किसान करे दिन रात प्रयोजन, तब मिले देश को हर दिन भोजन!!

हमारे भारत देश की पहचान लहलहाती फसलों से होती है। वह देश जहाँ अलग-अलग मोड़ पर अलग अलग स्वाद मिलते है। आपकी थाली मे पहुंचने वाला अन्न का एक-एक दाना उन अन्नदाताओ के जरिये आता है, जिन्हे हम किसान कहते है। भारत को एक कृषि प्रधान देश कहा जाता है। जहाँ अधिकतर लोग खेती का काम करते है और फसलों के जरिये मिट्टी से सोना निकालते है।

किसान दिवस कब और क्यों मनाया जाता है :-

हर दिन हमें खाने का निवाला देने वाला किसानों के लिए देश में 23 दिसंबर को किसान दिवस मनाया जाता है। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह जिन्हें किसानों का मसीहा कहा जाता था। उनके जन्मदिन पर को किसान दिवस के रुप में मनाया जाता है। चौधरी चरण सिंह भारत के पांचवे प्रधानमंत्री थे। खुद एक किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले चरण सिंह के कार्यकाल में किसानों को मदद देने वाली कई योजनाएं शुरू की गई। इन योजनाओं के जरिए देश में किसानों की हालत में बदलाव लाने की भी कोशिश हुई।

इसी कारण से चौधरी चरण सिंह जी के जन्मदिन को किसान दिवस के तौर पर मनाने की परम्परा भी शुरू हुई। भारतीय किसानों के लिए चौधरी जी ने केवल योजनाएं ही नहीं बल्कि ऐसी किताबे भी लिखी, जो कि देश मे किसानों की समस्याओ और उनके हालतो के बारे में जानकारी देती थी। उन कई प्रमुख किताबों में से ऑब्लिशन और जमींदारी, Legend Propertiship शामिल है।

वर्तमान समय में किसानों की स्थिति :-

भारत मे किसानों की हालत किसी से छुपी हुई नहीं है। कभी ज्यादा बारिश की मार, तो कभी सूखे से परेशान होने वाले किसान ही होते है। किसान जीवन भर मिट्‌टी से सोना उत्पन्न करने की तपस्या करता रहता है। वह तपती धूप, कड़ाके की ठंड तथा मूसलाधार बारिश भी उसकी इस साधना को तोड़ नहीं पाते। हमारे देश की लगभग 70% आबादी आज भी गांवों में ही निवास करती है। क्योंकि उनका मुख्य व्यवसाय कृषि है। ऐसे में किसान दिवस के मौके पर हमें ध्यान देना चाहिए कि अन्नदाता आज किस तरीके से हम तक अनाज पहुँचा रहा है।

किसानों की मदद में योगदान :

इसके अलावा यह ध्यान देने योग्य है कि डेरा सच्चा सौदा अब कृषि के लिए एक प्रमुख प्रायोगिक आधार बन गया है। डेरा सच्चा सौदा, सभी धर्मों का संगम है। जहाँ पर किसानो की हालत को देखते हुए हर वर्ष किसान मेला आयोजित किया जाता है। कृषि और नई प्रौद्योगिकी मेला (किसान मेला) 24 मार्च 2014 से शुरू हुआ था तथा इस मेले का मुख्य उद्देश्य किसानों को खाद और बीज विकास के लिए नवीनतम तकनीकी तकनीक प्रदान करना है।

हर साल इस मेलें में हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और अन्य राज्यों के किसान आकर में भाग लेते है और खेती के नवीनतम तरीकों को सीखते है। मेले में किसानों को खेती की नई तकनीकों, उच्च उपज प्रदान करने वाले बीज और खाद से लाभान्वित किया जाता है।
क्योंकी कृषि में सबसे बड़ी समस्या आने वाली कार्य लागत, जो दिनों-दिन बढ़ती चली जा रही है। जिसमें किसानों को अच्छे बीज खरीदने पड़ते है, जो बहुत ही ऊंचे दामों में मिलते हैं।

पूज्य गुरु जी द्वारा किसानों को दिए गए कुछ सुझाव :-

डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां जी के पावन पवित्र निर्देशों के तहत रेतीले व रेगिस्तान जैसी भूमि पर विभिन्न प्रकार के फल, दवाएँ और अन्य फसलें उगाई जा रही हैं। डेरा सच्चा सौदा में जैविक उर्वरकों और वर्मीकम्पोस्ट का उपयोग करके जैविक खेती की जाती है।

हरियाणा एक ऐसा राज्य है जहां कभी भी केसर की पैदावार नहीं हुई, लेकिन पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की बताई गई टिप्स को अपनाते हुए लोगों ने वहां की मिट्टी को उपजाऊ बनाकर खेती शुरू कर दी और देखते ही देखते कुछ ही समय में केसर के पौधे उगने लगे। जहां लोगों के लिए केसर की खेती सोचना भी मुश्किल था, वहीं हरियाणा के लोगों ने गुरुजी की टिप्स को अपनाते हुए केसर की खेती कर दिखाई। पूज्य गुरु जी द्वारा बनाई गई फिल्म जट्टू इंजीनियर में भी इसका एक दृश्य है। जहां गुरु जी ने स्वयं केसर की पैदावार कर रहे हैं और कुछ ही समय में केसर की फसलें लहलहाती नजर आ रहीं हैं।

Free Agriculture Education For Farmers :-

डेरा सच्चा सौदा में प्रत्येक वर्ष किसान मेलों का आयोजन किया जाता है। जिसमें देश के कोने-कोने से लाखों की संख्या मे किसान आते है। यहां पर कृषि करने के आधुनिक ढंगो की जानकारी, तकनीक व उत्तम बीजों के साथ-साथ अन्य बहुत सी जानकारियां दी जाती है।

अन्न दाता बचाओ मुहीम के तहत किसानों को जागरूक करने एवं कृषि संबधी उनकी मुश्किलो के समाधान के लिए डेरा सच्चा सौदा की ओर से कृषि कैंप में कृषि विशेषज्ञ की पूरी टीम भी किसानों का हर तरह से मार्गदर्शन करती है।

यहां किन्नू की उत्तम खेती के लिए राज्य सरकार द्वारा पुरस्कार दिया गया है। वहीं वैनिला की खेती के लिए केंद्र सरकार से सम्मान मिला है।

किसान मेलों से ज्ञान प्राप्त कर देश के हज़ारो किसानों ने अपनी कृषि आदतों को बदला है और अधिक पैदावार लेने के साथ-साथ जमीन की उपजाऊ शक्ति भी बढ़ाई है।

किसान मेलो मे पानी की बचत सम्बन्धी तकनीक के साथ कम खर्च मे ज्यादा पैदावार की भी जानकारी दी जाती है।

पानी की बचत सम्बन्धी तकनीक गुरूजी द्वारा खुद इजाद की गई है। इस तकनीक के सहारे किसान थोड़े पानी को ही पुनः उपयोग कर कई फसलों के लिए उपयोग कर सकता है। वहीं ड्रिप इरीगेशन सिस्टम का भी बेहतर नमूना इन मेलों मे पेश किया जाता है।

इसके अतिरिक्त किसानों को आत्महत्या से रोकने के लिए भी डेरा सच्चा सौदा का प्रयास जारी है। क्योंकि जब किसान के पास उनकी सोच के मुताबिक फसल नहीं हो पाती है। तो वह आत्महत्या करने की सोच लेता हैं। जो की सरासर गलत है, इन सब बातों को देखते हुए ही डेरा किसानो की मदद के लिए आगे आया है।

Water Reuse Technique :

पूज्य गुरू जी द्वारा लोगों को पानी का पुनः उपयोग करने के सुझाव दिए गए। जो इस प्रकार है-

  • पूज्य गुरु जी फरमाते है कि फसलों को जरूरत से ज्यादा पानी नहीं डालना चाहिए।
  • पूज्य गुरु जी फरमाते है कि किसानों को ऐसी फसले उगानी चाहिए, जिनकी सिंचाई मे कम पानी की आवश्यकता होती है तथा उपज ज्यादा होती है।
  • सिंचाई के लिए ड्रिप सिस्टम या फव्वारे का उपयोग करना चाहिए।
  • वर्षा जल का संचयन करना चाहिए।

किसानों के लिए फसल स्टोर करने व बर्बाद होने से बचाने के टिप्स :-

  • अंडर ग्राउंड स्टोरेज का निर्माण करके, जो कि पुराने समय में इस्तेमाल किये जाते थे, इससे जगह भी बचती है।
  • ऊंचे स्थानों को इस तरह से बनाकर कि वहाँ हवा व पानी अंदर न पहुंचे।
  • नीम के पेड़ के पत्तों को फसल के साथ डालकर रख सकते है।

Conclusion :-

जिस प्रकार डेरा सच्चा सौदा ने किसानों के लिए कदम उठाया हुआ है, ठीक उसी प्रकार हमें भी उनका साथ देना चाहिए। आइए, एकजुट होकर किसानों की मदद करें। किसानों के बिना, हम अपने अस्तित्व की कल्पना भी नहीं कर सकते। क्योंकि केवल वही हैं, जो हमें भोजन प्रदान करने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ देते हैं।

शारीरिक रूप से विकलांग लोगों को समर्पित एक अभियान

आज हम बात कर रहे हैं, समाज के एक ऐसे वर्ग कि जिसे हमारा समाज विकलांग, अपाहिज आदि तरह-तरह के नाम देता है। शारीरिक रूप से अक्षम, अपंग व अंगहीन लोगों को ही विकलांग कहा जाता है। हमारे समाज में विकलांग लोगों को घृणा की दृष्टि से देखा जाता है। उनका मजाक बनाया जाता है। यहां तक कि लोग उनके पास भी बैठना पसंद नहीं करते, अगर वह पास आकर बैठ जाते हैं तो लोग वहां से खड़े होकर चले जाते हैं और ना ही उनकी मदद करना पसंद करते हैं जो कि बहुत गलत है।

दिव्यांगों के प्रति सहानुभूति-

भारत मे ढाई करोड़ से ज्यादा लोग विकलांगता की समस्या से जूझ रहे हैं। उन लोगों के लिए जो न्यूनतम आवश्यक सुविधाएं सार्वजानिक जगहों पर होनी चाहिए, उसका अभाव लगभग सभी शहरों में है, अस्पताल, शिक्षा संस्थान, पुलिस स्टेशन जैसी जगहों पर भी उनके लिए टॉयलेट या व्हील चेयर नहीं हैं।

दिव्यांगों के प्रति लोगों के व्यवहार में बदलाव लाने के लिए व उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए हर साल 3 दिसंबर को “विश्व दिव्यांग दिवस” मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने के लिए बहुत से लोग सहानुभूति दिखाते हैं। लेकिन सच्चे दिल से उनकी कोई भी मदद नहीं करता। जिसकी उन्हें सबसे ज्यादा जरूरत होती है। दिव्यांग लोग सहानुभूति नहीं बल्कि लोगों से मदद व प्यार का व्यवहार चाहते हैं। वह चाहते हैं कि उन्हें भी आम लोगों की तरह ही देखा जाए ना कि उनका मजाक बनाया जाए या फिर उन्हें देखकर वहां से चले जाएं।

