लहर दौड़ गई और उस समय की रिवायत के अनुसार समस्त गांव में थाल भर भरकर शक्कर बांटी गई तथा अनाज व गुड़ से गरीबों की झोलियां भर दी ।

पूज्य पिता – माता जी ने अपने लाडले का नाम हरबंस सिंह रखा आप जी पूज्य माता पिता जी की इकलौती संतान थे ।

बचपन से ही दयालुता के पुंज व अथाह प्रेम के सागर है शाह सतनाम जी दातार:-

एक बार की बात है कि आप जी भोजन करने बैठे ही थे कि एक व्यक्ति आप जी के पास अचानक आकर खड़ा हो गया ,उस व्यक्ति की स्थिति अत्यधिक दयनीय थी, फटे पुराने वस्त्र व भूख से व्याकुल चेहरा देखकर आप जी तुरंत समझ गए कि यह व्यक्ति कई दिनों से भूखा है, आपजी ने व्यक्ति से पूछा- क्यों भागता लस्सी पीनी है? अभी वह हां करने में ही संकोच कर रहा था कि आप जी ने लस्सी से भरा हुआ लौटा उसकी तरफ बढ़ा दिया ,उस व्यक्ति ने एक ही सांस में पूरा का पूरा लोटा खाली कर दिया ,तत्पश्चात आप जी ने अपने भोजन की थाली भी उसकी ओर बढ़ा दी भोजन की थाली देखकर उस व्यक्ति के चेहरे पर चमक आ गई थाली पकड़कर वह व्यक्ति वहीं बैठ गया व भोजन करने के बाद वह प्रसन्न होकर माता जी से बोला माताजी में 3 दिन से भूखा था आज भरपेट भोजन मिला है यह कह कर उसने आपजी का हाथ अपने हाथ में ले लिया और आप जी के नूरी ललाट को ध्यान पूर्वक देते हुए कहा माता जी यह कोई साधारण व्यक्ति नहीं है बल्कि स्वयं भगवान का ही स्वरूप है , पूजनीय माता जी के मन में विचार आया कि यह व्यक्ति भोजन प्राप्ति के बदले मेरे पुत्र की प्रशंसा कर रहा है लेकिन समय आने पर ही भेद मालूम हुआ कि उक्त व्यक्ति ने उस समय सत्य वचन कहे थे ।

आगे चलकर यह बात सत्य हुई और पूजनीय सतगुरु जी ने अपनी पावन दृष्टि व आध्यात्मिक सत्संगों ओ द्वारा करोड़ों जीवात्माओं का उद्धार किया ।

इसी प्रकार गांव का एक मजबूर परिवार पूज्य माता जी के पास आया! उन्हें कुछ पैसो की जरूरत थी! उन्होंने अपनी लड़की की शादी करनी थी वे बहुत मजबूर थे घर मे पैसे की भारी कमी थी और विवाह के दिन बहुत नजदीक थे! कहीं से भी सहायता मिलने की आशा नहीं थी! इसलिए वे पूज्य माता जी पास मदद के लिए प्रार्थना लेकर आये थे उन्हें चार सौ रूपये की आवश्यकता थी उन दिनों मे चार सौ रूपये की बहुत कीमत हुआ करती थी! दया दीनता भंडार पूज्य पिताजी ने उनकी सारी बात सुन लीं! पूज्य माता जी से कहने लगे, “माता जी”! जे मेरी इक वी भैण हुंदी ता उसकी शादी ते किन्ना खर्च हुँदा! बस इह समझ लवों कि इह शादी मेरी भैण दी है! जे इंहा नू चार सौ दी लोड़ है ता पंच सौ रूपये दे देयो! कारज पूरा होंण ते जे बच गए ता वापिस दे जाणगे! इनहा नू खाली ना मोड़ना!” कुल मालिक के बाल मुख से ये वचन सुनकर उन दोनों जीवो के ह्रदय प्रेम- विभोर हो गए और वे वहाँ से मदद लेकर लाख लाख धन्यवाद करते गए!

बचपन मे ही करने लगे ईश्वर की खोज:

शाह सतनाम जी महाराज में बचपन से ही कुल मालिक से मिलाप की प्रबल इच्छा थी ,आप जी ने अपने ननिहाल में जाकर सिख धर्म की मर्यादा अनुसार “अमृत पान” किया और “सतनाम वाहेगुरु” का जाप किया ।
आप जी ने गांव के ही एक बुजुर्ग सज्जन श्री मानदास जी से गुरुबाणी का ज्ञान सीखा व अपना अधिकतर समय गुरबाणी पढ़ने में लगाते ।