साथी मुहिम: शारीरिक रूप से विकलांग लोगों को समर्पित एक अभियान:-

शारीरिक रूप से अक्षम लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए और उनमें आत्मविश्वास भरने के लिए Dera Sacha Sauda के पूजनीय गुरु Saint Dr. Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan द्वारा “साथी मुहिम” चलाई गयी है। शारीरिक रूप से अक्षम लोगों के जीवन को आसान बनाने के लिए साथी मुहिम के तहत उन्हें आवश्यक उपकरण जैसे – व्हीलचेयर, कृत्रिम अंग आदि निःशुल्क प्रदान किए जाते हैं।

भेदभाव और दूसरों पर निर्भरता से जूझ रहे शारीरिक रूप से अक्षम लोगों की दुर्दशा देखकर Dera Sacha Sauda के सेवादार निःशुल्क आवश्यक उपकरण प्रदान कर उन्हें एक स्वतंत्र जीवन जीने के लिए समर्थन देते हैं।
दिव्यांग लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए Dera Sacha Sauda के सेवादार उन्हें हर सम्भव सहायता प्रदान करते हैं।

हजारों दिव्यांग लोगों के दुःख को दूर करना: साथी मुहिम का अहम उद्देश्य

साथी मुहिम का मकसद शारीरिक रूप से विकलांग लोगों की समस्याओं के लिए स्थाई आजीवन समाधान प्रदान करना है।

  • इस मुहिम के तहत दिव्यांग लोगों को मुफ्त में व्हीलचेयर प्रदान की जाती है, ताकि उन को आजीवन का सहारा (साथी) मिल सके।
  • इस मुहिम के तहत विकलांग लोगों को कृत्रिम अंग भी लगाए जाते हैं।

अब तक हज़ारों लोगों को मिला ‘साथी मुहिम’ का लाभ:-

डेरा सच्चा सौदा के सेवादार नियमित रूप से साल के विशेष दिनों को निःशुल्क कैलिपर्स, व्हीलचेयर और अन्य उपकरण दिव्यांग लोगों को प्रदान करके मनाते हैं । पूज्य गुरु संत डॉ Gurmeet Ram Rahim सिंह जी इन्सां द्वारा चलाई गई ‘साथी मुहिम’ यानी Companion Indeed का अब तक हजारों लोग फायदा उठा चुके हैं ।

Source of inspiration for millions:

हर अच्छे नेक कार्य करने के पीछे किसी न किसी की प्रेरणा छुपी होती है और Dera Sacha Sauda के 6.5 करोड़ अनुयायियों द्वारा दिव्यांग लोगों की मदद करना, रक्तदान, पौधारोपण, मरणोपरांत शरीर दान करना आदि 134 मानवता भलाई के कार्य अपने पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणा से किए जाते हैं । धन्य है Saint Dr. MSG जिन्होंने करोड़ों लोगो में निःस्वार्थ सेवा करने का जज्बा पैदा किया व मरती हुई इंसानियत को जिंदा किया।

Conclusion:-

किसी भी इंसान को दिव्यांग लोगों को घृणा की दृष्टि से नहीं देखना चाहिए और ना ही उनका मजाक बनाना चाहिए। दिव्यांग लोगों की मदद करना हम सब का कर्तव्य है।

शाकाहार को अपनाएं, जीवन स्वस्थ बनाएं

धरती पर उपस्थित हर जीव के लिए भूख स्वाभाविक इच्छा है। यह हमारी योजना का परिणाम नहीं है,भोजन बिना शरीर नहीं चलता! जैसे इस विश्व मे हर चीज अनेक और विविध है ठीक उसी प्रकार भोजन भी विविध है उसके भी अनेक प्रकार है! भोजन मे अनेक पोषक तत्व होते है जो शरीर का विकास करते है उसे स्वस्थ रखते है और शक्ति प्रदान करते है। यह हमारी जीवन रूपी गाड़ी का ईंधन है, इस ईंधन के दो प्रकार है – एक शाकाहार और एक मांसाहार!

Vegetarian Food :-

दूध, फल सब्जी, अनाज, बादाम आदि बीज सहित वनस्पति आधारित भोजन को शाकाहार मे शामिल किया जाता है!

Non-veg food-

पशुओं के मांस, शिकार मांस, मुर्गा-मुर्गीयों, मछली आदि मांसाहार मे शामिल किया जाता है!

कोई व्यक्ति किस तरह का भोजन करना चाहता है यह उसकी पंसद नापसंद पर निर्भर करता है! विशेषज्ञो की राय के अनुसार शाकाहार न केवल आपके मन मस्तिष्क को स्वस्थ रखता है। बल्कि कई बीमारियों से लड़ने में भी अहम भूमिका निभाता है! मानव शरीर के कार्य करने के लिए ऐसा कोई पोष्टिक तत्व नहीं है जो वनस्पतियों से प्राप्त नहीं किया जा सकता हो!

वैज्ञानिको के अनुसार हमारे पाचन तंत्रो की बनावट शाकाहार के अनुकूल है! वही दूसरी ओर हमारे वेद, गीता, पुराण, कुरान और दूसरे धर्म ग्रंथो मे हमें दूसरे जीवो के प्रति करुणा दया का भाव रखने की सलाह दी गई है!
25 नवंबर 1986 को अंतराष्ट्रीय मांसाहार रहित दिवस के रूप मे प्रस्तावित किया गया था! इस दिवस को मनाने का केवल एक यह उद्देश्य है कि जानवरो के प्रति हिंसा के बर्ताव के प्रति संवेदनशीलता लाना! तथा लोगो को शाकाहार की ओर ले जाना जिससे एक बेहतर समाज का निर्माण हो सके |

शाकाहारी भोजन भी स्वादिष्ट है :-

आज के समय में लोग मांसाहार के पीछे इतना पागल हो चुके हैं कि वह शाकाहारी भोजन का स्वाद भूल चुके हैं वह भूल चुके हैं कि शाकाहारी भोजन में कितने प्रोटीन तत्व होते हैं जो हमारे शरीर को स्वस्थ रखते हैं और एनर्जी से भरपूर रखते हैं शाकाहारी भोजन खाने में जितना स्वादिष्ट होता है पाचन में भी उतनी ही आसानी होती है |

शाकाहारी भोजन मानव शरीर के लिए वरदान है :-

शाकाहारी भोजन भगवान द्वारा प्रदान किया गया हमारे शरीर के लिए वरदान है भगवान ने हमारा शरीर इस तरह से बनाया है कि शाकाहारी भोजन हमारे शरीर के लिए अमृत के समान है और शाकाहारी भोजन मांसाहारी की तुलना में आसानी से डाइजेस्ट हो जाता है और शाकाहारी भोजन में मौजूद प्रोटीन विटामिन जैसे पोषक तत्व हमारे शरीर को एनर्जी प्रदान करते हैं |

मांसाहारी के साथ रोग हो सकता है:-

डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि मांसाहार को पूर्णतया डाइजेस्ट होने में ज्यादा समय लगता है क्योंकि उनकी बहुत लम्बी आंत होती है और यह मांस जितनी देर आंत‌डियो में रहता है उससे बैक्टीरिया वायरस पैदा हो जाते हैं जो बहुत सी बीमारियों का कारण बनते हैं डॉक्टर ने भी यह मानना है कि जो मांस अंडा खाते हैं उनके अंदर 99. 9% आंत के कैंसर की संभावना बढ़ जाती है इतना ही नहीं मांसाहार इंसान में राक्षसी प्रवृत्ति को पैदा कर देता है साथ ही दिमाग में उत्तेजना आती है जिससे बात बात पर गुस्सा आने लगता है और बेरहमी की भावना हमारे दिमाग में घर कर जाती है और इंसान चिड़चिड़ा हो जाता है डब्ल्यूएचओ की एक रिपोर्ट के अनुसार मांसाहार का सेवन करना हमारे शरीर के लिए उतना ही खतरनाक है जितना धूम्रपान का असर |

शाकाहारी भोजन :-

पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सब्जियों में प्रोटीन, कार्बोहाईड्रेट और वसा के साथ-साथ और भी बहुत से आवश्यक तत्व होते हैं। जो कैंसर जैसी घातक बीमारियों के बचाव में सहायक होते हैं।
शाकाहारी भोजन में फायबर (रेशायुक्त)भी अधिक मात्रा में होते हैं जो पाचन क्रिया में सहायक होते हैं।
फेफड़ो का कैंसर शाकाहार मे कम होता है शाकाहारियों मे B.P हाई की समस्या मांसाहारियों से कम होती है!
हालाँकि शाकाहारी भोजन में विटामिन B12 कम मात्रा में मिल पाता है, लेकिन शाकाहारी लोगों में इसकी कमी होने के कोई सबूत नहीं है!
इससे यह पता चलता है कि हमारे शरीर में विटामिन B12 बहुत ही कम मात्रा में चाहिए ।
ऐसा कहा जाता है कि शाकाहारी भोजन, सही मात्रा में कैलोरीज नहीं प्रदान करता लेकिन यह सही नहीं है। अगर शाकाहारी भोजन में सभी जरूरी पदार्थ शामिल हों तो सही मात्रा में कैलोरीज भी मिल जाती हैं।

पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी। इन्सां है शाकाहारी भोजन में प्रोटीन तत्व की मात्रा अधिक बताई है जबकि मांसाहारी में इतने प्रोटीन तत्व नहीं होते आइए जानते हैं शाकाहारी व मांसाहारी में प्रोटीन तत्व

Proteins percentage Veg vs Non-veg :

शाकाहारी भोजन प्रोटीन स्रोत-

चना दाल: 24-30%

दाल: 24-30%

मूंग दाल: 24-30%

मूंगफली: 24-30%

सोयाबीन और चना: 42-45%

मांसाहारी प्रोटीन स्रोत:

अंडे: 11-12%

मांस: 22-25%

आंकड़ों के हिसाब से सोयाबीन मे अंडे से 3 गुना ज्यादा प्रोटीन है और मांस से लगभग दुगुना है तो शाकाहारी चीज़ो मे बहुत शक्ति होती है!

सोयाबीन मे लगभग 42 से 45% प्रोटीन है जो कि अंडे से 3 गुना ज्यादा है और मांस से लगभग दुगुना है |

जीभा के क्षणिक स्वाद के लिए पशु बली भयानक अपराध :-

धर्म कभी भी निर्दोष प्राणियों का बलिदान करने के लिए नहीं कहते है। आज के समय में भी बहुत से लोग जीवों की बलि दे देते है। वह कहते है कि हमारे धर्मों में बलि देना लिखा है, लेकिन पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि किसी भी धर्म या ग्रंथ में जीव की बलि देना नहीं लिखा यह सब इंसान की बनाई हुई मनगढ़ंत बातें हैं जो इंसान को नहीं करनी चाहिए। बल्कि अपने स्वाद के लिए लोग बेकसूर जीवो की बलि दे देते हैं पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसान हैं जीवो के प्रति स्नेह और प्यार का भाव दिखाते हुए सत्संग और फिल्मों के माध्यम से दिखाया है कि किसी भी पशु पक्षी की बलि नहीं देनी चाहिए और हमें उनके प्रति प्यार व स्नेहा का भाव रखना चाहिए कोई भी सच्चा गुरु कभी भी किसी जीव की बलि के लिए नहीं कहेगा अगर कोई कहता है तो मतलब वह सरासर पाखंड है और ऐसे पाखंडी लोगों से दूर रहना चाहिए।

वह संस्था जिसने शाकाहार के लिए लोगों को जागरूक किया :-

शाकाहार का समर्थन करने वाले दुनिया में अनेको संगठन हैं। इन्हीं में से एक संस्था हरियाणा के सिरसा में स्थित डेरा सच्चा सौदा है जिसने शाकाहारी आहार का सेवन करने के लिए लोगों को जागरूक किया। पूज्य गुरु संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की प्रेरणा पर चलते हुए लाखों लोगों ने मांसाहारी भोजन छोड़ दिया और शाकाहारी बन गए है।

Millions shun the Non-veg :-

आज के समय में करोड़ों लोग अपनी अंतिम सांस तक शाकाहारी भोजन ग्रहण करने का प्रण ले चुके है। कुछ लोग यह कहते है कि मांसाहारी आहार में ज्यादा ताकत होती है इसलिए वे लोग मांसाहार का सेवन करते हैं। लेकिन पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि एक हाथी में शेर से भी ज्यादा ताकत होती है, जबकि हाथी घास फूस खाता है और सब जीवों को उठाकर पटक देता है, इतनी ताकत होती है। वहीं दूसरी ओर मांसाहार का सेवन करने वाला शेर भी हाथी के सामने कमजोर पड़ जाता है। इसलिए यह बात सरासर झूठ है कि मांसाहार में शाकाहार से ज्यादा ताकत होती है। बल्कि शाकाहारी भोजन में मांसाहार की तुलना में ज्यादा प्रोटीन होते हैं और पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणा पर चलते हुए डेरा सच्चा सौदा के करोड़ों अनुयायियों ने कभी भी मांसाहार का सेवन न करने का प्रण लिया।

Inspiration source for millions :-

डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां द्वारा सत्संग, संगीत और फिल्मो के माध्यम से लोगों को मांसाहार छोड़ने के लिए जागरुक किया है व इसके द्वारा होने वाले नुकसान से लोगों को अवगत कराया है। पर्यावरणीय स्थिरता को प्राप्त करने के लिए शाकाहारी आहार को अपनाना एक महत्वपूर्ण साधन है। पूज्य गुरू संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह इन्सां जी की पावन शिक्षा से आज करोड़ों लोग मांसाहार का त्याग कर शाकाहार को अपने जीवन में अपना चुके हैं व अपने आस-पास के लोगों को भी इसके लिए जागरूक कर रहे हैं।

निष्कर्ष:-

शाकाहारी आहार अधिक सुंदर और विविध हैं। जो हमें रसोई में अधिक रचनात्मक होने के लिए प्रेरित करते हैं। क्योंकि शाकाहारी भोजन से स्वास्थ्य लाभ साबित होता है। इससे जानवरों के जीवन को बचाया जा सकता है और पृथ्वी के संरक्षण में भी मदद मिलती है। इसलिए आओ हम सभी शाकाहार को अपनाये।

पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए प्लास्टिक का त्याग कर, कपड़े व जूट के बने बैग का करें इस्तेमाल

आजकल की इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में लोग इतना व्यस्त है कि अपनी सुविधा के अनुसार हर क्षेत्र में तरक्की करते जा रहे है। इस भागदौड़ में इंसान यह भूल जाता है की जिस क्षेत्र में वह सफल हो रहे उस से क्या फायदे है और क्या नुकसान है। आपको बता दें आज के लोग प्लास्टिक के बने समान का अधिक इस्तेमाल करते है, जो आमतौर पर सस्ता और दिखने में सुंदर लगता है। लेकिन इसके बहुत से नुकसान है। आपको बता दे प्लास्टिक पर्यावरण प्रदूषण के बड़े कारणों में से एक हैं। पॉलीथीन व प्लास्टिक एक ऐसी वस्तु है जिसे हम नष्ट नही कर सकते।

प्लास्टिक लगभग 100 वर्ष तक नष्ट नही होता-

छोटे-छोटे गांवों से लेकर महानगरों तक आज पॉलिथीन अपना दुष्प्रभाव फैला रहा है। पॉलिथीन एंव प्लास्टिक के कचरे को नष्ट करना सरकार के लिए एक चुनौतीपूर्ण कार्य बनकर खड़ा हो गया है। प्लास्टिक/ पॉलिथीन हर जगह अपना कहर ढा रही है और यह सब प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग की वजह से हो रहा है। प्लास्टिक व पॉलीथिन को अगर हम मिट्टी में या पौधों के आसपास दबा देते हैं तो वह पौधों को नष्ट कर देती है और प्लास्टिक पॉलीथिन को जलाने से जो प्रदूषण होता है, वह हमारी सेहत के लिए बहुत हानिकारक होता है। उससे हमें सांस लेने में भी दिक्कत आ सकती है इसलिए प्लास्टिक व पॉलीथिन एक ऐसी वस्तु है जिस को 100 वर्ष तक नष्ट नहीं किया जा सकता। इसलिए हम सभी को प्लास्टिक से बने सामान का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

पुरातन समय से ही हमारी संस्कृति, कपड़े के बैग का इस्तेमाल करना :-

पुरातन समय में प्लास्टिक पॉलीथिन का उपयोग नहीं होता था। हमारी भारतीय संस्कृति में कपड़े के बने बैग/थैला का प्रयोग किया जाता था। कोई भी महिला या पुरुष घर से बाहर जाते थे, तो घर का ही बनाया हुआ बैग/थैला लेकर जाते थे और उसमें ही अपना राशन या अन्य सामान लेकर आते थे। लेकिन आज लोग समय के बदलाव के साथ लोग पश्चिमी सभ्यता को अपनाकर अपनी भारतीय संस्कृति को भूलते जा रहे हैं कपड़े में जूट के बैग की जगह आजकल प्लास्टिक के बैग का इस्तेमाल करने लगे हैं जो बहुत ही नुकसानदायक है।

Hazards of plastic use-

प्लास्टिक के बने सामान का इस्तेमाल करने के बहुत से नुकसान है। प्लास्टिक का इस्तेमाल करने से जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण और भूमि प्रदूषण होता है। इसके साथ ही बहुत से नुकसान होते है जो इस प्रकार है-

प्लास्टिक व पॉलीथिन जीव जंतुओं के लिए नुकसानदायक :-

प्लास्टिक व पॉलीथिन का कभी भी इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि प्लास्टिक का उपयोग करने के बाद हम उसे फेंक देते हैं और वह प्लास्टिक कोई जीव-जंतु या फिर पशु खा लेते है। अगर पशु उस पॉलीथिन को खा लेते है, तो वह उसकी आंत में फंस जाता है। जिससे उनकी मृत्यु हो जाती है। एक तरफ तो हम नारा देते हैं कि गाय हमारी माता है और दूसरी तरफ हम खुद ही उनकी मृत्यु का कारण बन रहे हैं। अगर प्लास्टिक पॉलीथिन को हम मिट्टी में दबा देते हैं, तो यह इतनी खतरनाक होती है कि मिट्टी में यह वैसे की वैसे ही रहती है व गलती नहीं है और हमारे वातावरण को प्रदूषित करती रहती है। प्लास्टिक अलग-अलग एरिया को प्रभावित करती है जोकि इस धरती पर रहने वाले प्राणी व जीव जंतु के लिए बहुत खतरनाक साबित हो सकती है |

प्लास्टिक पॉलीथिन का पेड़ पौधों और मिट्टी पर प्रभाव :

अगर हम पॉलीथिन का उपयोग करके उसे फेंक देते हैं और वह पॉलिथीन वहां पर लगे हुए किसी पौधे की जड़ में आ जाए तो उसे नष्ट कर देती है। इतना ही नहीं खेतों में पॉलिथीन के रहने से पौधे की जड़ जमीन के अंदर तक नहीं जा सकती। जिससे मिट्टी के कणों के अंदर हवा नहीं जा सकती। प्लास्टिक पॉलीथिन गलती नहीं है, बल्कि अपना विषैला तत्व जमीन में छोड़ देती है। जो कि हमारे जमीनी मिट्टी और पेड़ पौधों को प्रभावित करते रहते हैं व इसके कारण भूमि प्रदूषण होता है।

प्लास्टिक व पॉलीथिन बनता है वायु और जल प्रदूषण का कारण :-

प्लास्टिक/पॉलीथिन व प्लास्टिक से बने उत्पाद अगर हम खुले में जला देते हैं। तो यह वायु प्रदूषण का कारण बनता है। वहीं अगर प्लास्टिक व पॉलिथीन नाली व पानी में चला जाता है तो यह जल को प्रदूषित करता है। इसके साथ ही प्लास्टिक व पॉलीथिन के खतरनाक कैमिकल पानी में घुल जाते हैं, अगर इस में आग लगा दी जाती है तो वह महीनों तक हमारे वातावरण को प्रदूषित करती रहती है |

Avoid plastic and polythene:-

प्लास्टिक व पॉलीथिन से बचाव करना है, तो इसके लिए जरूरी है प्लास्टिक पॉलीथिन व प्लास्टिक से बनी हुई चीजों का उपयोग बंद कर देना और हमारे वातावरण को हरा-भरा व स्वच्छ रखने के लिए ज्यादा से ज्यादा पेड़ पौधे लगाना
डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सा की पावन प्रेरणा पर चलते हुए डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी हर त्यौहार को, जन्मदिवस को tree plantation करके मनाते हैं। ताकि हमारी मदरलैंड स्वच्छ रहे इतना ही नहीं बल्कि वह बच्चे की तरह उस पौधे का पालन पोषण करते हैं और समय-समय पर पानी देते रहते हैं। हमारे आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखने के लिए जितने ज्यादा हो सके पेड़ पौधे लगाने चाहिए और प्लास्टिक पॉलीथिन का यूज़ बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। यह हमारी धरती के लिए बहुत नुकसानदायक है। यह केवल हमारी धरती के लिए ही नहीं बल्कि इस धरती पर रह रहे प्राणी जीव जंतु सभी के लिए हानिकारक है।

Millions have taken pledge to shun the plastic bags-

आपकों बता दे आज के समय में करोड़ों लोग प्लास्टिक व प्लास्टिक से बने सामान का त्याग कर चुके हैं व इसके स्थान पर कपड़े व जूट के बने थैले का इस्तेमाल करते हैं। पूज्य गुरु जी की पावन प्रेरणा पर चलते हुए डेरा सच्चा सौदा के करोड़ों अनुयायी कभी भी प्लास्टिक व पॉलिथीन का उपयोग ना करने का प्रण लिया और इतना ही नहीं लोगों को भी इसके बारे में जागरूक किया की प्लास्टिक पॉलीथिन हमारे एनवायरमेंट के लिए कितनी हानिकारक है और सबसे ज्यादा पॉल्यूशन इसी की वजह से होता है। इसलिए हमारा फर्ज बनता है कि हमें हमारी धरती माता को बचाने के लिए प्लास्टिक पॉलीथिन व प्लास्टिक से बनी हुई चीजों का उपयोग बंद कर देना चाहिए। प्लास्टिक से हमारी धरती माता की रक्षा करने के लिए हम सभी को एकजुट होकर कार्य करना होगा।