ग्रंथों व गुरबाणी के अध्ययन से आप जी ने यह निष्कर्ष निकाला कि परमात्मा का सच्चा नाम लेने से इंसान का उद्धार हो सकता है, ग्रंथों में तो नाम की महिमा का गुणगान ही किया गया है परंतु मालिक प्राप्ति के लिए पूर्ण सतगुरु से नाम की अनमोल दांत प्राप्त करना जरूरी है इसके बाद आप जी किसी सच्चे संत महापुरुषों पूर्ण सतगुरु की खोज में लग गए ।

आप जी को सबसे पहले मल्लू राम नामक एक सत्संगी ने परम संत बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज की महिमा के बारे में बताया कि शाह मस्ताना जी के दिव्य स्वरुप के दर्शन करके मन को असीम शांति व सुख का अनुभव होता है उनके नूरी स्वरूप से प्रभु का तेज लगता है उनके उच्च विचार हैं ऐसी महिमा को सुनकर आप भी बहुत प्रभावित हुए तथा मल्लू राम से कहा कि तुम नाम लेकर आओ हमें बताओ कि मुझे मस्ताना जी किस प्रकार से क्या-क्या समझाते हैं नामदा लेते समय कोई सौगंध आदि तो नहीं लेनी पड़ती ।

आप जी के आदेश अनुसार मल्लू राम ने पूजनीय शाह मस्ताना जी से नाम शब्द प्राप्त किया व आप जी को बताया कि नाम शब्द किसी को बताना नहीं होता , व मस्ताना जी महाराज ने नाम की दांत बख्श कर अलौकिक खुशियां दी है जिसका वर्णन नही किया जा सकता और यह सुनकर शाह सतनाम सिंह जी, पूज्य मस्ताना जी महाराज के चरणों में नाम शब्द लेने के लिए आ गए , तो सर्व समर्थ मस्ताना जी महाराज ने फरमाया अभी समय नहीं आया है जब समय आएगा तो आप को पास बुलाकर नाम देंगे आप सत्संग सुनते रहो ।

नाम शब्द की प्राप्ति:-

शाह सतनाम जी महाराज लगभग 3 वर्षों तक पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज द्वारा द्वारा फरमाए गए सत्संगों को सुनते रहे, दिनांक 14 मार्च सन 1954 की बात है उस दिन सत्संग का कार्यक्रम गांव घुकांवाली वाली सरसा में था, उस दिन आप जी अपने पूजनीय माता जी को साथ लेकर गांव घुकांवाली पहुंच गए, सत्संग के पश्चात जब शाह मस्ताना जी नाम सब देने के लिए जाने लगे तो आप जी को चबूतरे पर खड़ा देखकर दूर से ऊंची आवाज में फरमाया ‘हरबंस सिंह” आप भी अंदर चलकर हमारे मूढ़े के पास बैठ जाओ आज रात आपको भी दाता सावण सिंह जी के हुक्म से नाम दीक्षा मिलेगी, और वचन फरमाए की आपको इसलिए पास बैठा कर नाम देते हैं कि आपसे कोई काम लेना है आपको जिंदा राम का लीडर बनाएंगे जो कि दुनिया को राम नाम जपाएगा, इस प्रकार पूजनीय मस्ताना जी महाराज ने आपजी को 14 मार्च 1954 को “बहुमूल्य नाम शब्द की बख्शीश कर” परिपूर्ण कर दिया अर्थात स्वयं सतगुरु जी ने अपनी कृपा दृष्टि करके सर्व सामर्थ सतगुरु ही बना दिया ।

पूर्ण मुर्शिद से मिली बख्शिशे

परम पिता शाह सतनाम जी का अपने गुरु मुर्शिद सच्चे सतगुरु Shah Mastana Ji Maharaj से बेहद प्रेम था और वो हमेशा अपने मुर्शिद का गुणगान गाया करते थे , आप जी के प्रेम को देखकर साई मस्ताना जी महाराज ने उन्हें अनेक बख्शिशे प्रदान की ।

नाम दिलवाने की सेवा- साई मस्ताना जी महाराज ने Shah Satnam Ji को लोगो का उद्धार करने के लिए व लोगों को भक्ति से जोड़ने के लिए नाम देने के लिए चुना ।

सरदार हरबंस सिंह से सतनाम सिंह:- यह बात फरवरी 1960 की है पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज ने स्पष्ट किया कि आज से हमने श्री जलालआना साहिब वाले सरदार हरबंस सिंह को “सतनाम सिंह” बना दिया है यह नाम इन्हीं की दरगाह में मंजूर हुआ है पूजनीय शाह मस्ताना जी ने अपने पवित्र मुख से चार पाँच अन्य सेवादारों के नाम लेकर वचन फरमाया कि सतगुरु ने उनकी भी परीक्षा ली परंतु वे सफल नहीं हुए ।