Source of Inspiration for millions :-

पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणा पर चलते हुए डेरा सच्चा सौदा के करोड़ों अनुयायियों ने प्लास्टिक व पॉलीथिन का प्रयोग कभी ना करने का प्रण लिया है और साथ ही दूसरे लोगों को भी जागरुक किया है ताकि वह भी प्लास्टिक पॉलीथिन का प्रयोग न करके जूट या कपड़े से बने बैग उपयोग करें।

निष्कर्ष :-

आज हम भी यह प्रण लें कि पॉलीथीन/प्लास्टिक का उपयोग पूर्ण रूप से बंद करके अनजाने में होने वाले महापाप नहीं करेंगे व कपड़े और जूट के बने बैग का इस्तेमाल करेंगे।

परमपिता Shah Satnam Singh Ji Maharaj की पावन स्मृति में लगाया गया ‘याद-ए-मुर्शिद’ मेगा फ्री आई कैम्प, सैकड़ों अंधेरी जिंदगियों को कर रहा रोशन

पूज्य परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज का जन्म 25 जनवरी 1919 को गांव श्री जलालआणा साहेब, तहसील- कालावाली ( सिरसा) में पूज्य पिता सरदार वरियाम सिंह जी व पूज्य माता आस कौर जी के घर हुआ था, पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज ने जात-पात का भेदभाव मिटाकर हमेशा सब को एक जगह बिठाया है और मेहनत करके इंसानियत के राह पर चलने की प्रेरणा दी है। गुरु जी की पावन प्रेरणा पर चलते हुए करोड़ों लोग खुशहाली से अपना जीवन यापन कर रहे हैं |

Yaad-E-Murshid Free Eye camp-

‘याद-ए-मुर्शिद’ Free Eye Camp का आयोजन डेरा सच्चा सौदा में हर साल परमपिता शाह सतनाम सिंह महाराज जी की पावन स्मृति में 12- 15 दिसम्बर तक किया जाता है। परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज डेरा सच्चा सौदा के दूसरे अध्यात्मिक गुरु है। इस बार यह 29वां ‘याद-ए-मुर्शीद’ निःशुल्क नेत्र जांच शिविर है। इस से पहले 28 कैंप सफलतापूर्वक आयोजित हो चुके हैं |

याद-ए-मुर्शिद” Free Eye Camp की शुरूआत:-

कैम्प की शुरूआत वर्ष 1992 में डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख Saint Dr. Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan द्वारा की गई। पूज्य गुरु जी की पावन प्रेरणा से Dera Sacha Sauda की दूसरी पातशाही परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए , उनकी पुण्य स्मृति में सन 1992 से 12-15 दिसम्बर को हर साल “शाह सतनाम जी धाम” डेरा सच्चा सौदा (सिरसा) में यह कैम्प लगाया जाता है |

Shah Satnam Ji Research and development foundation के तत्वाधान में अंधेरी नेत्रहीन जिंदगियों मे उजाला लाने के लिए इस वर्ष 29वां याद-ए-मुर्शिद फ्री आई कैम्प लगाया जा रहा है । जिसका शुभारंभ 12 दिसम्बर 2020 को शाही परिवार, Dera Sacha Sauda की मैनेजमेंट, कैम्प में सेवा मुहैया कराने वाले चिकित्सक, उपस्थित साध संगत व सेवादारों द्वारा ‘धन धन सतगुरु तेरा ही आसरा’ पाक पवित्र नारा लगाकर किया गया।

Glimpses of 29th Mega Free Eye Camp- Day 4

डेरा सच्चा सौदा द्वारा यह कैंप पूर्ण रूप से निःशुल्क लगाया गया है। इस कैंप में खाना-पीना, रहना, चिकित्सा सुविधाएं, दवाएं सब निःशुल्क दी जा रही हैं व विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा ऑपरेशन भी निःशुल्क ही किए जा रहे हैं ।

इस कैंप में जांच कराने के लिए पंजीकरण 10 दिसंबर से शुरू हो गए थे। इस कैम्प में 10 दिसंबर से 12 दिसंबर तक कुल 1477 पंजीकरण हो चुके हैं। जिनमें 861 महिलाएं व 666 पुरुष शामिल है। मेगा फ्री आई कैंप के दूसरे दिन 3131 मरीजों की जांच हुई और 3 मरीजों का काला मोतिया का ऑपरेशन (yAG लेजर pI ) किया गया व 7 मरीजों के मोतियाबिंद के ऑपरेशन किए गए। आपको बता दे इस 12 से 15 दिसबंर के याद-ए-मुर्शिल कैंप मे कुल 5092 लोगों का पंजीकरण हुआ जिसमें 2097 पुरुष व 2995 महिलाएं शामिल है।

महिला पंजीकरण

10/12/2020 = 146

11/12/2020 = 313

12/12/2020 = 352

13/12/2020 = 902

14/12/2020 = 677

15/12/2020 = 605 कुल = 2995

पुरुष पंजीकरण

10/12/2020 = 140

11/12/2020 = 224

12/12/2020 = 302

13/12/2020 = 752

14/12/2020 = 184

15/12/2020 = 495 कुल = 2097

Male Registration : 2097
Female Registration : 2995
Total Registration : 5092

Operations detail-

Cataract Operation (सफेद मोतिया)-

13-15 December 2020:

Male = 23
Female = 23
Total = 46

Glucoma Detail (काला मोतीया)

13-15 December 2020

Male. =04
Female =07
Total =11

आपकी जानकारी के लिए बता दे इस कैंप मे कुल 57 आॅपरेशन हुए जिनमें 46 चयनित मरीजों के सफेद मोतिया और 11 मरीजों के काला मोतिया के ऑपरेशन किए गए | यह सब आॅपरेशन पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणा पर चलते हुए परम पिता शाह सतनाम जी महाराज की पावन स्मृति में किए गए। इससे काफी अंधेरी जिंदगियों में उजाला हुआ व जरूरतमंद मरीजों को याद-ए-मुर्शीद कैंप से बहुत फायदा मिला।

कोविड-19 को ध्यान में रखकर बरती जा रही सावधानियां :-

डेरा सच्चा सौदा में चल रहे ‘याद-ए-मुर्शिद’ फ्री आई कैंप में जांच करवाने आ रहे मरीजों का इलाज कोविड-19 को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। इससे बचाव के लिए सभी सावधानियां बरती जा रही हैं। इलाज के दौरान हॉस्पिटल में आ रहे मरीजों को मास्क पहनना अनिवार्य है। मरीजों को सबसे पहले सैनिटाइज किया जाता है। फिर ही उन्हें हॉस्पिटल में एंट्री दी जाती है। जिस कमरे में मरीज का इलाज होना है, उस पूरे कमरे को सैनिटाइज किया जाता है। अगर वहां पर पहले किसी मरीज का ऑपरेशन हो चुका है। तो कमरे को सैनिटाइज करने के बाद ही दूसरे मरीज को लाया जाता है। सोशल डिस्टेंसिंग का नियमित रूप से ख्याल रखा जाता है। वहां पर मरीज का ख्याल उसके परिवार वाले नहीं बल्कि विशेष रुप से वहां कार्यरत सेवादार रखते हैं। उन सेवादारों का पहले कोविड-19 टेस्ट किया जाता है और कोविड-19 नेगेटिव सेवादार ही वहां कार्यरत है। वहां के मरीजों का कहना है कि सेवादार उन्हें किसी प्रकार की कोई भी कमी नहीं होने देते यहां तक की उनके खाने-पीने का भी विशेष रूप से ध्यान रखते हैं और समय-समय पर उन्हें दवाइयां देते रहते हैं |

मानवता भलाई के कार्य करने के लिए रहते है आगे :-

डेरा सच्चा सौदा एक ऐसी संस्था है, जो 134 मानवता भलाई के कार्य करती है और यह कार्य डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणा पर चलते हुए किए जाते हैं। डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी किसी भी चीज की परवाह किए बिना हमेशा इन कार्यों में अग्रणी रहे हैं। डेरा सच्चा सौदा में पूज्य परम पिता शाह सतनाम जी महाराज के पावन स्मृति में जो मेगा फ्री आई कैंप लगाया गया उसमें भी सेवादारों ने निःस्वार्थ भाव से बढ़ चढ़कर भूमिका निभाई। नेत्र जांच शिविर में आए मरीजों की सेवा करने के लिए यह डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी 24×7 तैयार रहते हैं।

Source of inspiration-

डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणा पर चलते हुए मेगा फ्री आई कैंप का आयोजन किया गया 10 दिसंबर से लेकर 15 दिसंबर तक कुल 5092 मरीजों का रजिस्ट्रेशन कर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों द्वारा उनकी जांच की गई और यह डॉक्टरस देश के कोने-कोने से आए व पूज्य गुरु जी की पावन प्रेरणा पर चलते हुए निःशुल्क जांच करके अपनी सेवाएं दी।

निष्कर्ष :-

हमें खुद को किसी भी नेत्र रोगों से बचाने के लिए समय-समय पर अपनी आंखों की जांच करानी चाहिए और इस मेगा आई फ्री कैंप के दौरान, किसी के जीवन को रोशनी से भरने में अपना योगदान देना चाहिए। अगर आप के आस-पास कोई भी व्यक्ति आंखों की बीमारियों से पीड़ित है और वह महंगा इलाज नहीं करवा सकता है, तो कृपया उन्हें इस मेगा फ्री नेत्र शिविर में ले जाएं, जो सभी के लिए मुफ्त है, हमारी आंखें भगवान की देन है इसलिए हमारा फर्ज बनता है कि हम इनकी देखभाल करें।

अँधेरी जिंदगी में उजाला भर रहा डेरा सच्चा सौदा का Yaad-E-Murshid Free Eye Camp

आंखें हमारे शरीर का बहुत अमूल्य भाग होती है और यह भगवान द्वारा दी गई अनमोल देन है क्योंकि इसके जरिए ही हम खूबसूरत दुनिया को देख सकते हैं खूबसूरत चीजों को देख सकते हैं इसलिए हमारा फर्ज बनता है कि हम रोजाना अपने आँखों की देखभाल करें, सुबह उठकर सबसे पहले ठंडे पानी से अपनी आंखों को धोना चाहिए ताकि आंखें बिल्कुल साफ हो जाए और समय-समय पर डॉक्टर से अपनी आंखों की जांच करवाते रहना चाहिए और आंखों की रोशनी बढ़ाने वाले पदार्थों का सेवन करना चाहिए |

Yaad -E-Murshid Mega Free Eye camp is filling light in the lives of people

यहां आज के समय में कोई किसी को नहीं पूछता वही डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसान जरूरतमंद लोगों के लिए मसीहा साबित हुए है उनकी प्रेरणा पर चलते हुए डेरा सच्चा के अनुयाई मेगा फ्री आई कैम्प जो कि Dera Sacha Sauda में पूजनीय परमपिता Shah Satnam Singh Ji महाराज जी की पावन स्मृति में लगाया गया है जिसमें स्पेशलिस्ट डॉक्टरों द्वारा चेकअप भी शुरू हो गया है। यह सब पूज्य गुरु Saint Dr. Gurmeet Ram Rahim Singh Insan जी की पावन प्रेरणा से किया जा रहा है, इस कैंप से अंधेरी जिंदगियों को उजाला मिला है |