गुरुगदी की बख्शिश:- पूजनीय बेपरवाह जी ने आपजी का नाम बदलकर आगे वचन फरमाए हमने सरदार सतनाम सिंह से इनको ” सतगुरु कुल मालिक “बना दिया है , पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज ने फिर फरमाया यह रूहानी ताकत कलम का नमूना है और शाह सतनाम सिंह श्री जलालआना साहिब वाले को सतगुरु, कुलमालिक बना दिया है मालिक ने इनसे बहुत काम लेना है ।

  • Dera Sacha Sauda एक ऐसी संस्था है जहाँ सभी धर्मों का आदर सत्कार करना सिखाया जाता है व किया जाता है यहाँ सभी धर्म, मजहब, जात के लोग आते है ।
  • परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने लोगों को इंसानियत का पाठ पढ़ाया ।
  • सब जीवों से निस्वार्थ प्रेम करना सिखाया ।
  • तीन वचनों पर चलने की प्रेरणा दी

परम पूजनीय शाह सतनाम सिंह जी महाराज की शिक्षा:-

  1. शराब नही पीना।
  2. मांस अंडों का सेवन नही करना।
    3.पति-पत्नी का रिश्ता जायज है। पति पत्नी के अलावा उम्र में बड़ा हो तो माँ बाप के समान,बराबर के तो बहन भाई के समान और छोटों को बच्चों के समान मानना अर्थात रिश्तों के प्रति वफादार रहना।

पूजनीय बेपरवाह साई मस्ताना जी महाराज Dera Sacha Sauda की पहली पातशाही थे , साई मस्ताना जी ने 12 वर्ष सतगुरु रूप में सेवा की व सन 1960 में पूज्य गुरु Shah Satnam Singh Ji Maharaj को गुरुगद्दी सौंप ज्योति जोत (देह त्याग)समा गए , दूसरी पातशाही के रूप में परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने 1960 से 1991 तक सतगुरु रूप में सेवा की व मौजूदा पातशाही हजूर पिता Saint Dr. Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan को 1990 में गुरुगद्दी सौंप दिसंबर 1991 में ज्योति समा गए ।
जब शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने Saint Dr. MSG को गुरुगद्दी बख्शी तब वचन किये थे – “हम थे, हम हैं, हम ही रहेंगे”
और वही वचन आज पूरे हो रहे है। पूज्य गुरु Saint Dr. Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan को पूरे विश्व में MSG के नाम से जानते हैं
M का अर्थ मस्ताना जी, S का अर्थ शाह सतनाम सिंह जी और G का अर्थ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां होता है ।

Param Pita Shah Satnam Singh Ji Maharaj एक महान शख्सियत:-

परम पिता जी एक महान ईश्वरीय अवतार स्वरूप थे। जिस प्रकार ईश्वर के गुणों का वर्णन नहीं किया जा सकता, उसी प्रकार साईं जी के करिश्में ब्यान नहीं किए जा सकते। उनके गुणों को शब्दों में व्यक्त करना तो मात्र सूर्य को दीपक दिखाने के समान है।परम पिता Shah Satnam Ji Maharaj ने हजारों व्यक्तियों को नाम दीक्षा देकर इस भवसागर से पार उतारने का रास्ता दिखाया और संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के रूप में करोड़ों लोगों को रास्ता दिखा रहे हैं व दिखाते रहेंगे ।

डेरा सच्चा सौदा के अनुयाई अवतार माह को कैसे मनाते है:-

परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने जनवरी के माह में अवतार लिया और आप जी की शिक्षा पर चलते हुए Dera Sacha Sauda के स्वयंसेवक इस माह को मानवता भलाई के कार्य करके मनाते हैं जैसे खून दान, पौधारोपण, गरीब व जरूरतमंद लोगों को राशन देकर, सर्दी से ठिठुरते हुए लोगों को सर्दी के सामान जैसे स्वेटर, कंबल, रजाई वितरित करना आदि। इसके आलावा डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी पूज्य गुरूजी के वचनुसार महीने के हर दिन अपनी एक बुराई छोड़ने का प्रण लेंते है। यह सब मानवता भलाई के कार्य वह पूरे जनवरी महीने करेंगे।

Conclusion

आप सभी को व सारी कायनात को रुहानियत के सच्चे मसीहा परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज के जन्म माह व नए वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं!!