Glimpses of 29th Mega Free Camp Day 2

डेरा सच्चा सौदा की दूसरी पातशाही परमपिता शाह सतनाम सिंह महाराज जी की पावन स्मृति में अब तक 28 मेगा आई फ्री कैंप लगाए जा चुके है और अब 29 वां मेगा आई फ्री कैंप चल रहा है

-कैम्प के पहले दिन तक 1477 मरीज़ों का पंजीकरण हो चुका है और स्पेशलिस्ट डॉक्टरों द्वारा उनका चेकअप भी शुरू हो गया है।

-कैंप के दूसरे दिन 3133 मरीजों को सफलापूर्वक जांच हो गई है |

-3 ज़रूरतमंद मरीज़ों का काला मोतिया का ऑपरेशन (YAG लेज़र PI) किया गया व 7 मरीज़ों के मोतियाबिंद के ऑपरेशन किए गए।

जरूरतमंद लोग जो ईलाज करवाने में आर्थिक रूप से कमजोर थे, क्योंकि मोतियाबिंद के ईलाज का खर्च बहुत ज्यादा होता है l बहुत से गरीब लोग तो आर्थिक स्थिति की वजह से इलाज नहीं करवा पाते, लेकिन आज जरूरतमंद लोगों की यह जरूरत पूरी हो गई और 7 मरीजों के मोतियाबिंद का सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया गया और इनका ऑपरेशन स्पेशलिस्ट डॉक्टर द्वारा किया गया |

डेरा सच्चा सौदा में में लगे फ्री Eye Camp में महामामारी के चलते विशेष रूप से ध्यान रखकर सावधानियां बरती जा रही हैं

वहां इलाज करवाने आ रहे मरीजों का सबसे पहले सैनिटाइजर करवाया जाता है और उन्हें विशेष रूप से मास्क पहने रखने की सलाह दी जाती है । इलाज से पहले पूरे ऑपरेशन थियेटर को और पेशेंट को सेनिटाइज किया जाता है। और फिर उस रोगी का वहां इलाज किया जाता है उसके बाद अगर किसी दूसरे रोगी का ऑपरेशन करना हो तो फिर से उस रूम को सैनिटाइज किया जाता है उसके बाद ही दूसरे मरीज को वहां लाया जाता है और मरीज का ख्याल उनके परिवार वाले नहीं बल्कि डेरा सच्चा सौदा के वह सेवादार रख रहे हैं जिनका पहले कोविड 19 टेस्ट किया जा चुका है और उनकी रिपोर्ट नेगेटिव आई है वह विशेष रूप से मरीजों का ख्याल रख रहे हैं इतना ही नहीं मरीजों का कहना है कि वह सेवादार उनके खाने-पीने व दवाइयों का भी समय समय पर ध्यान रख रहे हैं |

1992 से लगाया रहा है Mega Free Eye Camp at Dera Sacha Sauda , जिसमें हज़ारो लोगों के हो चुकें है मुफ्त ऑपरेशन्स

डेरा सच्चा सौदा मे पूज्य गुरु संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसान जी की पावन प्रेरणा से अंधेरी ज़िन्दगियों मे रोशनी लाने के लिए डेरा सच्चा सौदा के दूसरे आध्यात्मिक गुरु परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज की पावन स्मृति मे 1992 से विशाल नेत्र जांच शिविर का आयोजन किया जाता रहा है।जिसे ‘Yaad E Murshid ’ Free Eye Camp के नाम से जाना जाता हैं। अब तक इस कैम्प मे 27255 लोग अपना आँखों का सफल आपरेशन करवाकर सुखी जीवन जी रहे हैं।लाखों लोग इसमें अपनी आंखों की जांच करवाकर लाभ ले चुके है।

13 दिसंबर तक 3133 लोगों के पंजीकरण हो चुके हैं, जो अभी भी जारी है।

इसमे 1713 महिलाएं और 1418 पुरुषों की संख्या है। 13 दिसंबर आज से स्पेशलिस्ट एवं सुपरस्पेशलिस्ट डॉक्टरों द्वारा आपरेशन किये जा रहे हैं।

7 मोतियाबिन्द के मरीज़ों और 3 काला मोतिया के रोगियों का उपचार और सर्जरी की जा चुकी है, और सफल इलाज के बाद काला मोतिया के तीनों मरीज़ों को डिस्चार्ज भी किया जा चुका है।

29वें ‘यादें ए मुर्शिद’ निशुल्क नेत्र शिविर के दूसरे दिन काला मोतिया के तीन चयनित रोगियों की सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर दवारा फ्री में सफलतापूर्वक सर्जरी की गई 3 काला मोतिया से ग्रस्त रोगियों को आवश्यकता के अनुसार विशेषज्ञ सर्जनो द्वारा आधुनिक ओ.टी. में काला मोतिया के लिए अत्याधिक परिष्कृत लेजर आधारित उपचार किया गया |

Conclusion :-

पूरी दुनिया के लिए निस्वार्थ सेवा का‌ एक अमिट उदाहरण प्रस्तुत करते हुए डेरा सच्चा सौदा के सेवादार मरीजों की अपने परिवार के सदस्यों की तरह हर संभव तरीके से मदद करने के लिए सेवा प्रदान कर रहे हैं l डेरा सच्चा सौदा के सेवादार और पैरामेडिकल स्टाफ द्वारा रोगियों की देखभाल की जा रही है |

भोजन और वस्त्र इंसान की बुनियादी जरूरते है,

लेकिन बहुत से लोग इन जरूरतों को पूरा नहीं कर पातें है l हमारे देश की बहुत आबादी गरीबी रेखा से नीचे है lवह इतना कमा ही नहीं पाते कि रोटी, कपड़े और मकान जैसी भौतिक जरूरतों को पूरा कर सकें l परिणामस्वरूप ऐसे लोग भुखमरी से ग्रस्त है और शरीर को इस सर्दी के मौसम से बचने के लिए इनके पास आवश्यक कपड़े भी नहीं है l

हम सभी भुखमरी से अच्छी तरह परिचित हैं जो हमारे देश को बुरी तरह से प्रभावित कर रही है, बहुत सारे लोग हैं l जो भूखे पेट सोते हैं, कई लोग भूख के कारण मर भी जाते हैं और दूसरी तरफ एक ही समय में, बहुत से लोग बहुत सारे भोजन को बर्बाद करते हैं l यह असंतुलन की एक विडंबना है l जो हमारे देश में व्याप्त है, एक तरफ, एक व्यक्ति को सूखी रोटी नहीं मिल पा रही है, और दूसरी तरफ, दूसरा व्यक्ति सबसे अच्छा भोजन खाने से इंकार कर देता है और उसे फेंक देता है , इस चीज को संतुलित करने की जरूरत है और Food Donation के जरिए यह संभव हो सकता है।

ठिठुरती सर्दी में पहनने के लिए गर्म कपड़े, ओढ़ने के लिए कम्बल, लोई न होने के कारण बहुत से लोगों कि मृत्यु भी हो जाती है l इन जरुरतमंदो लोगों की परेशानी को समझने के लिए आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में किसी के पास समय ही नहीं है l

आज हम आपको बताने जा रहे है कुछ ऐसे लोगों के बारे में जिन्होंने इनकी परेशानी को समझा और निरंतर इनकी परेशानी को खत्म करने का प्रयास कर रहे है l

भारत में एक ऐसी संस्था है जो रोटी और कपड़े के आभाव में जी रहें जरूरतमंद लोगों की समस्याओं को खत्म करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही है :-

भारत में डेरा सच्चा सौदा एक ऐसी संस्था है जो गरीब और जरूरतमंद लोगों के दर्द को समझते हुए 134 मानवता भलाई के कार्य कर रही हैं भूखे लोगों को भूख से तड़पता देख व गरीब लोगों को सर्दी में ठिठुरता देख डेरा सच्चा सौदा द्वारा Food & Cloth Bank की स्थापना की गई l

भूखे को खाना खिलाने के लिए बनाए गए फूड बैंक :-

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि भोजन सभी मनुष्यों के लिए एक बुनियादी जरूरत है, लेकिन कुछ लोगों के पास दो वक्त का भोजन भी नही है , इसलिए जरूरतमंद लोगों की इस बुनियादी जरूरत को पूरा करने के लिए Dera Sacha Sauda के पूजनीय गुरु संत डॉ Gurmeet Ram Rahim सिंह जी इन्सां ने “Food Bank” स्थापना की। यह फूड बैंक केवल एक जगह पर नहीं है, ऐसे फूड बैंक कई स्थानों पर हैं, जहां Dera Sacha Sauda के अनुयायी रहते हैं।

फ़ूड बैंक कैसे काम करता है?

डेरा सच्चा सौदा के स्वयंसेवक सप्ताह में एक दिन उपवास रखते हैं और उस दिन का बचा हुआ भोजन Food Bank में एकत्र करते है और वहा से जरूरतमंद को देते हैं, यह भोजन मासिक आधार पर हजारों जरूरतमंद परिवारों को प्रदान किया जाता है, Dera Sacha Sauda के लाखों अनुयायी सप्ताह में एक दिन उपवास रखते है और अपने भोजन के हिस्से को किसी और की थाली में रखने के लिए फ़ूड बैंकों में जमा करवाते है, किसी को खाना खिलाने के लिए उपवास रखना मानवता की सेवा करने का एक अनूठा तरीका है जिसे पूज्य गुरु Saint Dr. MSG जी ने शुरू किया। जो लोग उपवास नहीं रख सकते, वे दुकानों से कच्चे खाद्य उत्पाद खरीदते हैं और जरूरतमंदों को देते हैं।

हफ्ते में एक दिन उपवास रखने के अनेकों लाभ है :-

  1. उपवास हृदय रोगों से भी बचाता है।
  2. यह कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रण में रखता है।
  3. यह वजन घटाने में मदद करता है।
  4. अगर सही और नियमित रूप से किया जाए तो उपवास मस्तिष्क की कार्यक्षमता को भी बढ़ाता है।
  5. यह इम्युनिटी को भी बेहतर बनाता है।
  6. यह एक बेहतर दिखने वाली और ग्लोइंग स्किन प्रदान करता है जो कि पिंपल फ्री, मुंहासे मुक्त है।
  • इसके अतिरिक्त Dera Sacha Sauda के स्वयंसेवक अपने हर खुशी के अवसर पर जैसे – शादी की सालगिरह ,जन्मदिन आदि पर भी इन बैंकों में राशन जमा करवाते हैं क्योंकि जब वह राशन गरीब लोगों में दान किया जाता है तो उनसे दुआएं मिलती हैं ।

जरूरतमंदों की मदद के लिए बनाए गए Cloth Bank :