नन्हा फरिश्ता- कॉम्पैक्ट रूप से तैयार किया गया एक मोबाइल अस्पताल

मानवता की सेवा करना ही मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म है। डेरा सच्चा सौदा एक ऐसी संस्था है जिसके अनुयायी यह धर्म बहुत सालों से दिल से निभाते आ रहे हैं। यह अनुयायी सेवा को अपना कर्म और मानवता को अपना धर्म मानते हैं। कोई भी जगह हो चाहे बाढ़ हो या सुनामी, भूकंप आए या बादल फटे यह लोग कोई भी जगह हो चाहे किसी गरीब को खाना देना हो, किसी गरीब को कपड़े देने हो किसी जानवर की मदद करनी है या पशु पक्षियों को खाना डालना वह हर नेक काम में सब से आगे रहते हैं। डेरा सच्चा सौदा में पूज्य गुरु जी द्वारा लोगों को सुविधा मुहैया कराने के लिए एक ऐसे Mobile hospital का निर्माण किया गया है। जिसको पूज्य गुरु जी ने नन्हा फरिश्ता के नाम से नवाजा है।

फरिश्ता :-
फरिश्ता वह होता है जो बिना किसी स्वार्थ के किसी दूसरे की मदद करें। लेकिन आज के युग में सब बहुत ज्यादा मतलबी हो चुके हैं। सभी लोगों को अपने आप से मतलब है। लेकिन इस युग में भी डेरा सच्चा सौदा पीछे नहीं रहा वह एक फरिश्ता खुद तो है ही लेकिन उन्होंने एक नन्हें फरिश्ते का भी निर्माण करवाया जो कि इतना हेल्पफुल कि हर गरीब इंसान को उससे बहुत फायदा हो रहा है और वह सच में गरीब लोगों के लिए फरिश्ता साबित हुआ है।

नन्हा फरिश्ता :-

नन्हा फरिश्ता एक छोटी एंबुलेंस है, जिसके अंदर ऑपरेशन का सामान और सारे इक्विपमेंट्स होते हैं और उसके अंदर अच्छे-अच्छे हॉस्पिटल स्टाफ के द्वारा फ्री ट्रीटमेंट दिया जाता है इसका निर्माण डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसा द्वारा किया गया था खासकर इसका निर्माण गरीब लोगों के लिए किया गया था और उन लोगों के लिए किया गया था जो छोटे-छोटे गांव में रहते हैं और उनके आसपास कोई भी अच्छा अस्पताल नहीं होता उनकी सहायता के लिए इसका निर्माण किया गया था यह मोबाइल अस्पताल अच्छी तरह से एक्स-रे, ईसीजी, नेब्युलाइज़र, आटोक्लेव लैब, अल्ट्रासाउंड, डायलिसिस, एनेस्थीसिया मशीन, पानी की टंकी, एयर कंडीशनर, जनरेटर, केराटोमीटर, रेफ्रिजरेटर और दवाओं की पूरी श्रृंखला से सुसज्जित है।

लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज नन्हा फरिश्ता :-

यह दुनिया का सबसे छोटा हॉस्पिटल है मोबाइल हॉस्पिटल और इसके अंदर बहुत अच्छी फैसिलिटी है और यह बनाया गया है पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसा द्वारा

यह एक ऐसा हस्पताल है जो कि चलता फिरता है और दूरदराज पहुंचकर लोगों को सुविधाएं उपलब्ध करवाता है। पूज्य गुरु जी द्वारा डिजाइन किए गए इस अस्पताल को नन्ना फरिश्ता नाम दिया गया है। इस नन्हें फरिश्ते ने हजारों लोगों की जिंदगियां बचाई है और इतना ही नहीं नन्हे फरिश्ते का नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में मोबाइल अस्पताल ‘नन्हा फरिश्ता’ दर्ज किया गया है। नन्हा फरिश्ता के द्वारा अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं जरूरतमंद लोगों के लिए उनके दरवाजे तक मुफ्त में सुनिश्चित करवाई जाती हैं। यह विश्व का सबसे व्यापक मोबाइल अस्पताल है, इसे गुरु जी द्वारा कंपैक्ट रूप से डिजाइन किया गया है।

इलाज के लिए कहीं भी पहुंच जाता है नन्हा फरिश्ता :-

दूरदराज के क्षेत्रों में ले जाने में कोई असुविधा ना हो इसलिए दिए गए छोटे आकार के बावजूद यह डॉक्टर, चिकित्सा कर्मचारी, अस्पताल उपकरण व दवाइयां इत्यादि को ले जाने की क्षमता रखता है। यह गुरु जी द्वारा डिजाइन की गई कोई बड़ी इमारत नहीं है, बल्कि एक चलता फिरता वाहन यह समय पर बचाव क्षेत्रों तक पहुंच सकता है और राहत प्रदान करने के लिए उचित चिकित्सा सुविधाएं प्रदान कर रहा है। नन्हा फरिश्ता के जरिए गांव व दूरदराज के क्षेत्रों में मुफ्त मेडिकल कैंप के द्वारा सेवाएं लोगों तक पहुंच रही है और इसमें शाह सतनाम जी स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल के डॉक्टर द्वारा इलाज किया जाता है |

Conclusion

डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणा से सृष्टि की भलाई के लिए 134 मानवता भलाई के कार्य कर रहे है। वैसे ही हम लोगों को भी मानवता की सेवा के लिए अपना कदम बढ़ाना चाहिए और सभी जरूरतमंद लोगों की मदद करनी चाहिए। अगर कोई गरीब है और इलाज नहीं करवा सकता, तो उसकी आर्थिक स्थिति को देखते हुए हमें उनकी मदद करनी चाहिए और कोई ऐसी अवस्था में है कि खुद से अस्पताल नहीं जा सकता तो उसे सही समय पर अस्पताल पहुंचाना चाहिए। हमारी एक छोटी सी मदद किसी की जिंदगी बचा सकती है।

पेड़ लगाएं, वातावरण बचाएं

क्या आज का मनुष्य सच मे अपने आस पास के प्रकति और पर्यावरण के महत्व को समझ पाया है क्या व्यक्ति चाँद- तारे, सूर्य, आकाश, शीतल पवन, लहलहाते सुंदर वृक्ष, गीत गुनगुनाते पक्षी और असीम समुन्द्र के विषय मे सच मे समझ पाया है?
आज के इस आधुनिक युग का मनुष्य पर्यावरण को बहुत साधारण और तुच्छ समझने लगा है! क्योकि प्रकति और पर्यावरण हर जगह मौजूद है इसलिए लोग इसे आसानी से मिलने वाला एक तुच्छ वस्तु समझने लगे है आपको यह बात बुरी लग सकती है लेकिन यह इस संसार का एक सबसे बड़ा सच है!

प्रकृति को एहसास करना और इसे समझने हर किसी व्यक्ति के जीवन का अभिन्न हिस्सा होना चाहिए! आज की इस दुनिया मे लोग अपना ज्यादा समय TV देखकर व इंटरनेट चलाकर बिताते है! ज्यादातर वह घर के अंदर ही रहकर अपना समय बिताते है ! यही आज की दुनिया की सबसे बड़ी बीमारी को जाग्रत करता है! अपने काम के साथ साथ कुछ दिन के लिए प्रकृति का आनंद लेना चाहिए! क्योकि प्रकृति ही वह शक्ति है जो हमें इस विश्व को सब कुछ प्रदान करती है चाहे वह हमारा खाना हो या हमारा जीवन!

प्रकृति मे वह शक्ति होती है जो शरीर से कई प्रकार की बीमारियों को दूर कर देता है हरियाली से मन का तनाव कम होता है और दिमाग़ को शांति मिलती है मनुष्य को कभी भी प्रकृति के साथ छेड़खानी नहीं करनी चाहिए! आज के मनुष्य को लगता है कि प्रकृति को उसके अनुसार होना चाहिए जो कि गलत बात है!
हम मनुष्य हमारी प्रकृति के अनुसार रहने के लिए बने है ना कि इसमें अपने अनुसार कुछ बदलाव करने के लिए!

हम प्रकृति के लिए क्या-क्या कर सकते है?

  1. पर्यावरण और प्रकृति के विनाश को रोकने के लिए हमें इसे स्वच्छ रखना होगा!
  2. इंसान ने पर्यावरण प्रदूषण और Global Warming जैसे कई प्राकृतिक विनाश करने वाले कारणों को अपने लाभ के लिए उत्पन्न किया है जिसपे रोक लगानी चाहिए!
  3. हमें जितना हो सके पर्यावरण को स्वच्छ रखना चाहिए प्रदुषण नहीं फैलाना चाहिए!
  4. घर बनवाने के लिए लाखो पेड़ो की कटाई हो रही है इसलिए हमें नए पेड़ पौधे लगाना बहुत जरूरी है!
  5. हम वृक्षारोपण करके मृदा अपरदन की दर मे कमी ला सकते है!
  6. अधिक से अधिक पेड़ लगाए!
  7. अपने जन्मदिन को पौधारोपण करके मनाएं।
  8. सालगिरह को मनाने के लिए पौधारोपण करें।
  9. अपनी जिंदगी के हर खुशी के अवसर को पौधारोपण करके ही मनाएं।

इसी तरह आप हर त्यौहार और हर अवसर को पौधे लगाकर ही मना सकते हो! लेकिन ऐसा नहीं कि सिर्फ पौधे लगा दिये और काम पूरा हो गया नही, उसकी देखभाल भी करनी है। हर रोज़ उस पौधे को पानी डाले और उसकी देखभाल भी करें।

क्या न करे :-

  1. पानी को प्रदूषित ना करें।
  2. फसलों की कटाई के बाद पराली को आग मत लगाएं |
  3. पेड़ो को कटने से बचाये |