जैसा कि नाम से ही विदित है कि ये बैंक अति जरूरतमंद लोगों को कपडे (जो कि जीने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं),दान देने के लिए बनाए गए हैं, हमेशा यह कहा जाता है हवा एंव पानी के बाद रोटी, कपड़ा एंव मकान जीने के लिए अत्यंत आवश्यक है, इन चीजों के बिना जीना अत्यंत कठिन प्रतीत होता है।

अतः इन आवश्यकताओं की पूर्ती हेतु इन बैंकों की आवश्यकता महसूस हुई, कहते हैं कि तड़पती हुई रूहों(आत्माओं) की पुकार भगवान जरूर सुनते हैं।

Dera Sacha Sauda के प्रमुख पूजनीय गुरु संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसान द्वारा गरीब एंव जरूरतमंद लोगों के लिए Cloth Bank की शुरुआत की गई है।

पूज्य गुरु जी के एक आह्वान से डेरा स्वयंसेवको द्वारा देश मे ही नही बल्कि विदेशों में भी Cloth Bank बनाए गए है जहां से जरूरत मंद लोगों को कपड़े वितरित किए जाते है ।

  • सर्दी के मौसम में डेरा स्वयंसेवक अति जरूरत मंद लोगो को गर्म किट वितरित कर रहे है जिनमे सर्दी के सभी सामान जैसे – कम्बल, जर्सी, मुफ़लर, शॉक्स , ग्लब्स आदि उबलब्ध होते है ।
  • सबसे आश्चर्य की बात तो यह है कि डेरा सच्चा सौदा के स्वयंसेवक इस सर्दी के मौसम में सड़कों पर पहरा लगाते हैं ताकि कोई जरूरतमंद सर्दी से ना तड़पे और सड़क पर बेसहारा लोगों को गर्म कपड़े व कंबल वितरित करते हैं । महामारी में भी योद्धाओं ने किया इंसानियत का फर्ज अदा:-

मानवता के सच्चे योद्धा वही होते हैं जो हर परिस्थिति में लोगों की मदद करें और Dera Sacha Sauda के स्वयंसेवक मानवता के सच्चे योद्धा हैं जो कोरोनावायरस के चलते हुए जब सभी अपनी जान बचाने के लिए घरों में बंद थे तो उस समय अपनी जान की परवाह किए बिना जरूरत मंद व गरीब लोगो की मदद के लिए उनके इलाकों में पहुँच कर राशन व भोजन वितरित किया ।

प्रेरणास्रोत – जब कोई नेकी की राह पर चलता है तो उनका कोई ना कोई प्रेरणास्रोत जरूर होता है इसी प्रकार Dera Sacha Sauda के 6.5 करोड़ लोगों के प्रेरणास्रोत पूज्य गुरु Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insna है , गुरु जी की शिक्षा पर चलते हुए ही Dera Sacha Sauda के स्वयंसेवक राशन दान , वस्त्रदान, खूनदान, पौधारोपण , मरणोपरांत नेत्र दान , शरीरदान आदि 134 मानवता भलाई के कार्य कर रहे है , गुरु जी को कोटि कोटि नमन! जिन्होंने करोड़ो लोगो को इंसानियत का पाठ पढ़ाया , मरती हुई इंसानियत को पुनः जिंदा किया ।

निष्कर्ष:
इस स्वार्थी युग में, क्रूरता छोड़ें और दूसरों के बारे में भी सोचें ,जितना हो सके जरूरतमंदों की मदद करें, भोजन व वस्र जीवन जीने की मूलभूत आवश्यकता है, इसलिए यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम भोजन की कमी के कारण किसी को भी मरने न दें। भगवान की कृपा से हम सभी किसी न किसी तरह से भूखे का पेट भरने में सक्षम हैं और उपवास का तरीका इसमें सबसे अच्छा है व जिन कपड़ो को आप नहीं पहनते उन्हे गरीबो में दान करे ।

अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस : 9 दिसम्बर

आज के समय में भ्रष्टाचार से कोई देश, क्षेत्र या समुदाय अछूता नहीं है यह दुनिया के सभी हिस्सों में फैल चुका है चाहे वो राजनीतिक हो , सामाजिक हो या आर्थिक ।भ्रष्टाचार दुनिया के लिए एक बहुत बड़ी समस्या है विश्व के लगभग सभी देश भ्रष्टाचार की समस्या से जूझ रहे हैं, भ्रष्टाचार एक दीमक की तरह है जो हमारे समाज ,अर्थव्यवस्था और पूरे देश को खोखला कर रहा है यह समाज और देश के विकास में बहुत बड़ी बाधा है ।

भ्रष्टाचार एवं इसके उन्मूलन हेतु कारगर उपायों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए ही अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार निरोध दिवस मनाया जाता है।
भ्रष्टाचार एक गंभीर अपराध है ।
सरल शब्दों में कहें तो भ्रष्टाचार एक प्रकार से बेईमान या धोखेबाज आचरण को दर्शाता है, आमतौर पर रिश्वत लेना इसमें शामिल है ।

अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार निरोधक दिवस की शुरुआत:-

अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार निरोध दिवस को मनाये जाने की शुरूआत संयुक्त राष्ट्र महासभा के द्वारा 31 अक्टूबर 2003 को जारी घोषणा-पत्र 58/4 के अनुसार हुई ।

उसके बाद से हर साल 9 दिसंबर को पूरे विश्व में अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस मनाया जाता है ।

डेरा सच्चा सौदा का भ्रष्टाचार जैसी बुराइयों को समाज और देश से खत्म करने में योगदान

संत फिर फकीरों का मुख्य उद्देश्य समाज से बुराइयों को खत्म करके लोगों में सद्गुणों को पुनर्जीवित करना होता है , संत अपने अनमोल वचनों और सत्संगो के माध्यम से लोगों को ठगी , बेईमानी, भ्रष्टाचार आदि बुराइयों से दूर करते हैं, पूजनीय गुरु संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसा एक ऐसे महान संत गुरु है ,जिन्होंने इन बुराइयों को दूर करने के अनेक तरीके बताए ।

गलत तरीके से कमाया गया पैसा छीन लेता है सुख शांति:-

हमारे सभी धर्मों में साफ लिखा है कि ठग्गी बेईमानी और भ्रष्टाचार से कमाया गया पैसा सुख शांति छीन लेता है , जब इंसान ठग्गी बेईमानी करके किसी का हक मारकर खाता है तो घर में दौलत तो आती है लेकिन सुख शांति छीन जाती है, गलत तरीके से कमाई गयी दौलत घर में दुख कलह कलेश पैदा कर देती है ।

पूजनीय गुरु जी फरमाते है रंग लाती है मेहनत की कमाई :-

जब इंसान मेहनत की कमाई करके खाता है तो घर में खुशियां आती है बरकत होती है क्योंकि मेहनत की कमाई हमेशा फलती फूलती हैं जबकि ठग्गी – बेईमानी भ्रष्टाचार की कमाई बर्बाद कर देती है ।

डेरा सच्चा सौदा में हक हलाल की कमाई करने की दी जाती हैं शिक्षा :-

पुज्य गुरू संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसा ने अपने अनुयायिओं को हक हलाल की मेहनत की कमाई कर के खाने की शिक्षा दी है और खुद इस बात का बहुत बड़ा उदाहरण भी दें चुकें हैं व खुद कृषि वैज्ञानिक भी है उन्होंने ऐसी ऐसी अनाज की फसलें खुद मेहनत करके उगाई है जो कोई सोच भी नहीं सकता जहां पर फसले नहीं हो सकती थी सिरसा जैसे शहर में उन्होंने सेब, काजू, बदाम आदि जैसी फसलें उगाई |

पूज्य गुरु संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह इंसां जी ने मूवीज में 43 रॉल्स अपनी निभाये है, पूज्य गुरु जी ने अपने अनुयायियों को भी हक हलाल की मेहनत की कर के खाने के लिए प्रेरित किया है और ठग्गी बेईमानी के लिए हमेशा उन्हें रोका हैं और खुद मेहनत कर खाने के लिए कहा है, आज पूज्य गुरु जी की दी गई शिक्षा पर चलते हुए करोड़ों लोग खुद मेहनत करके खाते हैं यही नहीं भूख से तडप रहे लोगों को भी खुद की कमाई से गरीब व जरूरतमन्दों में खाना बाँट देते हैं |

हज़ारो डेरा सच्चा सौदा अनुयायी रिश्वत न देने का लिखित में ले चुकें हैं प्रण और गिनती जारी है :-

2011 में भारत के प्रत्येक सार्वजनिक और निजी क्षेत्र में बढ़ते भ्रष्टाचार को देखते हुए,
Dera Sacha Sauda के प्रमुख पूजनीय गुरु संत डॉ Gurmeet Ram Rahim Singh Ji इंसां ने डेरा अनुयाइयों को फरमाया कि भ्रष्टाचार को रोकने में अपना योगदान दें और पूज्य गुरु जी के एक आह्वान पर करोड़ों अनुयायिओं ने रिश्वत न देने व न लेने का लिखित में प्रण लिया हुआ है |

डेरा सच्चा सौदा, हर तरह की सामाजिक कल्याण पहल को क्रियान्वित करने और बढ़ावा देने में दुनिया में है अग्रणी :-

पूजनीय गुरु जी के निर्देशों का पालन करते हुए, 2 दिसंबर 2013 को 93, 691अनुयायिओं ने किसी भी रूप में रिश्वत की पेशकश नहीं करने का प्रण किया है और सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों में 1,322 अधिकारियों ने भ्रष्टाचार-रोधी प्रतिज्ञा पत्र पर हस्ताक्षर करके रिश्वत स्वीकार नहीं करने का संकल्प लिया है ।

ऐसे कई उदाहरण है जब डेरा सच्चा सौदा के अनुयायिओं ने रेलवे, ट्रैफिक पुलिस या सरकारी कार्यालयों में टिकट चेकर को रिश्वत देने से इनकार कर दिया था और उनसे प्रेरित होकर अधिकारियों ने भी दोषी महसूस किया और भविष्य में रिश्वत न मांगने या स्वीकार करने की कसम खाई।

पूज्य गुरु जी द्वारा गुरु मंत्र देकर ध्यान की विधि बताई जाती है और ध्यान के द्वारा इन बुराइयों को छुड़वाया जाता है, पूज्य गुरु जी द्वारा अनुयायियों को ठगी बेईमानी से दूर रहने की व मेहनत, इमानदारी से कमाई करके खाने की शिक्षा दी जाती है ।

निष्कर्ष :-
पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह इंसा फरमाते हैं कि ठग्गी , बेईमानी भ्रष्टाचार की कमाई से किसी का भला नहीं होता, इसलिए हमेशा मेहनत व हक हलाल की कमाई करके खाए व भ्रष्टाचार को रोकने में अपना योगदान दें ।

नशा एक सामाजिक अभिशाप

हर व्यक्ति बड़ा ही पाक पवित्र जन्म लेता है पहले 9 महीने माँ के गर्भ में रहता है उसके बाद इस संसार में आता है, उस समय न तो कोई चालाकी होती है और न ही कोई गलत आदत।जैसे माहौल और जैसे घर परिवार विद्यालय कॉलेज इत्यादि में व्यक्ति को ज्ञान और संस्कार मिलते हैं, जैसी संगत में व्यक्ति रहता है वैसा ही उस व्यक्ति का चाल चलन, खान पान हो जाता है।