इन सब बातों का ध्यान रखें, जैसे कि हम कटाई तो कर देते है और उसकी जगह नया पौधा नहीं लगाते तो उससे वातावरण में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। जिससे हमें तो नुकसान पहुँचाता ही है और प्रकृति का संतुलन भी बिगड़ता है |

तो आइए आज आप भी Nature Campaign में अपना भी योगदान देकर प्रकति की सुंदरता को कायम रखने मे मदद करें।

इतना ही नहीं आज मैं आपका एक ऐसी संस्था के बारे मे परिचय करवाती हु, जो बिना किसी स्वार्थ से मानवता की सहायता करने के लिए हमेशा तत्पर रहती हैं।

उस संस्था का नाम Dera Sacha Sauda हैं। जो हमेशा मानवता की मदद करने में तैयार रहती है। अपने गुरु संत डाॅ.गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सा की प्रेरणा पर चलते हुए यह सेवादार हमेशा मानवता भलाई के कार्यों के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। Nature Campaign भी इन्ही के द्वारा ही शुरू किया गया है |

पेड़ पौधे लगाकर करते हैं पूरी सम्भाल :-


अधिक से अधिक पेड़ लगाकर प्रकति को सुंदर बनाए रखने के लिए अपना योगदान दे रहे हैं।
इनका मानना है कि भारत मे हर 1 घंटे मे एक पेड़ काटा जा रहा है क्यों ना अगर हम सभी अगर महीने मे एक एक पौधा लगाने की प्रण ले तो पर्यावरण को हानि होने से हम बचा सकते है
इसके जरिये हम आने वाली पीढ़ियों को एक स्वस्थ वातावरण भी दे सकते है इनके अनुसार ऐसे नेक कार्यों मे बच्चों को भी शामिल करे ताकि उन्हें भी लगे यह अच्छी आदत होती है
काटे जा रहे पेड़ो की भरपाई करने के लिए डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों ने हर महीने एक पौधा लगाने का संकल्प लिया है और उसके बाद पौधों की पूरी संभाल भी करते है |

हर खुशी के मौके पर करते है पौधारोपण :-

डेरा सच्चा सौदा के अनुयाई कोई भी खुशी का मौका हो उसे पौधारोपण कर के मनाते है जैसे शादी की सालगिरह हो या बच्चे का जन्मदिन | पूज्य गुरु संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह इन्सा जी फ़रमाते है जैसे आप अपने बच्चों को देखभाल करते हो उसी तरह पेड़ पौधों की भी सार सम्भाल करें |

डेरा सच्चा सौदा के नाम पौधारोपण में दर्ज है तीन वर्ल्ड रिकॉर्ड :-

पौधारोपण के लिए डेरा सच्चा सौदा के नाम तीन गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकार्ड भी दर्ज हैं। जिनमें 15 अगस्त 2009 को एक दिन में 68 लाख 73 हजार 451 पौधे लगाए गए। 15 अगस्त 2009 को एक घंटे में 9 लाख 38 हजार 7 पौधे लगाए गए। 15 अगस्त 2011 को 408 अलग अलग जगहों पर 3 लाख 40 हजार 200 लोगों द्वारा 19 लाख,45 हजार 535 पौधे लगाए गए थे।

निष्कर्ष :-

ऐसे ही 134 मानवता भलाई के कार्य यह संस्था करती आ रही हैं। तो आइए आज हम भी प्रण करें कि हम धरती को हरा भरा बनाये रखे और हमारे उपयोग के लिए जितने पेड़ काटे जा जाते है उससे अधिक पेड़ लगाए इससे हम हमारी धरती को आने वाली मुसीबतो से बचाने सकते है!

खुशियों का त्यौहार: Christmas Day

क्रिसमस दिवस भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में हर्षोल्लास के साथ धूमधाम से मनाया जाता है , Christmas ईसाई धर्म के लोगों का मुख्य त्योहार हैं जिसे वह ईसा मसीह (यानी यीशु )के जन्म दिवस के उपलक्ष में मनाते हैं l ये त्यौहार बड़े लोगों के लिए तो खास होता ही है लेकिन बच्चों के लिए भी बेहद खास होता है। इस अवसर पर बच्चों के लिए सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र होता है – “सांता क्लॉज” जो लाल और सफेद कपड़ों में बच्चों के लिए ढ़ेर सारे Gift और Chocolates लेकर आता है, बता दें कि ईसा मसीह “ऊँच-नीच” के भेदभाव को नहीं मानते थे। उन्होंने दुनिया के लोगों को “प्रेम और भाईचारे” के साथ रहने का संदेश दिया था।

  • क्रिसमस आनंद एवं खुशियों का त्योहार है। इस अवसर पर ईसाई अपने मित्रों और निकट सम्बन्धियों को भोजन एवं पार्टी के लिए आमंत्रित करते है। ये प्रभु ईशा (ईसाई धर्म के संस्थापक) के जन्म दिवस के अवसर पर हर साल 25 दिसंबर को शीत ऋतु में मनाया जाता है ,इस दिन को Christmas Day के रुप में प्रभु ईशा को श्रद्धांजलि और सम्मान देने के लिए मनाया जाता है।
  • इस दिन लोग चर्च जाते हैं और विशेष तौर पर सामुहिक प्रार्थना भी की जाती है। क्रिसमस कैरोल (धार्मिक गीत) गाते हैं।
  • 336 ई.पूर्व में रोमन के पहले ईसाई रोमन सम्राट के समय में सबसे पहले Christmas 25 दिसंबर को मनाया गया। 25 दिसम्बर से दिन बड़े होने लगते हैं इसलिए इस दिन को “बड़ा दिन” भी कहा जाता है।

ईशा मसीह थे प्रेरणादायक:-

एक बार, एक गांव में प्रभु ईशु ने लोगोंं को एक दृष्टांत बताया कि एक चिड़िया अन्न के कुछ दाने ले जा रही थी, ले जाते समय अन्न के कुछ दाने काली मिट्टी पर, कुछ मेढ़ पर और कुछ मुंंडेर पर गिर गये। जो दाने मुंडेर पर गिरे, वे अंकुरित नहीं हुए, जो मेढ़ पर गिरे, वे अंकुरित हुए किन्तु खरपतवार के कारण समाप्त हो गये और जो काली मिट्टी में गिरे, वे अंकुरित हुये व पल्लवित होकर, उत्तम फलदायी हुए।
इस दृष्टांत का अर्थ समझाते हुए प्रभु ईशु ने कहा कि ‘जो दाने मुंडेर पर गिरे और समाप्त हो गये, वे उन लोगों के समान हैं जो परमात्मा की बातें सुनते हैं लेकिन अमल में नहीं लाते। मेढ़ पर गिरे हुए दाने उन लोगों के समान हैं, जो परमात्मा की बातें सुनते हैं, अमल में लाते हैं लेकिन जल्दी ही शैतान के बहकावे में आकर सत्यमार्ग से हट जाते हैं। काली मिट्टी पर गिरे अन्न के दाने उन लोगों के समान हैं जो परमात्मा की बातों पर विश्वास करते हैं और पूरी तरह अमल में लाते हैं। ऐसे लोगों को समय आने पर आशा से अधिक फल की प्राप्ति होती है।’ समस्त उपदेशों का सार ईशु मसीह ने ‘प्रेम’ कहा है। ज्ञान वह शस्त्र है, जिससे माया रूपी पर्दे को काटा जाता है, और प्रेम वह शक्ति है, जिससे परमात्मा, भक्त के प्यार में बंदी बनकर आ जाते हैं।
-ब्रहमज्ञान का भी यही सार है कि प्राणी कितना भी ज्ञानी हो जाये, ‘परमात्मा’ की प्राप्ति ‘प्रेम’ से ही होती है।

बच्चों के लिए बेहद खास व आनंददायक होता है क्रिसमस दिवस:-

क्रिसमस को खास उसकी परम्पराएं बनाती हैं। इनमें एक संता निकोलस हैं, जिनका जन्म ईसा मसीह की मृत्यु के लगभग 280 साल बाद मायरा में हुआ था। उन्होंने अपना पूरा जीवन यीशू को समर्पित कर दिया। उन्हें लोगों की मदद करना बेहद पसंद था। यही वजह है कि वो यीशू के जन्मदिन के मौके पर रात के अंधेरे में बच्चों को Gift दिया करते थे व तरह तरह के Gift पाकर बच्चे इस दिन को आनन्दपूर्ण तरीके से Celebrate करते हैं, दरअसल “संत निकोलस” को “सांता क्लॉज” माना जाता है, क्योंकि वे रात के वक्त Gift बांटते थे। उन्होंने पूरा जीवन गरीब और ज़रूरतमंद लोगों की मदद में लगाया था l

  • बच्चों के मन में Christmas के त्योहार को लेकर उत्साह होता है क्योंकि वो यह मानते हैं कि Christmas की रात सांता आएंगे और उनकी सभी Wishes पूरी करेंगे ।