नशों का युवाओं पर बुरा प्रभाव

हम सभी जानते हैं कि हमारी युवा पीढ़ी हमारे देश का भविष्य है l लेकिन आज की युवा पीढ़ी नशे में पूरी तरह से लिप्त हो चुकी है, कोई शराब तो कोई तंबाकू पता नहीं कैसे-कैसे नशे कर रहे हैं, यह जानते हुए भी कि नशा उन्हें और उनके पूरे परिवार को बर्बाद कर देगा, लेकिन वे इस बुरी संगत के आदी हो चुके हैंl यहां तक की खुद को नशा देने के लिए इंजेक्शन तक ले रहे हैं, बिना इसका दुष्प्रभाव जाने |

Drug एक ऐसा अवैध पदार्थ है जिसे लेकर व्यक्ति शारीरिक या मानसिक रूप से एकदम कमजोर पड़ जाता है, या एक शब्द में कहें तो यह मीठा जहर है जिसे लेकर व्यक्ति कुछ घण्टे खुशी महसूस करता है, लेकिन वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है, कुछ समय के बाद नशे लेने वाले व्यक्ति का शरीर एकदम खोखला पड़ जाता है व उसकी जिंदगी नरक बन जाती है, ऐसे व्यक्ति जो नशे करते हैं उनके अंदर ताकत नाम की चीज नहीं होती, व्यक्ति के फेफड़े, जीभा, पेट, लीवर, आँतें सब कुछ खराब हो जाता है।

नशों से होने वाले हानिकारक रोग

नशे सिर्फ पैसा ही बर्बाद नहीं करते, बल्कि यह आपकी और आपके परिवार की जिंदगी बर्बाद कर देते हैं और गोलिया कैप्सूल नुकसान के अलावा कुछ भी नहीं है, पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसा फरमाते हैं कि नशा करने से विभिन्न प्रकार के रोग हो सकते हैं |

  1. इससे दिल की समस्याएं वह हार्टअटैक कैसी प्रॉब्लम हो सकती हैं |
  2. एचआईवी संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है |
  3. लीवर डैमेज या फेल हो सकता है |
  4. कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है |
  5. एक दूसरे पर उपयोग की जाने इंजेक्शन से एचआईवी संक्रमण का खतरा सबसे अधिक बढ़ जाता है |
  6. गले व गाल का कैंसर |
  7. फेफड़ों की बीमारी |

नशे आपको अंधेरे की दलदल में खींचते हैं इसे लेना बंद कर दें, इससे पहले कि वह आपकी खुशियां छीन लें |

नशा करने से कम होती है उम्र

जो लोग नशे का सेवन करते हैं, चाहे कोई भी नशा हो ऐसा करने से उनकी उम्र आधी रह जाती हैं, सुनने में यह अजीब लगता हैं लेकिन यह बिल्कुल सच है, हम सभी इस बात से विदित हैं कि हर व्यक्ति को भगवान ने निश्चित श्वांस(सांस) दिए हैं पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह इंसां जी फ़रमाते है एक स्वस्थ व्यक्ति 1 मिनट में 16 से 18 बार श्वांस लेता है, लेकिन जो लोग प्रकृति के विरुद्ध जाकर नशे करने लग जाते हैंl उनको एक मिनट में इसके दोगुने सांस आने लगते हैं, अर्थात जो व्यक्ति नशे करते हैं वो 1 मिंट में 16 की बजाय 32 श्वांस लेने लग जाते हैं। जिससे उनके श्वांस जल्दी खत्म होने लगते हैं, जितनी उम्र भगवान ने लिखी होती है, उसकी आधी उम्र ही रह जाती है।

पुरातन काल में इसका स्पष्ट उदाहरण मिलता है, हमारे कई ऋषि मुनि ऐसे हुए हैं जिनकी उम्र सैंकड़ों हज़ारों साल थी ऐसा कैसे हो जाता था, इसका कारण यह था कि वे ऋषि मुनि शाकाहारी हुआ करते थे, नशों से दूर थे एंव भगवान प्राप्ति के लिए जब वे ध्यान ( meditation) में बैठते थे तो अपने श्वांस को रोक लेते थे भगवान भक्ति करते रहते थे। ऐसा करने से वो 3 या 4 मिनट में कई बार 1 श्वांस लेते थे, और कई अभ्यासी तो इसे घण्टों तक ले जाते थे। यही कारण था कि उनके श्वांस सैंकड़ो हज़ारों साल में पूरे होते थे।

नशा बर्बादी का घर

नशा बर्बादी का घर हैं, सबसे पहले तो ये हमारे श्वांस बर्बाद करते हैं जो बहुत कीमती हैं, उसके बाद हमारे शरीर, हमारे घर परिवार को नरक बना देता है |

नशे रूपी बुराई से खुद को और समाज को बचाना चाहते है, नशे करने वाले व्यक्ति की संगत कभी न करें

कहावत है खरबूजे को देखकर खरबूजा रंग बदलता है इसलिए कभी भी गलत संग नही करना चाहिए, ऐसे लोग जो आपको नशे की लत लगाते हैं, वो आपके दुश्मन होते हैं। हो सकता है 5 या 7 बार वो आपको अपने पैसों से नशे का इंतज़ाम करके दें लेकिन उसके बाद आपकी कमाई से पैसे लगने शुरू हो जाते हैं जो अंत तक आपको व आपके परिवार को सड़कों तक ले आ सकते हैं।
रिश्ते बहुत कीमती होते हैं कोई पति/पत्नी अगर शराबी या नशेड़ी है तो उसके साथ रहना भी बडा मुश्किल हो जाता है।

इसलिए हर मां बाप को भी चाहिए कि कभी भी अपने बच्चों को गलत संगत में न पड़ने दें।चाहे बेटा है चाहे बेटी दोनों के साथ एक घनिष्ट मित्र की तरह व्यवहार करें, उनके लिए राक्षस मां बाप न बनें। बल्कि पूरा फ्रेंडली रहें अपने बच्चों के साथ ताकि आपके बच्चे आपको हर छोटी से छोटी एंव बड़ी से बड़ी बात बता सकें। चूंकि वो बच्चे आपका खून है तो जाने अनजाने में अगर आपके बच्चे गलत रास्ते पर हैं तो आप उन्हें समझाकर सही रास्ते पर ले आओगे। जिससे बहुत जिंदगियां बच जाएंगी।

नशा मुक्त समाज बनाने में डेरा सच्चा सौदा का योगदान

आतंकी संगठनों द्वारा ही इस दुनिया में इस भयंकर नशे रूपी राक्षश ने अपने पाँव पसार रखे हैं।
नशाखोरी बहूत बुरी लत है, इसे रोकना होगा।ड्रग माफिया नशे रूप जहर को इस संसार में घोलना चाहते हैं।नशे करने वाले बच्चे, युवा, अधेड़ इस नशे रूपी जाल में फंसकर बहुत परेशान हो रहे हैं। जब देश के बच्चे एंव युवा नशे की लत में आते हैं तो स्पष्ट रूप से देश की तरक्की का ग्राफ नीचे की और बढ़ता है। यह स्पष्ट रूप से एक ऐसा युद्ध है जिसे जीतने के लिए हमें अपने अंदर की इच्छा शक्ति को उस भगवान के नाम के द्वारा जाग्रत करना होगा, क्योंकि जब हमारे अंदर का ज़मीर पाक पवित्र होगा तो हम किसी भी बुराई की दलदल में नही फसेंगे।

एक ऐसी संस्था जो 7 दिन में छुड़वाती है गंदे से गंदे नशे

हमारे देश में एक ऐसी संस्था है जहां पर 7 दिन में सेवा, सिमरन कर के गंदे से गंदे नशे छुड़वा दिये जाते हैं। 70-70 नोरफीन के इंजेक्शन लगाने वाले युवा 7 दिन में पूज्य गुरु संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह इंसां जी से नाम की अनमोल दात लेकर नशा करना छोड़ दिया और वो सभी पूज्य गुरु जी का करोड़ों बार धन्यवाद करते हैं |

नशों से होने वाली बीमारियों के बारे जागरूक करने के लिए डेरा सच्चा सौदा के सेवादार गाँव गाँव जाकर निकालते है रैलियां

डेरा सच्चा सौदा के अनुयाई गांव गांव जाकर रैलियां निकालते हैं और नशे के खिलाफ लोगों को जागरूक करते हैं इतना ही नहीं इस से प्रभावित होकर और भी लोग रैली में अपना योगदान देते हैं और सेमिनार आयोजित करते है लोगों को जागरूक करने के लिए सबसे अच्छा सुझाव है, इससे बहुत से लोग प्रभावित होकर नशा छोड़ चुके हैं और इतना ही नहीं पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह इंसां जी से नाम विधि लेकर उसका अभ्यास करते हैं और अपने आत्मविश्वास को बढ़ाते हैं तांकि जिंदगी में फिर कभी भी नशा ना करें |

मैडिटेशन के द्वारा आत्मबल बढ़ाकर नशे की बुरी आदत से छुटकारा पाएं

आत्मबल को बढ़ाने के लिए रोजाना मेडिटेशन के साथ-साथ प्राणायाम भी करना चाहिए l डेरा सच्चा सौदा के करोड़ों अनुयायियों ने पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसा से नाम की विधि लेकर रोजाना सुबह शाम 15-15 मिनट मैडिटेशन किया और साथ ही प्राणायाम भी किया, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ने लगा और वह नशे जैसी बीमारियों से मुक्त हो गए |

डेरा सच्चा सौदा सिरसा हरियाणा में 6.5 करोड़ से भी ज्यादा लोगों को नशों से दूर किया और आज पूज्य गुरु संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह इंसां जी के 6.5 करोड़ अनुयाई भगवान के नाम के नशे से अपने घर व परिवार को महका रहें हैं, ऐसे ऐसे घर परिवार जो नशे के कारण बर्बाद हो गए थे, जहां से रोजाना गाली गलौच सुनने को मिलता था, जैसे ही वो लोग पूज्य गुरु संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसान से मिले, गुरुमंत लिया व गुरूमंत्र का जाप किया तो गंदे से गंदे नशे छोड़ गए और आज डेरा सच्चा सौदा के करोड़ों अनुयाई पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह इंसां जी की पावन प्रेरणा से नशा न करने का लिखित में प्रण ले चुके हैं और अपना खुशहाल जीवन जी रहें है |

निष्कर्ष :-

नशा नहीं करना चाहिए ये बर्बादी की जड़ है पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसा फरमाते हैं कि इंसान को कभी भी नशा नहीं करना चाहिए नशा बर्बादी का घर होता है इतना ही नहीं नशा ही सर्व नाश का कारण बनता है, लोगों को जितना ज्यादा हो सके इससे अपना बचाव करना चाहिए |

Volunteers (स्वयंसेवको) किसे कहा जाता है

अपने कीमती समय में से समय निकालकर गरीब व अति जरूरतमंद लोगों की बिना किसी स्वार्थ के सेवा करने वाले लोगो को ही Volunteers (स्वयंसेवक) कहा जाता है ।