क्रिसमस मनाने के लिए इस अनोखे तरीके को अपनाएं और खुशियां पाएं:-

हर खुशी के अवसर पर प्रत्येक व्यक्ति खुशियां पाना चाहता है लेकिन अगर आप इस Christmas पर व अपने हर खुशी के अवसर पर अपनी खुशियों को दोगुना करना चाहते हो तो गरीब व ज़रूरतमंद परिवारों की मदद करें।
अभी कठोर सर्दी का मौसम चल रहा है और आर्थिक स्थिति कमजोर होने की वजह से बहुत से गरीब व अति ज़रूरतमंद परिवार हैं जिनके पास सर्दी से बचने के लिए गर्म कपड़े नहीं है। आप उन लोगों को गर्म कपड़े, कंबल वितरित करें व भूखे लोगों को खाना खिलाएं।
अपने आसपास जरूरतमंद बच्चों को जूते, मौजे, खिलौने, मिठाइयां आदि वितरित करें ताकि वह भी Christmas मना सकें, उनके चेहरे पर मुस्कान लाने की वजह बनें, जब आप उनकी मदद करोगे तो आपको उनसे दुआएं मिलेंगी जो आपकी खुशियों को कई गुणा कर देंगी।

इस क्रिसमस पर अपनी बुराइयां छोड़ें और जीवन को खुशहाल बनाएं:-

आज के समय में बहुत से लोग त्योहार का गलत फायदा उठाते हैं। त्योहार के दिन गलत कार्य करते हैं जैसे :- शराब पीना, जुआ खेलना आदि।

  • आज Christmas का पवित्र दिन है। कोई भी त्यौहार आता है, उसे उसी रूप में मनाया जाए तो बेहद खुशी मिलती है। नेकी भलाई के कार्य किए जाएं, भले कर्म करें और भले कर्म करने का प्रण करो, यही त्यौहार सिखाते हैं। जो भी धर्म के लोग अपने त्योहार को मनाते हैं, उसमें यही अहम बात होती है कि इसका स्वरूप बदलना नहीं चाहिए, अच्छे – भले कर्म, परमार्थ करते हुए आप आगे बढ़ेंगे तो सतगुरु मौला अंदर बाहर खुशियों से मालामाल कर देंगे।
  • आज अपनी बुरी आदतें छोड़ें और अच्छी आदतों को अपनाएं क्योंकि संत पीर पेगम्बरों का जीवन भी लोगों की बुराइयां छुड़वाने के लिए ही होता है। जब बुराइयां खत्म हो जाएंगी तो आपका जीवन सुखमय व्यतीत होगा, घर में खुशियां आएंगी।

सर्व धर्म संगम डेरा सच्चा सौदा द्वारा हर्षोल्लास से मनाया जाता है क्रिसमस का पवित्र त्यौहार:

डेरा सच्चा सौदा सर्व धर्म संगम है, यहां सभी धर्मों के लोग आते हैं व सभी धर्मों के प्रति सम्मान रखते हुए, सभी धर्मों के लोगों का तहे दिल से स्वागत सत्कार किया जाता है और हर त्योहार को खुशी से मनाया जाता है, इसी तरह Christmas का त्योहार भी दूसरों की मदद करके बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।
वैसे तो Dera Sacha Sauda के करोड़ों सेवादार हर दिन ही ज़रूरतमंद लोगों की मदद करते हैं लेकिन इस दिन Dera Sacha Sauda के सेवादार जरूरतमंद लोगों के लिए राशनदान, खून दान, पौधारोपण, गरीब बच्चों के लिए जूते, मोजे, खिलौने, मिठाईयां व अति जरूरतमंद लोगों के लिए सर्दी का समान जैसे स्वेटर-मफलर, सॉक्स, कंबल, रजाई आदि वितरित करते हैं और उनके चेहरे पर मुस्कान लाते हैं।

हर धर्म के सभी त्योहारों को Dera Sacha Sauda में एक भव्य और हर्षित तरीके से मनाया जाता है। “हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई” ’के नारे लगाना बहुत आसान है, लेकिन वास्तविकता को Dera Sacha Sauda में देखा जा सकता है, जहां सभी धर्मों के लोग सभी त्योहारों को समान रूप से मनाते हैं।

करोड़ों लोगों के प्रेरणास्रोत:-

डेरा सच्चा सौदा आध्यात्मिकता का सच्चा केंद्र है जहां सभी धर्मों के लोग आते हैं और Dera Sacha Sauda के प्रमुख पूजनीय गुरु Saint Dr. Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan हैं जिनकी पवित्र प्रेरणा से Dera Sacha Sauda के 6.5 करोड़ अनुयायी 134 मानवता भलाई के कार्य करते हैं और ज़रूरतमंद लोगों की मदद करने के लिए 24/7 तैयार रहते हैं और हर खुशी के अवसर पर बुराइयां छोड़ अच्छाइयों को अपनाते हैं व नेकी भलाई के कार्य करने का प्रण लेते हैं।

निष्कर्ष:-

क्रिसमस के इस पवित्र दिवस पर अपने आसपास गरीब और ज़रूरतमंद लोगों की मदद करें व उनके चेहरे पर मुस्कान लाएं तथा बुराइयां छोड़कर अच्छाई व सच्चाई पर चलने का प्रण करें।

Design a site like this with WordPress.com
Get started