अपने लिए तो हर कोई जीता है लेकिन अच्छे नेक संस्कारों वाले लोग होते है जो अपने और परिवार के साथ साथ दूसरों का भी ख्याल रखते हैं, दूसरों की भी हरसंभव सहायता करते हैं,किसी भी मुश्किल घड़ी में हर समय परहित परमार्थ के लिए तैयार रहते हैं अर्थात जो निःस्वार्थ भावना से हमेशा दूसरों की सहायता करते हैं (बिना किसी तनख्वाह के) उन्हें ही स्वयं सेवक कहा जाता है।

अंतरराष्ट्रीय स्वयंसेवक दिवस के बारे में रोचक तथ्य :-

संयुक्त राष्ट्र महासभा में 17 दिसंबर 1985 को यह प्रस्ताव पारित किया गया कि हर वर्ष 5 दिसंबर को अंतराष्ट्रीय स्वयंसेवको के दिन के रूप में हर्षोल्लास से मनाया जाया करेगा।

स्वयंसेवकों का कार्य बड़ा ही अहम होता है ,वे अपने कार्यों से युवाओं को राष्ट्र की मुख्य धारा से जोड़ने हेतु प्रेरित करते हैं ।

When and why we celebrate international Volunteers Day (स्वयंसेवक दिवस) :-

प्रतिवर्ष 5 दिसंबर को International Day Of Volunteers मनाया जाता है ।
5 दिसंबर का दिन अंतराष्ट्रीय स्वयंसेवको का दिन होता है ।
यह एक वैश्विक उत्सव है, जो कि राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय स्तर पर सभी देशों की भागीदारी के साथ बड़े सम्मानपूर्वक मनाया जाता है।

Volunteers Day मनाने का मुख्य उद्देश्य उन सभी लोगो का आभार प्रकट करना है जो बिना किसी स्वार्थ के बिना रुपये पैसे लिए लोगो की सेवा करते है जो मुफ्त में अपनी सेवाएं देते है ।

इसके अतिरिक्त अंतरराष्ट्रीय स्वयंसेवक दिवस स्वयंसेवकों के अवसरों के प्रति आम जनता में जागरूकता फैलाने हेतु मनाया जाता है,इस अवसर पर जन-जागरूकता पैदा करने हेतु कान्फ्रेंस, सेमिनार, स्वच्छता अभियान आदि कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, यह दिवस सामुदायिक स्तर पर स्वयंसेवकों की बढ़ती संलिप्तता एवं भागीदारी को रेखांकित करता है ।

International volunteers day 2020 theme :Together we can work

पिछले महीनों में, जैसा कि दुनिया भर में महामारी ने सबको परेशान कर दिया, स्वयंसेवक चिकित्सा, सामुदायिक और सामाजिक प्रतिक्रियाओं में सबसे आगे रहे हैं, दुनिया के मीडिया में सुर्खियों ने स्वयंसेवकों को चिकित्सा देखभाल प्रदान करने, कमजोर पड़ोसियों के लिए खरीदारी करने या अकेले रहने वाले बुजुर्ग लोगों की जांच करने में मदद करने से लेकर राशन दान आदि कार्य किए गए ।

2020 की थीम के अनुसार हम सब भी स्वयंसेवक बन सकते है व हमें भी सबके साथ मिलकर जरूरतमंद लोगो की मदद करनी चाहिए ।

विश्व स्तर पर करोड़ो स्वयंसेवक कर रहे है है जरुरतमंदो की हर संभव मदद, आईये जानते कौन है यह स्वयंसेवक और किस क्षेत्र में यह अपनी हैरानी जनक सेवाएं दें रहें है

  1. Donating blood to needy

कहते है ना कि रक्त को बनाया नही जा सकता बल्कि इसे तो दान ही किया जा सकता है इसलिए ही रक्तदान को महादान कहा जाता है ।रक्तदान करने वाले भी योद्धा होते है जो अपना रक्त किसी ओर की रगों में बिना किसी स्वार्थ के बहा देते है ।

Dera Sacha Sauda के हज़ारों नही ,लाखो नही बल्कि करोड़ो Volunteers है,जो स्वेच्छा से हर 3 माह में रक्तदान करते है और अब तक लाखो जिंदगिया बचा चुके है ।

महामारी के कारण हुए lockdown में जब लोग अपनी जान को बचाने के लिए घरों के अंदर थे, तो उस समय भी डेरा सच्चा सौदा के स्वयंसेवको ने ब्लड बैंकों में जाकर रक्तदान किया ताकि थैलीसीमिया , दुर्घटना ग्रस्त लोगों व जररूत मंद लोगो को रक्त मिल सके ,रक्त की पूर्ति हो सके ।

Dera Sacha Sauda के स्वयंसेवको द्वारा समय समय पर रक्तदान शिविरों का आयोजन भी किया जाता है ।डेरा स्वयंसेवक हर 3 माह में रक्तदान पूज्य गुरु संत डॉ Gurmeet Ram Rahim Singh Ji इंसान की प्रेरणा से गुरु जी द्वारा चलाई “True Blood Pump ” मुहिम के तहत करते है ।

  1. Providing roof over the head of homeless :-

आज के समय में कोई किसी को एक रुपया नही देना चाहता लेकिन Dera Sacha Sauda के करोडो Volunteers स्वेच्छा से अपनी नेक कमाई का हिस्सा निकाल कर गरीब व बेसहारा लोगो को घर बना कर देते है , ताकि उनका अपना घर हो सर्दी , गर्मी , बरसात से वो खुद को सुरक्षित रख सके , बेसहारा लोगो का सहारा बनना अपने आप मे बेमिसाल है ।

डेरा सच्चा सौदा के स्वयंसेवकों द्वारा लाचार , विधवाओ व सेकड़ो बेसहारा लोगो को मकान बनाकर दिए जा चुके है ।डेरा Volunteers को यह कार्य करने की प्रेरणा पूज्य गुरु Saint Dr. Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan से मिली है गुरुजी ने “आशियाना” मुहिम की शुरुआत की जिसके तहत ही बेसहारा व गरीब लोगों को घर बना कर दिए जाते है, गरुजी खुद भी बेसहारा ओर अनाथ बच्चों का सहारा बनते है ।

  1. Awareness rallies and seminars to aware masses and making society drugs free

आज के समय मे नशा करना आम बात हो गईं है बच्चे ,बूढे , नोजवान सब नशों में लिप्त है , लेकिन नशों के कारण हर मिंट सेकंड में लाखों लोग जान गवा देते है ।समाज को नशामुक्त बनाने के लिए Dera Sacha Sauda के करोडो Volunteers लोगो को नशों से होने वाले हानिकारक प्रभावों के बारे में बताकर जागरूक करते है ।

समय समय पर स्वयंसेवक जागरूकता सेमिनार का आयोजन करते है और अपने अपने ब्लॉकों शहरों में रैलिया निकालते है , ताकि युवा नशों से दूर रहे ।पूज्य गुरु Saint Dr MSG की प्रेरणा से करोड़ों लोग नशा छोड़ चुके है ।

  1. Helping needy by providing clothes

रोटी कपड़ा और मकान हर इंसान की बुनियादी आवश्यकता है लेकिन सर्दी में बहुत से गरीब व बेसहारा लोग होते है जिनके पास गर्म कपड़े नही होते , ओर कड़ाके की सर्दी में बहुत से लोग दम तोड़ देते है उन लोगो के दुख दर्द को देखते हुए Dera Sacha Sauda के Volunteers गरीबो व जरूरत मंद लोगो को गर्म कपड़े जैसे – स्वेटर, मुफ़लर , शॉक्स ग्लब्स व कम्बल आदि सर्दी के सभी सामान वितरित कर रहे है ताकि वह सर्दी से बच सके ।

पूजनीय गुरु संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसान ने “Cloth Bank” मुहीम की शुरुआत की जिसके तहत डेरा Volunteers गरीबो को वस्त्रदान करते है ।

  1. Ration donation to provide food to hungry

कोई भूख से ना तड़पे, कोई भूखा ना सोए इस उद्देश्य से Dera Sacha Sauda के Volunteers द्वारा अपने अपने ब्लॉकों में ‘फ़ूड बैंक” बनाए गए है , Dera Sacha Sauda के स्वयंसेवक हफ्ते में 1 दिन व्रत रखते है और उस दिन बचे भोजन को फ़ूड बैंक में जमा करवाते है जहाँ से राशन व भोजन समय समय पर गरीब व जररूत मंद लोगो को वितरित किया जाता है ये स्वयंसेवक 1 दिन या 1 हफ्ता नही बल्कि साल भर ये कार्य करते है ।

व्रत रखना तो प्राचीनकाल से चला आ रहा है लेकिन पूज्य गुरु Saint Dr. Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan ने इसको अलग रूप दिया , गुरुजी ने करोड़ों लोगों को व्रत रखने के लिए प्रेरित किया , गुरुजी फ़रमाते है कि हफ्ते में 1दिन व्रत रखने से पेट की बीमारियां दूर होती है तथा इस भोजन को जरूरतमंद लोगों को दान करने के लिए प्रेरित किया जाता है क्योंकि भूखे को खाना खिलाना बहुत बड़ा दान है ।

  1. Providing relief during earthquake or any natural and man made disaster :

अपनी जान सबको प्यारी होती है अपनी जान बचाने के लिए हम सब हर प्रयास करते है , लेकिन जब प्रकतिक आपदाए आती है तो बहुत लोगो को प्रभावित करती है , बहुत से लोग इन आपदाओं में अपनी जान भी गवा देते है ।

सरकार भी कई बार आपदा क्षति ग्रस्त स्थानों पर नही पहुँच पाती लेकिन Dera Sacha Sauda के Volunteer सूचना मिलते ही अपनी जान की परवाह किए बिना वहा पहुँच जाते है और लोगों को राहत सामग्री पहुचाते है । डेरा स्वयंसेवक अब तक लाखो लोगों की जान बचा चुके है स्वयंसेवक सेवा को ही अपना सबसे बड़ा कार्य समझते है सेवा करने का यह जज्बा Saint Dr MSG ने इन Volunteers में कूट कूट के भरा है ।

Inspiration behind crore of volunteers who are helping needy worldwide :-

Dera Sacha Sauda के स्वयंसेवक जिनकी प्रेरणा पर चलते हुए 134 मानवता भलाई के कार्य करते है वो है पूजनीय Guru Saint Dr. Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan, पूज्य गुरु जी पहले खुद यह कार्य करते है और लोगों के सामने एक उदाहरण बनते है और आज पूज्य गुरु जी की पावन प्रेरणा पर चलते हुए लाखों स्वयंसेवक 24/7 हर तरह की मदद के लिए तैयार रहते हैl

Conclusion:

पूजनीय गुरु संत डॉ Gurmeet Ram Rahim Singh Ji इंसान व Dera Sacha Sauda के Volunteers का जितना शुक्रिया अदा किया जाए कम है, जो अपनी जान की परवाह किए बिना हर समय सेवा करते है ,आज Volunteers Day पर हम सभी को भी जरूरतमंद लोगों की निस्वार्थ रूप से सेवा करने का प्रण लेना चाहिए ।

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